रविवार, अप्रैल 5, 2020

ए पी जे अब्दुल कलाम – बचपन, तकनीकी जीवन और राष्ट्रपति सफरनामा

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पंकज सिंह चौहान
पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

देश के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन के नाम से मशहूर डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम की आज 86 वीं जयन्ती हैं। अब्दुल कलाम ही ऐसे एक राष्ट्रपति है जिन्हें देश के राष्ट्रपति के साथ- साथ जनता का राष्ट्रपति भी कहा जाता है। अब्दुल कलाम ने जीते जी ने इतने महान काम किए है जिनके बारें में यहां बखान करना भी मानो कम सा लगता है। बच्चों से लेकर बड़ो-बूढ़ो तक को मिसाइल मैन की मिसाल दी जाती है जिससे उनमें भरपूर आत्मविश्वास के साथ कुछ कर गुजर जाने का जज्बा पैदा होता है।

आज हम अब्दुल कलाम और उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ खास तथ्यों के बारे में आपके साथ चर्चा करेंगे।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का बचपन

15 अक्टूबर, 1931 को भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के रामेश्वर में पैदा हुए एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। इस महान शख्सियत का बचपन कोई आम बच्चों के बचपन जैसा नहीं था।

ऐसा बचपन जिसमें कुछ पाने की चाहत, भरपूर आत्मविश्वास, पूरा जोश, बड़े-बड़े सपने, कुछ कर गुजर जाने का जज्बा, मेहनत, कठिनाइयां, जरूरतमंद चीज़ों का अभाव।

इन सभी चीजों से मिलकर गुजरा अब्दुल कलाम का बचपन। जिस बचपन में बच्चे खाने- पीने, खेल-कूद में मशक्कूल रहते है वहीं उस उम्र में कलाम साहब ने मेहनत से अपनी छोटी -छोटी सी आंखों में बड़े बड़े ख्वाबों को देखते हुए दो जून की रोटी का जुगाड़ करते थे।

गणित और भौतिक विज्ञान उनके सबसे ज्याद पसंदीदा विषय थे। शिक्षा से कलाम को इतनी मोहब्बत थी कि वो बस स्टैंड पर अख़बार बेच कर अपनी पढ़ाई का खर्च स्वंय उठाया करते थे।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पढ़ाई

1. प्रारंभिक पढ़ाई – पहली कक्षा से लेकर आगे तक की पढ़ाई अपने जन्मस्थान रामेश्वर क्षेत्र में की। लेकिन बाद में अपनी हाई स्कूल की पढाई करने के लिए कलाम रामनाथपुरम चले गए, जहां उन्होंने श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई पूरी की। इस स्कूल के एक टीचर जिनका नाम अय्यादुरई सोलोमन था, कलाम उनके सबसे प्रिय स्टूडेंट थे।

2. कॉलेज की पढ़ाई – सन् 1950 में कलाम आगे की पढ़ाई के लिए संत जोसेफ कॉलेज, तिरुचिपल्ली चले गए। जहां उन्होंने अपनी Bsc का डिग्री पूरी की। इतनी पढ़ाई करने के बाद उन्हें अच्छे से मालूम हुआ कि फिजिक्स और रसायन विज्ञान उनके विषय नहीं है। डिग्री लेने के बाद जब कलाम को सन्तुष्टि नहीं हुई तो उन्होनें खुद का आकलन किया और अपने सपनों की तरफ देखा जिसे देखकर उन्होंने इंजिनियरिंग
करने की ठानी।

3. इंजीनियरिंग पढ़ाई – अब्दुल कलाम ने जब इंजिनियरिंग करने के बारे में सोचा और कलाम ने एमआईटी में दिन रात मेहनत करके टेस्ट तो पास कर लिया पर एडमिशन के लिए 1000 रूपये की जरूरत थी, जो उस समय एक बड़ी रकम मानी जाती थी। ऐसे में उनकी बहन जौहरा ने कलाम की एड्मिशन के लिये अपने सोने के कड़े और गहनों को गिरवी रख, पैसों का इंतजाम किया। यहीं से भारतीय मिसाइल मेन का जन्म हुआ। वे अगले तीन सालों के लिये एमआईटी में एयरोनोटिकल इंजीनियरिंग करने लगे। और एक बेहतर इंजिनियर बनकर और खुद को साबित किया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का कैरियर

