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काले धन पर निबंध

black money

काला धन सामान्यतः गैरकानूनी रूप से प्राप्त किये गए धन को इकठ्ठा रखना है। धन को काला धन जो घटक बनता है वो यह है की इस धन में से कर को घटाया नहीं जाता अर्थात यह धन कर्मचारियों की जानकारी के बिना लिया जाता है और इसमें से जब कर नहीं कटता तो यह धन काला धन बन जाता है।

ऐसा धना रखना गैरकानूनी होता है और किसी व्यक्ति के पास मिलने पर उस व्यक्ति पर कानूनी कार्यवाही होती है।

विषय-सूचि

काला धन निबंध, essay on black money in hindi (100 शब्द)

हमारे देश में काले धन की समस्या कोई नयी नहीं है। जिसे देश में सरकार लोगों के वेतन पर कर लगाती है तो सभी अपना वेतन बचाना चाहते हैं तो वे इस धन को गैर कानूनी रूप से लेते हैं और छुपाकर रखते हैं।

पैसे को या तो किसी विदेशी बैंक खातों में छुपा कर रखा जाता है या फिर इसे सोने के रूप में रखा जाता है। इससे यह धन कर से बच जाता है।

हमारे देश की सरकार देश की विभिन्न विकास की गतिविधियों के लिए कर पर निर्भर है और यदि हम उसे कर नहीं देंगे तो विभिन्न विकास की गतिविधियों को सरकार नहीं कर पाएगी और हमारा देश का विकास पीछे रह जाएगा।

सरकार ने इस समस्या के निवारण के लिए अतीत में कई कदम उठाये हैं और इसका हम हाल ही का उदाहरण ले तो कुछ समय पहले सरकार ने विमुद्रीकरण किया था जिसका मुख्या लक्ष्य देश से कालेधन रखने वाले लोगों को पकड़ना था और कालेधन की समस्या से निजात पाना था।

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काले धन पर निबंध, black money essay in hindi (200 शब्द)

कालाधन का मतलब सामायतः ऐसा धन होता है जोकि गैर कानूनी तरीके से प्राप्त किया गया है और उस धन में से कर सरकार को नहीं दिया गया है। इस वजह से धन कालाधन बन जाता है।

कालेधन की समस्या ने हमारे देश में कई और समस्या भी कड़ी कर दी हैं जोकि देश की अर्थव्यवस्था को विकसित होने से रोक रही हैं।

हमारे देश की सरकार देश का विकास करने के लिए कर के पैसे पर निर्भर होती है लेकिन जब लोग ओने वेतन में से कर नहीं देते हैं तो सरकार को विकास के लिए कम वित्त मिलता है और परिणामस्वरूप देश में वांछित विकास नहीं हो पाता है। इसके अलावा इससे आम जन पर भी असर पड़ता है क्योंकि इस समस्या से देश में महंगाई बढती है।

कालेधन के कई कारण माने जाते हैं। सबसे अहम् कारण सरकार द्वारा निर्धारित की गयी कर की दरें हैं जोकि बहुत ऊँची हैं। इसकी वजह से लोग अपने वेतन का बड़ा हिस्सा कर के रूप में सरकार को देने से कतराते हैं।

कर से बचने के लिए वे नयी नयी तकनीकें अपनाते हैं जिनमे से अधिकतर तकनीकें गैर कानूनी होती हैं। सरकार को इस समस्या का निवारण करने के लिए ठोस नियम लाने होंगे तभी यह समस्या दूर होगी और देश की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह विकास हो पायेगा। इसके साथ ही आम जन को भी सरकार का साथ देना होगा तभी देश एक विकसित देश बन पायेगा।

काले धन पर निबंध, essay on black money in hindi (300 शब्द)

प्रस्तावना (black money definition in hindi)

कालेधन को हम ऐसा धन कह सकते हैं जोकि कालेबाज़ार में कमाया जाता है अर्थात यह कानूनन सही नहीं होता है क्योंकि इसमें से वांछित कर नहीं दिया गया होता है। मुख्यतः कर से बचने के लिए पैसे को छुपाया जाता है। इससे हमारे देश के विकास में बाधा आ रही है।

काले धन के स्त्रोत (sources of black money)

यह सवाल उठता है की जब देश में इतनी बड़ी मात्रा मिएँ काला धन है तो फिर सरकार इसे खत्म करने के लिए उचित कदम क्यों नहीं उठा रही है। सरकार अपने स्तर पर कदम उठा रही है लेकिन इसमें बिना आम लोगों की सहयाता के यह बिलकुल संभव नहीं है। अतः हमें एक अच्छे नागरिक की भूमिका अदा करनी चाहिए और ऐसे गैरकानूनी कार्य करने से बचना चाहिए।

