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‘काकी’ कहानी का वर्णन

‘काकी’
सियारामशरण गुप्त

उस दिन बड़े सवेरे जब श्यामू की नींद खुली तब उसने देखा घर भर में कोहराम मचा हुआ है. उसकी काकी उमा, एक कम्बल पर नीचे से ऊपर तक एक कपड़ा ओढ़े हुए भूमि-शयन कर रही हैं. और घर के सब लोग उसे घेरकर बड़े करुण स्वर में विलाप कर रहे हैं. लोग जब उमा को श्मशान ले जाने के लिए उठाने लगे तब श्यामू ने बड़ा उपद्रव मचाया.

लोगों के हाथों से छूटकर वह उमा के ऊपर जा गिरा. बोला, “काकी सो रही हैं. उन्हें इस तरह उठाकर कहां लिये जा रहे हो? मैं न जाने दूं.” लोग बड़ी कठिनता से उसे हटा पाए. काकी के अग्नि-संस्कार में भी वह न जा सका. एक दासी राम-राम करके उसे घर पर ही संभाले रही.

यद्दपि बुद्धिमान गुरुजनों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उसकी काकी उसके मामा के यहां गई हैं. परन्तु असत्य के आवरण में सत्य बहुत समय तक छिपा न रह सका. आस-पास के अन्य अबोध बालकों के मुंह से ही वह प्रकट हो गया. यह बात उससे छिपी न रह सकी कि काकी और कहीं नहीं, ऊपर राम के यहां गई हैं.

काकी के लिए कई दिन तक लगातार रोते-रोते उसका रुदन तो क्रमश: शांत हो गया, परन्तु शोक शांत न हो सका. वर्षा के अनंतर एक ही दो दिन में पृथ्वी के ऊपर का पानी अगोचर हो जाता है. परंतु भीतर ही भीतर उसकी आर्द्रता जैसे बहुत दिन तक बनी रहती है. वैसे ही उसके अन्तस्तल में वह शोक जाकर बस गया था. वह प्राय: अकेला बैठा-बैठा शून्य मन से आकाश की ओर ताका करता.

एक दिन उसने ऊपर एक पतंग उड़ती देखा. न जाने क्या सोचकर उसका हृदय एकदम खिल उठा. विश्वेश्वर के पास जाकर बोला “काका मुझे पतंग मंगा दो.” पत्नी की मृत्यु के बाद से विश्वेश्वर अन्यमनस्क रहा करते थे. “अच्छा, मंगा दूंगा.” कहकर वे उदास भाव से और कहीं चले गये.

श्यामू पतंग के लिए बहुत उत्कंठित था. वह अपनी इच्छा किसी तरह रोक न सका. एक जगह खूंटी पर विश्वेश्वर का कोट टंगा हुआ था. इधर-उधर देखकर उसने उसके पास स्टूल सरकाकर रखा. और ऊपर चढ़कर कोट की जेबें टटोली. उनमें से एक चवन्नी का आविष्कार करके तुरन्त वहां से भाग गया.

सुखिया दासी का लड़का भोला श्यामू का समवयस्क साथी था. श्यामू ने उसे चवन्नी देकर कहा, “अपनी जीजी से कहकर गुपचुप एक पतंग और डोर मंगा दो. देखो खूब अकेले में लाना. कोई जान न पावे.”

पतंग आई. एक अंधेरे घर में उसमें डोर बांधी जाने लगी. श्यामू ने धीरे से कहा, “भोला, किसी से न कहो तो एक बात कहूं.”
भोला ने सिर हिलाकर कहा “नहीं, किसी से नहीं कहूंगा.” श्यामू ने रहस्य खोला. कहा “मैं यह पतंग ऊपर राम के यहां भेजूंगा. इसे पकड़कर काकी नीचे उतरेंगी. मैं लिखना नहीं जानता, नहीं तो इस पर उनका नाम लिख देता.”
भोला श्यामू से अधिक समझदार था. उसने कहा “बात तो बड़ी अच्छी सोची परन्तु एक कठिनता है. यह डोर पतली है. इसे पकड़कर काकी उतर नहीं सकतीं. इसके टूट जाने का डर है. पतंग में मोटी रस्सी हो, तो सब ठीक हो जाए.”

