Mon. Apr 22nd, 2024
    कर्जमाफी

    उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक के बाद एक ऐतिहासिक और दिशा परिवर्तक फैसलों की झड़ी लगा दी थी। चाहे बीफ बैन हो या किसानों की कर्जमाफी बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हर फैसला प्रशंसनीय था और लोगों ने खुले दिल से उनका स्वागत भी किया। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के छोटे और सीमान्त किसानों के 1,00,000 रूपये तक के कल 36,000 करोड़ रूपये के कर्ज को माफ किया और किसानों का दिल जीत लिया। विपक्षी दलों ने देश के अन्य राज्यों को भी योगी आदित्यनाथ की राह पर चलने की सलाह दी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी तो सबसे एक कदम आगे निकला आए। उन्होंने किसानों की कर्जमाफी पर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने यह कर्जमाफी उनकी किसान रैलियों की वजह से की है।

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी हास्य कला में निपुण व्यक्ति हैं और पूरे देश के मनोरंजन का ध्यान रखते हैं। उनके बयान अक्सर देशवासियों और कभी-कभी तो विपक्षियों के चेहरों पर भी मुस्कान ला देते हैं। कर्जमाफी पर बयान देने से पहले उन्होंने यह नहीं सोचा कि अगर उनकी किसान रैलियां इतनी ही प्रभावी थी तो 2500 किलोमीटर की किसान यात्रा करने के बावजूद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन सूबे के सियासी दंगल में उसका अब तक का सबसे शर्मनाक प्रदर्शन क्यों रहा? इन सबसे परे हटकर योगी सरकार द्वारा की गई कर्जमाफी की बात करते हैं। जिला कृषि अधिकारी द्वारा जारी किए आंकड़ें कर्जमाफी की हकीकत को बयाँ करते हैं।

    योगी सरकार ने कर्जमाफी में किसी किसान के 9 पैसों का ऋण माफ किया है तो किसी के 84 पैसों का ऋण माफ किया है। हालाँकि यह दोनों ही रकम कर्जमाफी के लिए निर्धारित 1 लाख रूपये की सीमा के अंतर्गत ही आते हैं पर आज के दौर में इनका कोई अस्तित्व नहीं है। आज जब महँगाई आसमान छू रही है और प्याज, टमाटर आम आदमी की पहुँच से निकालता जा रहा है, ऐसे में कर्जमाफी के नाम पर किया गया ये गंदा मजाक जमीनी स्तर पर कहीं से भी प्रशंसनीय नहीं है।

    बीते 17 अगस्त को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक भव्य कार्यक्रम में सूबे के किसानों को ऋण माफी का प्रमाण-पत्र बाँटकर इस योजना की शुरुआत की थी। बतौर मुख्य अतिथि गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के 7500 किसानों को ऋणमाफी का प्रमाण-पत्र दिया गया था। इस कर्जमाफी को उत्तर प्रदेश फसल ऋण मोचन योजन का नाम दिया गया था। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने कुल 36,000 करोड़ रूपये के राशि की कर्जमाफी की है।

    उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के जिला कृषि अधिकारी द्वारा जारी की गई सूची से इस कर्जमाफी की पोल खुलकर सामने आई है। बिजनौर जिले में किसानों का 9 पैसे तक का कर्ज भी माफ हुआ है और उनका नाम ऋण माफी प्रमाण-पत्र की प्राप्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। इस कर्जमाफी की रकम से ज्यादा खर्च तो प्रदेश सरकार ने ऋण माफी प्रमाण-पत्र देने में कर दिया है। इसे देखकर एक पुरानी कहावत याद आती है –

    “जितने का बच्चा नहीं उतने का तो खिलौना आ गया”

    कर्जमाफी
    कर्जमाफी पर हिन्दुस्तान में छपी रिपोर्ट

    इस सूची में शामिल किसानों में से अधिकतर की ऋण की रकम 3 अंकों में है और उनमें से 400 रूपये से कम के ऋण वाले कई नाम इस सूची में शामिल हैं। सूबे के प्रमुख समाचार दैनिक हिन्दुस्तान में छपी रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में 22,156 किसानों की सूची सरकार को भेजी गई थी और दूसरे चरण के लिए 1,70,000 नामों की संतुस्ति की गई है। बिजनौर के जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र का कहना है, “ऋण मोचना योजना के प्रथम चरण में 22,156 किसानों का कर्ज माफ हुआ है। लघु और सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ होना था। कुछ किसान ऐसे भी हैं जिनका 9 पैसे, 84 पैसे, 2 रुपये और तीन रुपये का कर्ज माफ किया गया है। दूसरे चरण के लिए 1,70,000 किसानों के सत्यापन का काम चल रहा है। सत्यापन के बाद किसानों की सूची सरकार को भेजी जाएगी।”

    कर्जमाफी के नाम प्रदेश के किसानों की संवेदनाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ योगी सरकार को भारी पड़ सकता है। कानूनी और आधिकारिक तौर पर कर्जमाफी में प्रचलन से बाहर हो चुके पैसों और चंद रुपयों का उल्लेख सही है पर व्याहारिक रूप में किसानों के नाम के साथ उनका उल्लेख और इसके लिए ऋण माफी प्रमाण-पत्र देना कतई उचित नहीं है। सूबे की सत्ताधारी योगी सरकार को इस तरह की अशोभनीय हरकतों से बचना चाहिए जो बेवजह की अफवाहों और चर्चाओं को जन्म देती हैं।

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।