देश में की प्रकार के कर होते हैं जैसे आयकर, संपत्ति कर आदि और इतने विकल्प होने पर काला धन रखना कोई बड़ी बात नहीं है। अतः लोग कई तरीकों से काला धन बनाते हैं। इनमे से कुछ निम्न हैं:

1. निर्यात पर कालाधन :

जब एक व्यवसाय अपने उत्पादों का निर्यात करता है तो इससे बहुत ज्यादा काला धन बनता है। इस पर सरकार के कोई ठोस नियम नहीं तो अक्सर निर्यात करने वाले व्यवसायी के पास बहुत अधिक काला धन होता है।

2. कालाबाजारी :

यदि व्यवसायी अपने उत्पादों को कालेबाज़ार में बेचते हैं तो इससे कालेधन का उत्पादन होता है।

3. शेयर बाज़ार :

शेयर बाज़ार में अत्यधिक पर्फित का लेखा जोखा नहीं होता है जिससे यह काला धन बनाने का बड़ा कारण है। सरकार को शेयर मार्किट नियंत्रित करने के लिए ठोस नियम बनाने होंगे।

4. रिश्वत :

सरकारी कर्मचारी अक्सर कोई भी काम करवाने के लिए आम लोगों से रिश्वत लेते हैं जिसका लेखा जोखा नहीं होता है और इसलिए यह गैरकानूनी है। इससे काला धना बढ़ता है।

इन सभी तरीकों से हमारे देश के लोग काले धन को बनाते हैं और इसे रखते हैं जोकि गैरकानूनी है। इसके साथ ही यह हमारे देश के विकास के लिए भी हानिकारक है। इसी के चलते सरकार ने नोटबंदी की थी लेकिन यह योजना कुछ कमियों की वजह से सफल नहीं हो पायी थी।

निष्कर्ष (Conclusion)

सरकार को इस समस्या का निवारण करने के लिए ठोस नियम लाने होंगे तभी यह समस्या दूर होगी और देश की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह विकास हो पायेगा। इसके साथ ही आम जन को भी सरकार का साथ देना होगा तभी देश एक विकसित देश बन पायेगा।

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काले धन पर निबंध, black money essay in hindi, 400 शब्द

प्रस्तावना (meaning of black money)

हमारे देश में आज कालेधन की एक बहुत बड़ी समस्या है जिसके कारण कई और समस्याओं ने जन्म ले लिया है। कालेधन की वजह से ही अमीर और गरीब लोगों में बहुत अंतर आ गया है और देश का विकास इस कारण बाधित हो रहा है। इस समस्या की वजह से कर की दर बढ़ गयी है, महंगाई तेज हो रही है और आयत-निर्यात पर भी अब कर में बढ़ोतरी की जा रही है। हालंकि इसमें सरकार वांछित कदम उठारही है है लेकिन इसमें आम आदमी के साथ के बिना इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता है।

काला धन ख़त्म करने के उपाय (eradication of black money)

कालेधन को जल्द से जल्द बढ़ने से रोकने की ज़रुरत है क्योंकि इसकी वजह से देश का विकास बाधित हो रहा है और अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा है। नीचे कालेधन नियंत्रित करने के कुछ उपाय दिए गए हैं।

1. कर प्रणाली यथार्थवादी होनी चाहिए। लोगों को इसे बोझ के रूप में नहीं देखना चाहिए। उच्च कर दर केवल लोगों को कर चोरी के तरीकों की तलाश करेगी।

2. कर संग्रह की प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाया जाना चाहिए। सरकार को इस कार्य के प्रति समर्पित और ईमानदार अधिकारियों को पुरस्कृत करने के लिए कुछ कदम उठाने चाहिए ताकि अधिक से अधिक अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया जा सके।

3. सरकार को अपनी मूल्य नियंत्रण नीति पर काम करना चाहिए क्योंकि यह काले धन की उत्पत्ति और संचय के पीछे भी एक कारण है।

4. सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं पर सख्ती से नजर रखी जानी चाहिए ताकि उनके खर्च में कमी लाई जा सके।
निजी क्षेत्र के निवेश व्यय पर भी प्रभावी ढंग से नजर रखी जानी चाहिए।

