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    तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन ने आज अपने 180 दिन यानी छह महीने पूरे कर लिए हैं और किसान संगठन आज यानी 26 मई को काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। इस दौरान किसान संगठन और मोदी सरकार के बीच 11 बार बातचीत हुई लेकिन वो भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ 26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन शुरू हुआ था। 

    आंदोलनकारी किसानों को तितर-बितर करने के लिए 27 नवंबर को सिंघु बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले छोड़ गए थे। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे, जिसकी अगुवाई भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत और नरेश टिकैत कर रहे थे।

    आखिरकार एक दिसंबर को केंद्र सरकार ने किसानों को पहले दौर की बातचीत के लिए बुलाया, जो बेनतीजा रही। 20 जनवरी को हुई 10 वें दौर की बातचीत में सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ से दो साल के लिए निलंबित करने और कानूनों पर विचार करने के लिए समिति के गठन का सुझाव दिया, लेकिन किसानों ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद 22 जनवरी, 2021 को किसानों और सरकार के बीच 11 वें और अभी तक के आखिरी दौर की मुलाकात हुई है।

    26 जनवरी को बिगड़ा था माहौल

    किसान संगठन ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली निकालने की चेतावनी दी थी। भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरी दिल्ली में  किसानों के हजारों ट्रैक्टर दौड़े थे, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। दिल्ली पुलिस और किसान संगठनों के बीच हुई बातचीत में रैली के लिए बाहरी दिल्ली के रूट तय किए गए थे, लेकिन आंदोलनकारियों में से कुछ किसान उग्र हो गए थे। 

    दिल्ली के आईटीओ, लाल किला, नांगलोई समेत दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हिंसा हुई थी, जिसमें दिल्ली पुलिस के कई सिपाही और किसान घायल हुए थे। लाल किले पर तिरंगे का अपमान कर धार्मिक झंडा भी फहराया गया, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ. 

    दुनिया भर का ध्यान खींचा किसान आंदोलन ने

    किसान आंदोलन ने देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोगों का ध्यान खींचा। चाइल्ड एक्टिविस्ट के तौर पर चर्चित ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन के पक्ष में ट्वीट किया, जिसमें टूलकिट नाम का एक डॉक्यूमेंट शेयर हो गया था। टूलकिट को लेकर देश में बहस छिड़ गई कि यह सब भारत के लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। 

    सुप्रीम कोर्ट के पास है कमेटी की रिपोर्ट 

    पिछले छह महीने में केंद्र सरकार और किसानों के बीच 11 बार बातचीत होने के बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को बातचीत से समाधान निकालने के लिए एक कमेटी बनाई जिसमें कृषि विशेषज्ञ अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और अनिल धनवट शामिल रहे। तीन सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को मार्च 2021 बंद लिफाफे में जमा कर दी है। कोरोना संक्रमण के चलते इस मामले में 5 अप्रैल को सुनवाई नहीं हो सकी है। 

    कोरोना संक्रमण के चलते तमाम किसान अपने घर को लौट गए हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं।

    By दीक्षा शर्मा

    गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली से LLB छात्र

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