श्यामू गंभीर हो गया. मतलब यह, बात लाख रुपये की सुझाई गई है. परन्तु कठिनता यह थी कि मोटी रस्सी कैसे मंगाई जाए. पास में दाम है नहीं और घर के जो आदमी उसकी काकी को बिना दया-मया के जला आए हैं, वे उसे इस काम के लिए कुछ नहीं देंगे. उस दिन श्यामू को चिंता के मारे बड़ी रात तक नींद नहीं आई.

पहले दिन की तरकीब से दूसरे दिन उसने विश्वेश्वर के कोट से एक रुपया निकाला. ले जाकर भोला को दिया और बोला “देख भोला, किसी को मालूम न होने पाए. अच्छी-अच्छी दो रस्सियां मंगा दे. एक रस्सी ओछी पड़ेगी. जवाहिर भैया से मैं एक कागज पर ‘काकी’ लिखवा रखूंगा. नाम की चिट रहेगी, तो पतंग ठीक उन्हीं के पास पहुंच जाएगी.”

दो घंटे बाद प्रफुल्ल मन से श्यामू और भोला अंधेरी कोठरी में बैठे-बैठे पतंग में रस्सी बांध रहे थे. अकस्मात शुभ कार्य में विघ्न की तरह उग्र रूप धारण किये विश्वेश्वर वहां आ घुसे. भोला और श्यामू को धमकाकर बोले “तुमने हमारे कोट से रुपया निकाला है?”
भोला सकपकाकर एक ही डांट में मुखबिर हो गया. बोला “श्यामू भैया ने रस्सी और पतंग मंगाने के लिए निकाला था.” विश्वेश्वर ने श्यामू को दो तमाचे जड़कर कहा “चोरी सीखकर जेल जाएगा? अच्छा, तुझे आज अच्छी तरह समझाता हूं.” कहकर फिर तमांचे जड़े और कान मलने के बाद पतंग फाड़ डाला.

अब रस्सियों की ओर देखकर पूछा “ये किसने मंगाई?” भोला ने कहा “इन्होंने मंगाई थी. कहते थे, इससे पतंग तानकर काकी को राम के यहां से नीचे उतारेंगे.”

विश्वेश्वर हतबुद्धि होकर वहीं खड़े रह गए. उन्होंने फटी हुई पतंग उठाकर देखी. उस पर चिपके हुए कागज पर लिखा हुआ था “काकी.”

‘काकी’ कहानी का सारांश (Kaki summary in hindi)

1. श्यामू अपना काकी उमा मर जाने के बाद बहुत रोया था| आस-पास के बच्चो से पता चलता है की उसकी काकी भगवान राम के पास चली गयी थी|
पतंग को देकने के बाद उसके मन में ख्याल आता हैं की वो पतंग पर अपनी काकी के नाम लिखकर उड़ाना चाहता है और उसे राम के पास भेजना चाहता हैं| इस लिए वो अपने काका के पास जाकर पतंग मांगता है| दुखी विश्वेश्वर श्यामू को वचन देकर चला जाता है| इंतज़ार करने के बाद भी विश्वेश्वर पतंग ने मंगवाता| इस लिए श्यामू काका के जेब सो चोरी करके पतंग करीदता है| भोला के कहने से वो रस्सी के लिए फिर से चोरी करता है रस्सियां खरींडने के लिए| जब पतंग को उड़ने का भन्दोबस्त हो रहा है तो काका आकर भोला से पूछते हैं की किसने पैसे चुरिये करके| भोला सच्च बताता हैं| काका श्यामू को दो चमाट मरते हैं| जब भोला बताता है की वो पतंग के पास भेजने वाले थे तो काका फटी हुयी पतंग देखते है लिख हुआ शब्द ‘काकी’|
बच्चे चंचल स्वाभाव के होते हैं| वो सभी को प्यार करते हैं| उनके प्यार करने का तरीका थोड़ा अलग होता हैं| बड़े बिना पूरा परिस्तिति को जाने कुछ भी कदम उठाते हैं| यहाँ विश्वेस्वर ने भी ऐसा ही किया| श्यामू के भोलपन और मंतव्य को जाने बिना उस पर हाथ उठाया| इस कहानी में सियारामशरण गुपत बच्चों के चंचल स्वभाव को दर्शाया हैं|

2.

उस दिन बड़े सवेरे जब श्यामू की नींद खुली तब उसने देखा घर भर में कोहराम मचा हुआ है. उसकी काकी उमा, एक कम्बल पर नीचे से ऊपर तक एक कपड़ा ओढ़े हुए भूमि-शयन कर रही हैं. और घर के सब लोग उसे घेरकर बड़े करुण स्वर में विलाप कर रहे हैं. लोग जब उमा को श्मशान ले जाने के लिए उठाने लगे तब श्यामू ने बड़ा उपद्रव मचाया.