5. सरकार को उन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो कई तरीकों से काले धन के विकास में योगदान करते हैं।

6. प्रशासनिक भ्रष्टाचार (corruption) को विभिन्न स्तरों पर नियंत्रित किया जाना चाहिए।

7. आईटी अधिकारियों द्वारा संपत्तियों की बिक्री और खरीद पर पूरी तरह से निगरानी रखी जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लोग इस घटना में कोई काला धन नहीं छिपाएं।

8. राजनेताओं, मशहूर हस्तियों, वरिष्ठ सिविल सेवकों और मीडिया के लोगों को अपने करों का भुगतान करने के लिए आम जनता के लिए एक उदाहरण स्थापित करना चाहिए।

9. उन लोगों को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए जो आय के स्वैच्छिक प्रकटीकरण प्रदान करते हैं।

10. विनिमय दरें यथार्थवादी होनी चाहिए और विश्व अर्थव्यवस्था में हमारी तुलनात्मक दरों और स्थिति को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion)

हालांकि मोदी सरकार ने कालेधन को रोकने के लिए नोटबंदी जैसे कदम उठाये हैं लेकिन अभी भी इस समस्या का बड़ा भाग हल होने को बाकी है अतः इसके सरकार को और देश के नागरिकों को लगातार प्रयत्न करने होंगे तभी इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकेगा और यह देश तेज गति से प्रगति करेगा।

काले धन पर निबंध, essay on black money in hindi (500 शब्द)

प्रस्तावना (Introduction)

कालाधन वह धन होता है जिसमें से कर के रूप में कुछ हिस्सा सरकार को नहीं दिया जाता है। कर ना देने के लिए ऐसे धन को सरकार से छुपा के रखा जाता है। ऐसा बड़ी संख्या में लोग करते हैं की वे धन को छुपा कर रखते हैं ताकि उन्हें उस पर कर ना देना पड़े और वे अपना कमाया धन बचा सके। इस समस्या की वजह से कर की दर बढ़ गयी है, महंगाई तेज हो रही है और आयत-निर्यात पर भी अब कर में बढ़ोतरी की जा रही है। हालंकि इसमें सरकार वांछित कदम उठारही है है लेकिन इसमें आम आदमी के साथ के बिना इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता है।सरकार इस समस्या से निजात पाने के लिए लगातार प्रयत्न कर रही है क्योंक इस वजह से देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रही है।

कैसे बनता है कालाधन

अक्सर सुनने में आता है की कई बड़े व्यापारी, मंत्री और मशहूर हस्तियों ने विदेशी बैंकों में अपना पैसा जमा किया है। यद्यपि विदेशी बैंक में भारतीयों द्वारा जमा की गई कुल राशि ज्ञात नहीं है, फिर भी कई रिपोर्टें हैं जो भारतीयों द्वारा उनके विदेशी खातों में जमा राशि का अनुमान लगाती हैं। इनमें से एक रिपोर्ट के अनुसार स्विट्जरलैंड में US $ 1.06 ट्रिलियन का आयोजन किया गया है जबकि एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीयों के स्विस बैंक खातों में लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल हैं। यह भी दावा किया गया है कि विदेशी कर में भारतीयों के अवैध धन की राशि लगभग 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।

नोटबंदी : कालेधन के खिलाफ कदम

हाल ही में मोदी सरकार द्वारा काले धन की समस्या को ख़त्म करने के लिए एक ठोस कदम उठाया था। 8 नवंबर 2016 को, नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि 500 ​​और 1000 रुपये के नोट आधी रात से अवैध हो जाएंगे। 9 और 10 नवंबर को देश भर के एटीएम बंद थे। इन्हें 2000 रुपए के नोट और 500 रुपए के नए संस्करण के साथ रिफिल किया गया। पुराने नोटों को पूरी तरह से प्रचलन से हटा दिया गया था। सरकार द्वारा यह कदम कालेधन के संचय को विफल करने के लिए उठाया गया था।

नोटबंदी का असर :

हालांकि कई लोगों ने नोटबंदी का जमकर विरिध किया लेकिन निचे नोटबंदी के कुछ सकारात्मक असर हैं :

  1. मोदी सरकार के इस कदम से भारत में अधिकतर कालाधन ख़त्म हो गया था।
  2. जो भी नेता चुनाव प्रचार में कालेधन का प्रयोग करते थे उनको इससे बड़ा झटका लगा और अब वे ऐसा करने में अक्षम हो गए।
  3. रियल एस्टेट में चल रहे बड़ी संख्या में काले धन में कमी आई।
  4. इससे माओवादियों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
  5. नकली नोटों का चलन कम हुआ।

