निजता और सुरक्षा के लिए एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन

end to end encryption in hindi
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एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन का मतलब (end to end encryption meaning in hindi)

एन्क्रिप्शन का मतलब होता है, सुचना को गुप्त तरीके से स्टोर करना। यह एक प्रोसेस है जिसमे आपके डेटा को एक ऐसे फॉर्म में कन्वर्ट कर दिया जाता है जिसे पढना या फिर समझना लगभग एक आम इंसान के लिए मुश्किल हो जाता है।

एंड टू एंड एन्क्रिप्शन का मतलब है एक कोने से दुसरे कोने तक सुचना को एक गुप्त तरीके से भेजना।

एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन क्या है? (what is end to end encryption in hindi)

एक ऐसा सुरक्षित माध्यम जो आपकी निजता के मायने समझता है या सीधे शब्दों में कहे तो यह एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह आपकी पर्सनल चीज़ों को ज़ेड सिक्योरिटी देता है फिर चाहे वह आपका क्रेडिट कार्ड नंबर हो, फ़ोन कॉल हो या फिर आपका निजी ऑनलाइन डेटा हो।

एक ऐसी टेक्नोलॉजी जिसे साइबर क्रिमिनल्स और हैकर्स भी क्रैक नही कर सकते। सिस्टम निगरानी या छेड़छाड़ के प्रयास को हराने के लिए इसका डिज़ाइन किया गया है। एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन शब्द को अक्सर क्लाइंट-साइड एन्क्रिप्शन के समानार्थी के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

एन्क्रिप्शन क्या है? (what is encryption in hindi)

एन्क्रिप्ट या फिर एन्क्रिप्शन एक प्रोसेस है जिसमे आपके डेटा को एक ऐसे फॉर्म में कन्वर्ट कर दिया जाता है जिसे पढना या फिर समझना लगभग एक आम इंसान के लिए मुश्किल हो जाता है यहाँ तक की हैकर को डाटा या फाइल को एन्क्रिप्ट करने के बाद उसे रीड करना या फिर एक्सेस करना बहुत ही मुश्किल हो जाता है जैसे ही आपका डाटा पूरी तरह एन्क्रिप्ट हो जाता है उसके बाद आपका डाटा सिक्योर हो जाता है इसी प्रोसेस को हम एन्क्रिप्शन कहते हैं।

हालांकि 2016 तक एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन सामान्य सर्वर आधारित संचार प्रणाली में शामिल नही था। लेकिन सबसे पहला मेसेजिंग और कॉलिंग एप्प एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन में जर्मनी से आया था जहां पर लोग अपनी निजता को लेकर काफी ज्यादा सजग थे।

आखिर क्या है प्लेन एन्क्रिप्शन? (plain encryption in hindi)

प्लेन एन्क्रिप्शन को हम इस रूप में भी देख सकते है जहां आपके द्वारा भेजा गया कोई भी सन्देश इंटरनेट रूपी जाल में भेज दिए जाने के बाद किसी के द्वारा भी पढ़ा, देखा या समझा जा सकता है। इंटरनेट रूपी जंगल मे जाने के बाद उसपर आपका कोई ज़ोर नही होता है।

लेकिन, एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन आपके द्वारा भेजा गया एन्क्रिप्टेड डेटा या कहे की वह कोड भाषा जिसे केवल वही पढ़ सकता है जिसे वह भेजा गया है । प्रेषक से प्राप्तकर्ता के बीच की जो भी दूरी होती है वह इस कोड भाषा से भरी जाती है और जब यह प्राप्तकर्ता के पास पहुँच जाता है तब यह खुद-ब-खुद अपने वास्तविक रूप में आ जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हम डी-क्रिप्शन कहते हैं।

उदाहरण:

चलिए एक सीधा सा उदाहरण लेते हैं- आपके द्वारा की गई ऑनलाइन शॉपिंग में अपने क्रेडिट कार्ड का ट्रांजेक्शन नंबर केवल आपके और जिस साइट से आप समान खरीद रहे हैं के बीच रहता है इसमें किसी भी थर्ड पार्टी का हस्तक्षेप नही होता। एन्ड टू एन्ड एन्क्रिपशन यह सुनिश्चित करता है कि यह ट्रांजेक्शन नंबर केवल आपके और उस मर्चेंट कंप्यूटर के बीच रहे। इसी प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच की कांफीडेंशियल बातचीत को ही हम एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्टेड कहते हैं।

अभी हाल ही में व्हाट्सएप्प के सीईओ और कॉफॉउंडर ने एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन शुरू करते हुए कहा था कि ‘ हम पिछले 2 सालों से व्हाट्सएप्प के कन्वर्सेशन को ज्यादा सिक्योर बनाने पर काम कर रहे हैं। हमे इस बात पर गर्व है कि हम कन्वर्सेशन को सिक्योर करने में सफल रहें है’।

अब व्हाट्सएप्प पर भेजे हुए आपके सभी मैसेज, फ़ोटो, वीडियो, फ़ाइल और वॉइस मैसेज अब एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्टेड हैं’। एन्क्रिप्शन के साथ ही अब किसी देश की सरकार और एजेंसी के लिए वारंट होने के बावजूद किसी वॉयस कॉल और इंस्टेंट मैसेज को देखना वर्चुअली नामुमकिन हो जाएगा।

एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन के फायदे (benefits of end to end encryption in hindi)

  • यह आपके डेटा को हैक होने से बचाता है
  • यह किसी भी हैकर द्वारा हैक नही किया जा सकता। जैसे जीमेल, गूगल में डिलीट करने के बाद भी वह आपका ई-मेल सेव रखते है उसके विपरीत एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन आपको यह नियंत्रण देता है कि कौन आपके मैसेज पढ़ सकता है और कौन नही।
  • और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण फायदा, यह आपके निजता के अधिकार की सुरक्षा करता है।

कैंब्रिज एनालिटिका प्रकरण जिसमे राजनीतिक पार्टियों को परामर्श देने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका पर करीब 8.7 करोड़ फ़ेसबुक यूजर के डेटा चोरी का आरोप है के बाद डेटा निजता को शुद्ध हवा या पेय जल की तरह एक सार्वजनिक या साझा वस्तु की तरह समझने की मांग तेज हुई है। और इसमें सामूहिक भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि लोग अपनी निजता को लेकर सजग है और इसीलिए एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प है।

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