लोगों के हाथों से छूटकर वह उमा के ऊपर जा गिरा. बोला, “काकी सो रही हैं. उन्हें इस तरह उठाकर कहां लिये जा रहे हो? मैं न जाने दूं.” लोग बड़ी कठिनता से उसे हटा पाए. काकी के अग्नि-संस्कार में भी वह न जा सका. एक दासी राम-राम करके उसे घर पर ही संभाले रही.

यद्दपि बुद्धिमान गुरुजनों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उसकी काकी उसके मामा के यहां गई हैं. परन्तु असत्य के आवरण में सत्य बहुत समय तक छिपा न रह सका. आस-पास के अन्य अबोध बालकों के मुंह से ही वह प्रकट हो गया. यह बात उससे छिपी न रह सकी कि काकी और कहीं नहीं, ऊपर राम के यहां गई हैं.

एक दिन उसने ऊपर एक पतंग उड़ती देखा. न जाने क्या सोचकर उसका हृदय एकदम खिल उठा. विश्वेश्वर के पास जाकर बोला “काका मुझे पतंग मंगा दो.” पत्नी की मृत्यु के बाद से विश्वेश्वर अन्यमनस्क रहा करते थे. “अच्छा, मंगा दूंगा.” कहकर वे उदास भाव से और कहीं चले गये.

श्यामू पतंग के लिए बहुत उत्कंठित था. वह अपनी इच्छा किसी तरह रोक न सका. एक जगह खूंटी पर विश्वेश्वर का कोट टंगा हुआ था. इधर-उधर देखकर उसने उसके पास स्टूल सरकाकर रखा. और ऊपर चढ़कर कोट की जेबें टटोली. उनमें से एक चवन्नी का आविष्कार करके तुरन्त वहां से भाग गया.

सुखिया दासी का लड़का भोला श्यामू का समवयस्क साथी था. श्यामू ने उसे चवन्नी देकर कहा, “अपनी जीजी से कहकर गुपचुप एक पतंग और डोर मंगा दो. देखो खूब अकेले में लाना. कोई जान न पावे.”

काकी कहानी का शीर्षक व उद्देश्य

काकी कहानी श्री सियारामशरण गुप्त जी द्वारा लिखी गयी एक प्रसिद्ध कहानी है . जिसमें उन्होंने बालमनोविज्ञान का चित्रण किया है . श्यामू बचपन में ही अपनी माँ को खो देता है .जब उसकी माँ की मौत हुई थी तब वह एक नादान बालक था .वह अपनी माँ को शमशान घाट पर ले जाने से रोकता है .लोग उसे यह कहकर बहला देते है की उसकी माँ मामा के यहाँ गयी है और कुछ दिन वहां रहकर लौट आएगी .लेकिन कुछ ही दिनों में आस – पास के लड़कों से उसे पता चला की उसकी माँ भगवान् के यहाँ गयी है .श्यामू उदास व बेचैन आँखों से आसमान की ओर अपनी माँ को खोजता रहता तभी अचानक उसे कुछ ख्याल आया . वह दौड़ा – दौड़ा अपने पिता के पास गया और पतंग खरीदने के लिए पैसा माँगा .लेकिन पिता ने इनकार कर दिया .बाद में श्यामू ने पिता विश्वेश्वर के कोट एक चवन्नी चुरा ली . वह अपने हमउम्र सुखिया दासी का बेटा भोला से मिला और उसे अपनी योजना बताई .वह अपनी काकी के नाम एक पतंग भेजना चाहता था ,जिसकी डोर पकड़ कर काकी नीचे उतर आये . भोला ने बताया की डोर पतली है ,काकी काकी इसे पकड़कर उतर नहीं सकती ,यह डोर टूट जायेगी . भोला ने कहा की काकी के लिए एक मोटी रस्सी भेजी जानी चाहिए ताकि काकी उसे पकड़ कर आसानी से आ जाए. श्यामू ने फिर अपने पिता के जेब से एक रूपया चुराया .यह बात श्यामू के पिता को पता चल गयी और उन्होंने क्रोध में आकर शामू को मारा . श्यामू को पतंग को फाड़ दी जिस पर लिखा था – काकी .