निष्कर्ष :

कालेधन का मुद्दा देश को दीमक की तरह खाए जा रहा है अरु यदि इसे जल्दी नहीं रोका गया तो यह बढ़ जाएगा और हमारी अर्थव्यवस्था को अस्तव्यस्त कर देगा। हालांकि मोदी सरकार ने कालेधन को रोकने के लिए नोटबंदी जैसे कदम उठाये हैं लेकिन अभी भी इस समस्या का बड़ा भाग हल होने को बाकी है अतः इसके सरकार को और देश के नागरिकों को लगातार प्रयत्न करने होंगे तभी इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकेगा और यह देश तेज गति से प्रगति करेगा।

काला धन पर निबंध, black money essay in hindi, (600 शब्द)

प्रस्तावना :

आज के यूग में लोग एक स्त्रोत से नहीं बल्कि कई स्त्रोत से पैसे कमाते हैं। नौकरी करने वाले लोग अपना बेहतर भविष्य बनाने के लिए शेयर बाज़ार में या रियल एस्टेट में निवेश करते हैं। इसके साथ ही कुछ व्यवसायिओं के कई व्यवसाय होते हैं। घरेलु के साथ साथ वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यवसाय करते हैं। दो देशों की भिन्न मुद्रा होने के कारण उस पर उचित कर लगाना थोडा मुश्किल होता है।

इन्ही कुछ घटकों का फायदा उठाकर कुछ लोग अपनी कमाई को छुपाते हैं इर इस पर सरकार को कर के रूप में हिस्सा नहीं देते हैं। इस वजह से यह कालाधन बन जाता है जिसे रखना गैर कानूनी होता है। वर्तमान में कालेधन की समस्या बहुत बढती जा रही है।

कालेधन के कारण :

1. उच्च कर दर

भारत में कर की दर काफी अधिक है। करों में वृद्धि ने लोगों को अवैध धन संचय के लिए मार्ग अपनाने के लिए मजबूर किया है। देश में कर मुक्त आय सीमा सिर्फ 25000 रूपए है जोकि इन दिनों गृहस्थी चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है जब जीवन-यापन की लागत आसमान छूती है।

यही कारण है कि अधिक कमाने वाले पेशेवर अपनी आय को छिपाने के लिए ऐसा करते हैं कि उन्हें कर का भुगतान नहीं करना पड़ता है। गरीब लोग इतना कर्ज नहीं दे सकते हैं।

2. मूल्य नियंत्रण नीति

कुछ वस्तुओं जैसे खाद, चीनी, सीमेंट आदि की कीमतें सरकार द्वारा अपनी मूल्य नियंत्रण नीति के माध्यम से नियंत्रित की जाती हैं। पॉलिसी कठोर है और बाजार में उतार-चढ़ाव से नहीं गुजरती है। निजी निर्माता और खुदरा विक्रेता इस नीति का लाभ उठाते हैं जिसके परिणामस्वरूप काला धन होता है।

3. विभिन्न उत्पाद शुल्क दरें

सरकार ने उत्पादों की गुणवत्ता के आधार पर उत्पाद शुल्क के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की हैं। उत्पाद शुल्क की उच्च दर का भुगतान करने से बचने के लिए, निर्माता कई बार किसी उत्पाद को डाउनग्रेड करते हैं। इससे काले धन की उत्पत्ति होती है।

4. रियल एस्टेट लेनदेन

रियल एस्टेट लेनदेन में बड़ी मात्रा में धन शामिल होता है। लोग अचल संपत्ति लेनदेन के माध्यम से काला धन जमा करते हैं। सस्ती दर पर संपत्ति खरीदना और कीमतें बढ़ने पर इसे बेचना एक आकर्षक व्यवसाय बन गया है और इसके साथ बहुत सारा काला धन उत्पन्न होता है।

5. कोटा प्रणाली

सरकार ने निर्यात, आयात और विदेशी मुद्रा के लिए एक निश्चित कोटा निर्धारित किया है। जबकि यह लोगों के लाभ के लिए निर्धारित किया गया है, इसका अक्सर काले धन को जमा करने के लिए दुरुपयोग किया जाता है।

6. मुद्रास्फीति

उच्च मुद्रास्फीति दर को काले धन के कारणों में से एक माना जाता है। जैसे जैसे मुद्रास्फीति होती है तो लोगों का बिना वेतन बढे ही खर्चा बढ़ जाता है जिसके कारण वे अधिक कर देने में झिझकते हैं इसके कारण वे कालेधन की और बढ़ते हैं।