अब्दुल कलाम एयरफोर्स में जाना चाहते थे। इसलिए उन्होनें एयरफोर्स में अप्लाई कर दिया और उसी समय दूसरी तरफ मिनिस्टरी ऑफ डिफेंस में भी अप्लाई कर दिया। दोनो ही जॉब में से कलाम को इन्टरव्यु के लिए बुलाया गया । वे पहले डिफेंस मिनस्ट्ररी के लिए दिल्ली गए, वहाँ उनका इंटरव्यू अच्छा गया। फिर एयर फाॅर्स के इंटरव्यू के लिए देहरादून गए। वहाँ इस जॉब के लिए इंटरव्यू में 25 प्रतियोगियों में कलाम का 9वां स्थान आया, जबकि एयरफोर्स में सिर्फ 8 लोगों की जरूरत थी। वहांउन्हें नही चुना गया। इससे कलाम निराश हो गये। लेकिन आगे बढ़ते हुए कलाम दिल्ली आ गए और डिफेंस मिनिस्टरी इंटरव्यू में पास होने पर उन्हें इस पद के लिए चुन लिया गया और उन्हें 250 रुपये की प्रति महीने सेलेरी पर सीनियर साईंटिफ़िक असिस्टेंस के पद पर नियुक्त कर दिया गया।

अब्दुल कलाम की वैज्ञानिक उपलब्धियां

अब्दुल कलाम ने लगातार मेहनत से अपने जीवन को आगे बढ़ाते हुए 1962 में इसरो से जुड़कर प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने। और पहला स्वदेशी उपग्रह एसएलवी iii को लॉंच किया, जो पूरी दुनिया में उभरते भारत के लिए एक बड़ी सफलता थी। 1980 में कलाम ने अपनी टीम से मिलकर एक और आश्चर्यजनक अद्भुत काम किया।

कलाम की टीम ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर भारत को अंतराष्ट्रीय स्पेस क्लब का सदस्य बना दिया। इसी प्रकार से डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम स्वदेशी शक्तियों को उपयोग करते हुए अग्नि, त्रिशूल और पृथ्वी जैसे मिसाइल बना कर संसार में मिसाइलमेन बन गए। 1998 पोखरण में परमाणु शक्ति का सफल प्रयोग कर कलाम ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया।

एपीजे अब्दुल कलाम ने मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक के रूप में चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और इसरो को भी संभाला और देश में सैन्य मिसाइल के विकास के प्रयासों में भी शामिल रहे।

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम का राष्ट्रपति सफर

अब्दुल कलाम ने अपना पूरा जीवन मिसाइल बनाकर देश के सहयोग के लिए समर्पित कर दिया। अब्दुल कलाम एक बेहद ही शान्त शख्सियत थे। इसलिए देश की तरफ से उनके महान् समर्पण और उपलब्धियों के बदले उन्हें राष्ट्रपति का पद पर बिठाया गया।

बीजेपी ने अब्दुल कलाम को अपना राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया, जिन्हें भारी वोटों 90 प्रतिशत वोटों से जीत मिली। 25 जुलाई 2002 में उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की।

कलाम ने अपना राष्ट्रपति शाषन कार्यकाल को बडे ही अनुशासन और शान्ति के साथ तक 25 जुलाई 2007 को पूरा किया।

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निधन

देश के महान् वैज्ञानिक, मिसाइल मैन अब्दुल कलाम 27 जुलाई 2015 को इस दुनिया को अलविदा कह गये। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का शिलॉंग में उस वक़्त निधन हुआ, जब वे आईआईएम के स्टूडेंट्स को शिलॉन्ग में लेक्चर देने गए थे, उसी दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। पूरे देश शोक में डूबा हुआ था क्योंकि पूरे देश ने एक ऐसी शख्सियत को खोया, जिनका जैसा दूसरा होना मुश्किल ही नही बल्कि नामुमकिन है।

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