काकी कहानी शीर्षक की सार्थकता

किसी भी कहानी का शीर्षक उस कहानी के बारे में पाठकों को बताता है . कहानी के शीर्षक के इर्द – गिर्द ही पूरी कहानी घूमती है .इस दृष्टि से काकी कहानी सही साबित होती है .

कहानी के आरंभ से काकी के देहांत से कथा आरंभ होती है .काकी के शोक में श्यामू हमेशा डूबा रहता है ,वह दिन रात काकी के लिए रोता रहता है .वह हर -हाल में चाहता है की उसकी माँ काकी उसके पास आ जाएँ . काकी को पाने के लिए राम के पास पतंग भेजने ,उसके लिए पिता के जेब से पैसे चोरी करने ,पतंग ,रस्सी तथा पतंग पर काकी के नाम चिट लगाने से जिससे काकी अपना नाम पढ़ कर वापस आ जाए. यह सब बातें श्यामू के काकी प्रेम को ही दर्शित करता है . जब श्यामू के पिता ने उसे मारा और पतंग फाड़ डाली तो पतंग पर लिखा था – काकी . इन सब बातों से यही पता चलता है – यह कहानी आरंभ से लेकर अंत तक काकी के इर्द – गिर्द घूमती है . अतः काकी शीर्षक सार्थक व उचित है .

श्यामू का चरित्र चित्रण

श्यामू ५-६ साल का एक अबोध बालक जो प्रस्तुत कहानी का प्रमुख पात्र है . वह अपनी माँ को बहुत प्यार करता है . माँ के मर जाने के बाद वह हमेशा रोया करता है .रोना शांत हो जाने के बाद भी वह शोख में डूबा रहता है . आसमान में उडती पतंगों को देखर वह काकी के पास पतंग भेजना चाहता है ,जिस पर बैठ कर वह वापस श्यामू के पास आ जाय.

भावुक बालक – श्यामू अत्यंत भावुक बालक है . सबेरे जब श्यामू की नींद खुली तो उसने देखा की घर के लोग उसकी काकी को घेर कर बैठे थे और करुण श्वर में विलाप कर रहे हैं. जब लोग काकी को शमशान ले जाने लगे तो वह काकी को नहीं जाने देता .बड़ी कठिनाई से उसे रोका जा सका.

दृढ़ बालक – श्यामू बहुत दृढ़ता से काम लेता है . पतंग देखकर वह पतंग को आसमान में भेजकर काकी को नीचे उतरना चाहता है .इसके लिए पिता के जेब से पैसे चोरी करने पर भी नहीं डरता .वह अपने मित्र भोला से मिलकर योजना बनायीं ,रस्सी ,पतंग तथा काकी के नाम का चिट सभी चीजों का प्रबंध किया .

सीधा और सरल – श्यामू सीधा व सरल बच्चा है .यही कारण है कि वह काकी को वापस पाने के लिए पतंग का सहारा लेता है .काकी पतली डोर पर नहीं आ पाएंगी इसीलिए वह मोती रस्सी का इंतजाम करता है .काकी अपना नाम पढ़कर वापस आये ,इसीलिए वह काकी के नाम का चिट लगाकर भेजता है .

अतः उपयुक्त बातों से यह पता चलता है कि श्यामू एक नादान बालक है जो की अपनी माँ से बहुत प्रेम करता है और उन्हें हर हाल में पाना चाहता है .उसकी भोलापन ,नादानी पाठकों के मन में गहरा प्रभाव डालती है .

काकी कहानी के प्रश्न-उत्तर

(1) वर्षा के अनंतर एक दो दिन में ही पृथ्वी के ऊपर का पानी तो अगोचर हो जाता है, परंतु भीतर–ही–भीतर उसकी आर्द्रता जैसे बहुत दिन तक बनी रहती है, वैसे ही उसके अंतस्तल में वह शोक जाकर बस गया था।

प्रश्न–

(i) यहाँ किसकी बात की जा रही है ? उसका परिचय दीजिए।

(ii) उपर्युक्त पंक्तियों का संदर्भ स्पष्ट कीजिए।

(iii) उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया ? पंक्तियों के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।

(iv) “बालक का हृदय अत्यंत कोमल, भावुक और संवेदनशील होता है और वे मातृ-वियोग की पीड़ा को सहन नहीं कर पाते” – प्रस्तुत कहानी “काकी” के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