कालेधन का अर्थव्यवस्था पर असर :

हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर कालाधन एक काले धब्बे की तरह है। अर्थव्यवस्था के साथ साथ काल्धन समाज में भी गलत असर कर रहा है। इसकी वजह से अमीर और गरीब लोगों के बीच का अंतर बढ़ता है जिस वजह से सामजिक अंतर होता है और गरीब और गरीब हो जाता है। जब सामजिक बदलाव बढ़ जाते है तो चोरी, डकैती और लूटपाट जैसी घटनाओं में इजाफा होता है।

इसके अलावा कालेधन की वजह से कर चोरी होती है। कर चोरी का अर्थ उस राशि से भी है जो देश के विकास और विकास के लिए इस्तेमाल की जा सकती थी, सरकार तक नहीं पहुंची। अगर सरकार को पर्याप्त राजस्व नहीं मिला तो यह देश के विकास और गरीब तबकों के उत्थान के लिए नई परियोजनाएं लेने में असमर्थ होगा। जिन देशों में लोग धार्मिक रूप से करों का भुगतान करते हैं, वे उन लोगों की तुलना में कहीं बेहतर हैं, जहां बड़ी मात्रा में काला धन जमा है।

निष्कर्ष :

काले धन के मुद्दे को मिटाने के लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं। हाल ही में और इस दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम था विमुद्रीकरण। जबकि इस कदम से कुछ हद तक काले धन को खत्म करने में मदद मिली, कई लोगों ने इसकी निंदा की। हालांकि, भले ही यह मदद की, यह निश्चित रूप से पर्याप्त नहीं था। इस कुप्रथा को रोकने के लिए और भी बहुत कुछ किया जाना चाहिए। इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को और प्रभावी उपाय तलाशने चाहिए। और याद रखें, सरकार अकेले इस मुद्दे को समाप्त नहीं कर सकती है। इस पर तभी अंकुश लगाया जा सकता है जब देश का प्रत्येक नागरिक अपना योगदान दे। तभी देश तेजी से प्रगति करेगा और पूर्ण विकसित होगा।

कालेधन पर निबंध, essay on black money in hindi (800 शब्द)

प्रस्तावना :

ऐसा धन जिसमें से कर के रूप में कुछ हिस्सा सरकार को नहीं दिया जाता है, वह कालाधन कहलाता है। कर ना देने के लिए ऐसे धन को सरकार से छुपा के रखा जाता है। ऐसा बड़ी संख्या में लोग करते हैं की वे धन को छुपा कर रखते हैं ताकि उन्हें उस पर कर ना देना पड़े और वे अपना कमाया धन बचा सके। इस समस्या की वजह से कर की दर बढ़ गयी है, महंगाई तेज हो रही है और आयत-निर्यात पर भी अब कर में बढ़ोतरी की जा रही है। हालंकि इसमें सरकार वांछित कदम उठारही है है लेकिन इसमें आम आदमी के साथ के बिना इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता है।सरकार इस समस्या से निजात पाने के लिए लगातार प्रयत्न कर रही है क्योंक इस वजह से देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पा रही है।

कालेधन के स्त्रोत :

कालेधन के बहुत से स्त्रोत हैं। यदि हम सरकारी कामकाज में देखें तो भ्रष्ट अधिकारी छोटे से छोटा काम कराने के लिए आम आदमी से रिश्वत की मांग करते हैं। यह धन स्पष्ट रूप से घोषित नहीं किया जा सकता है और जानबूझकर कर के जाल से छिपाया जाता है। 

हालाँकि, यह शेल कंपनियों या मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से एक नए व्यवसायों में निवेश किया जाता है। इस तरह से जो पैसा सार्वजनिक कल्याण कार्यों में लगाया जाना चाहिए था वह पैसा वे अपने पास रखते हैं और देश के विकास में व्यवधान डालते हैं। यह ददेश के लिए बहुत हानिकारक है क्योंकि अभी हमारा देश एक विकाशशील देश है और इसे एक तेज प्रगतिदर चाहिए। यदि ऐसे कार्य देश में किये जायेंगे तो यह संभव नहीं होगा। 