(i) यहाँ श्यामू की बात की जा रही है। श्यामू विश्वेश्वर का पुत्र है और उसकी काकी (माँ) का देहांत हो चुका है। वह एक अबोध बालक है। वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता है और उसका वियोग सह नहीं सकता। वह जन्म-मृत्यु के सत्य से अनजान है इसलिए उसे लगता है कि उसकी माँ ईश्वर के पास गई है जिसे वह पतंग और डोर की सहायता से नीचे उतार सकता है। इसके लिए वह अपने पिता के कोट की जेब से पैसे चोरी करता है।

(ii) प्रस्तुत पंक्तियों का संदर्भ यह है कि श्यामू अपनी माँ की मृत्यु के बाद बहुत रोता है और उसे चुप कराने के लिए घर के बुद्‌धिमान गुरुजनों ने उसे यह विश्वास दिलाया कि उसकी माँ उसके मामा के यहाँ गई है। लेकिन आस-पास के मित्रों से उसे इस सत्य का पता चलता है कि उसकी माँ ईश्वर के पास गई है। इस प्रकार बहुत दिन तक रोते रहने के बाद उसका रुदन तो शांत हो जाता है लेकिन माँ के वियोग की पीड़ा उसके हृदय में शोक बनकर बस जाती है।

(iii) माँ की मृत्यु के बाद श्यामू अत्यंत दुखी हो गया। वह पहले बहुत रोया करता था लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे उसका रोना शांत होता गया, परंतु उसके अंतस्तल की पीड़ा शांत न हो सकी। वह प्राय: अकेला रहने लगा और हमेशा आकाश की ओर देखता रहता। जिस प्रकार वर्षा के एक-दो दिन बाद धरती के ऊपर का पानी तो सूख जाता है लेकिन उसके भीतर की आर्द्रता बहुत दिन तक बनी रहती है, उसी प्रकार श्यामू का रोना तो बंद हो गया लेकिन मातृ-वियोग की पीड़ा उसके हृदय में जाकर बस गई थी।

(iv) प्रस्तुत कहानी “काकी” एक बाल-मनोवैज्ञानिक कहानी है। जिसमें एक बालक के मातृ-वियोग की पीड़ा को दर्शाया गया है। कहानी में श्यामू माँ की मृत्यु के बाद उस पीड़ा को सहन नहीं कर पाता है और उसका मन कहीं नहीं लगता है। जीवन-चक्र से अनभिज्ञ वह अपनी माँ को ईश्वर के यहाँ से लाने के लिए पैसों की चोरी करता है और डोरी मँगवाता है जिसकी सहायता से वह अपनी मरी माँ को आकाश से नीचे धरती पर ला सके। इस प्रकार यह साबित होता है कि बालकों का हृदय अत्यंत कोमल, भावुक और संवेदनशील होता है और वे मातृ-वियोग की पीड़ा को सहन नहीं कर पाते हैं।

 

 

(2) अकस्मात्‌ शुभ कार्य में विघ्न की तरह उग्र रूप धारण किए हुए विश्वेश्वर वहाँ आ घुसे।

प्रश्न

(i) “शुभ कार्य” और “विघ्न” शब्दों का प्रयोग किस-किस संदर्भ में किया गया है ?

(ii) श्यामू पतंग पर किससे, क्या लिखवाता है और क्यों ?

(iii) भोला का परिचय देते हुए बताइए कि वह श्यामू की मदद किस प्रकार करता है ?

(iv) विश्वेश्वर हतबुद्‌धि होकर क्यों खड़े रह गए ? घटना का विवरण देते हुए लिखिए।

 

उत्तर

(i) “शुभ कार्य” का प्रयोग उस संदर्भ में किया गया है जब श्यामू अपनी माँ को ईश्वर के यहाँ से नीचे लाने के लिए पतंग और दो मज़बूत रस्सियाँ मँगवाता है और उस पर काकी लिखवाता है। श्यामू अत्यंत प्रसन्न मन से अपने साथी भोला के साथ पतंग में रस्सी बाँध रहा था।“विघ्न” का प्रयोग उस संदर्भ में किया गया है जब श्यामू चोरी किए गए पैसे से पतंग खरीदता है।जैसे ही वह शुभ कार्य संपन्न करने जाता है वैसे ही उसके पिता विश्वेश्वर विघ्न के रूप में वहाँ उपस्थित हो जाते हैं।

(ii) श्यामू पतंग पर जवाहर भैया से एक कागज़ पर काकी लिखवाता है। ताकि वह पतंग सीधे उसकी माँ के पास चली जाए और उसकी माँ उस पर अपना नाम देखकर पतंग की सहायता से आसानी से राम के यहाँ से नीचे उतर आए।

(iii) भोला सुखिया दासी का लड़का था और श्यामू का हमउम्र था। वह श्यामू से अधिक चतुर और समझदार था, इसलिए वह उसे सलाह देता है कि श्यामू मोटी रस्सी मँगवा ले। पतली रस्सी से काकी नीचे नहीं उतर पाएगी और रस्सी के टूटने का भय भी बना रहेगा। भोला बहुत डरपोक भी था, इसलिए विश्वेश्वर के एक ही डाँट से वह सारा रहस्य उजागर कर देता है।

(iv) विश्वेश्वर को जब इस बात का पता चलता है कि उसके कोट की जेब से एक रुपए की चोरी हुई है तब वह भोला और श्यामू के पास आते हैं। भोला को डाँटने से उन्हें श्यामू की सच्चाई का पता चलता है कि उसने ही रुपए की चोरी की है। वे श्यामू को धमकाने और मारने के बाद पतंग फाड़ देते हैं। लेकिन जब उन्हें भोला द्‌वारा यह पता चलता है कि श्यामू इस पतंग के द्‌वारा काकी को राम के यहाँ से नीचे लाना चाहता है, विश्वेश्वर हतबुद्‌धि होकर वहीं खड़े रह जाते हैं।

 

(3)उस दिन बड़े सबेरे जब श्यामू की नींद खुली तब उसने देखा – घर भर में कुहराम मचा हुआ है। उसकी काकी – उमा – एक कम्बल पर नीचे से ऊपर तक एक कपड़ा ओढ़े हुए भूमि–शयन कर रही हैं, और घर के सब लोग उसे घेरकर बड़े करुण स्वर में विलाप कर रहे हैं।

प्रश्न –

(i) श्यामू कौन था और वह किस बात से गंभीर हो गया था ?

(ii) श्यामू ने इस गंभीर समस्या का क्या हल निकाला और क्यों ?

(iii) काकी कौन थी ? श्यामू से उसका क्या संबंध था ? काकी के साथ क्या दुर्घटना घटी थी ?

(iv) काकी कहानी के उद्‍देश्य को स्पष्ट करते हुए इसके शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :-

(i) श्यामू विश्वेश्वर और उमा का बेटा था। जब भोला ने बताया कि पतंग की डोर पतली है जिसे पकड़कर यदि काकी राम के घ्रर से उतरती है तो डोरी टूट जाएगी।अतःउसे मोटी रस्‍सी लानी होगी।
(ii) श्यामू ने इस गंभीर समस्या का हल चोरी के माध्यम से निकाला। उसने अपने पिता विश्वेश्वर की कोट से एक रुपए की चोरी की थी क्योंकि उसका मानना था कि घर के लोग उसे मोटी रस्सी लाने के पैसे नहीं देंगे क्योंकि उन्होंने ही बिना दया-माया केउसकी काकी को जला दिया था।
(iii) काकी, विश्वेश्वर की पत्नी और श्यामू की माँ थी। श्यामू उसका बेटा था जो, उसके बहुत करीब था।काकी की अचानक मृत्यु हो जाती है। श्यामू अपनी माँ की कमी को बहुत महसूस करता है और प्रायः अकेला बैठा-बैठा शून्य मन से आकाश की ओर ताका करता था।
(iv) काकी कहानी के माध्यम से लेखक ने एक अबोध तथा मासूम बालक की मातृ-वियोग की पीड़ा को व्यक्त किया है। इस कहानी के माध्यम से लेखक यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि बालकों का हृदय अत्यंत कोमल, भावुक तथा संवेदनशील होता है। वे मातृवियोग की पीड़ा को सहन नहीं कर पाते हैं। ’ काकी ’ कहानी एक घटना प्रधान कहानी है। शीर्षक को हमेशा मौलिक और जिज्ञासा उत्पन्न करने वाला होना चाहिए। काकी कहानी इस दृष्टि से उचित है। काकी कहानी का प्रारंभ काकी की मृत्यु वाली दुर्घटना से शुरू होती है। भले ही काकी प्रत्यक्ष रूप से कहानी में न हो परंतु परोक्ष रूप कहानी के अंत तक काकी विद्‍यमान थीं। अतः कहानी का शीर्षक एकदम सटीक है।

About the author

विकास सिंह

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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