सरकारी कर्मचारियों के अलावा निजी फर्म भी “ट्रांसफर मिसप्रिंटिंग” नामक एक विधि के माध्यम से काला धन उत्पन्न करती हैं। इस पद्धति में प्रयुक्त मोडस ऑपरेंडी दो एजेंसियों के बीच लेनदेन की कीमत में हेरफेर करने के लिए है, ताकि कर एजेंसियों को धोखा दिया जा सके और दोनों पक्षों को लाभ मिल सके।

हालांकि यह पैसा बेईमान तरीकों से नहीं कमाया जाता है, लेकिन यह जानबूझकर कर अधिकारियों से छिपाया जाता है ताकि कराधान से बाहर निकाला जा सके और फिर भी इसे काला धन माना जाए।

कालेधन का देश पर असर :

जब सरकारी या निजी कर्मचारी अपनी अत्यधिक वेतन में से कर नहीं देते हैं तो सरकार के पास कम कर जाता है और सरकार विकास कार्यों में कम निवेश कर पाती है। इसकी वजह से देश में रोड, सार्वजनिक सुविधाओं का अभाव होता है। इससे देश का विकास बाधित होता है। यह पैसा दुसरे ऐसे देशों में निवेश किया जाता है जहां पर कर के नियम इतने सख्त नहीं है।

इतने अधिक कालेधन के होने से सरकारी कार्यालयों का वहां प्रभावित होता है। सरकार के पास खर्च करने के लिए वित्त नहीं होता और परिणामस्वरुप ऐसा होता है। जो पैसा सरकार को देना चाहिए था और जो अंत में देश के विकास कार्यों में लगता वह इन भृष्ट लोगों के पास रह जाता है जोकि इस पैसे को अपने स्वार्थ में प्रयोग करते हैं। इससे देश का सामाजिक एवं आर्थिक विकास नहीं हो पाता है। इसके साथ ही अमीर और गरीब लोगों के बीच का भेद बढ़ता है।

कालेधन से देश के विकास पर तो असर पड़ता ही है साथ में लोगों पर भी इसका असर देखने को मिलता है। कालेधना की समस्याएं मुद्रास्फीति को बढ़ावा देती हैं। जब ऐसा होता है तो देश में महंगाई देखने को मिलती है और साथ में ब्याज दर बढ़ते हैं। इससे लोगों में रोष बढ़ता है और चोरी, लूटपाट आदि जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।

कालेधन को नियंत्रित करने के उपाय (eradication of black money)

सरकार द्वारा कालेधन को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये गए हैं। अतीत में कई बार सरकार ने कालेधन रखने वालों को अपना कालाधन दिखाने के लिए कहा था और यह शर्त राखी थी की वे कम दर पर उस पे कर दे सकते हैं। इसके अलावा एक आम आदमी भी काले धन को ख़त्म करने के लिए अपने स्तर पर कदम उठा सकता है जैसे वह शपथ ले की वह ना ही तो रिश्वत लेगा और नाही किसी कर्मचारी को मांगने पर रिश्वत देगा।

हाल ही में मोदी सरकार द्वारा काले धन की समस्या को ख़त्म करने के लिए एक ठोस कदम उठाया था। 8 नवंबर 2016 को, नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि 500 ​​और 1000 रुपये के नोट आधी रात से अवैध हो जाएंगे। 9 और 10 नवंबर को देश भर के एटीएम बंद थे। इन्हें 2000 रुपए के नोट और 500 रुपए के नए संस्करण के साथ रिफिल किया गया। पुराने नोटों को पूरी तरह से प्रचलन से हटा दिया गया था। सरकार द्वारा यह कदम कालेधन के संचय को विफल करने के लिए उठाया गया था।

उपर दिए गए उपायों के अलावा सरकार को और भी कठोर नियमों का गठन करना होगा ताकि जो भी व्यक्ति कालेधन को टैक्स से बचाता है उसे उचित सज़ा मिले। इसके साथ ही लोगों में ऐसी गतिवीधियों को ना करने की जागरूकता फैलानी चाहिए।

निष्कर्ष :

काले धन में एक राष्ट्र की प्रगति को पीछे धकेलने और आर्थिक और सामाजिक विषमता उत्पन्न करने की क्षमता है। अवैध रूप से कमाया गया धन, धीरे-धीरे राष्ट्र को किफायती और सामाजिक उथल-पुथल की स्थिति में छोड़ देता है।

यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें कोई भी सरकार अकेले नहीं लड़ सकती है और लोगों को किसी भी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी या गैरकानूनी गतिविधियों से लड़ने के लिए सहकारी और सतर्क तैयार रहना चाहिए।

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About the author

विकास सिंह

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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