उमर अब्दुल्ला: 2019 में नरेन्द्र मोदी से टक्कर के लिए राहुल गाँधी तैयार नहीं

राहुल गाँधी - उमर अब्दुल्ला

राहुल गाँधी और उमर अब्दुल्ला में कई समानताएं हैं। दोनों करीब एक ही उम्र के हैं। दोनों अपनी पार्टी में सर्वोच्च पद पर हैं। दोनों ही राजनीति में परिवारवाद की सबसे बड़ी मिसाल हैं और दोनों काफी करीबी दोस्त भी हैं।

जनवरी 2009 में जब जम्मू कश्मीर के नए मुख्यमंत्री के चुनाव की बात आयी तो राहुल गाँधी ने उमर अब्दुल्ला को उनके पिता फारुख अब्दुल्ला पर तरजीह दी। उमर 6 साल तक बिना किसी बाधा के मुख्यमंत्री रहे क्योंकि इन 6 सालों में कांग्रेस की तरफ से उन्हें पूरा समर्थन मिला।

अक्टूबर 2012 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी और जम्मू कश्मीर पर उमर अब्दुल्ला राज कर रहे थे। राहुल ने एक कार्यक्रम के दौरान अपनी और उमर की दोस्ती की तुलना नेहरू और शेख अब्दुल्ला की दोस्ती से की थी।

उमर के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फ्रेंस लगातार कांग्रेस नीत गठबंधन को समर्थन देता आ रहा है। इस दौरान लगभग हर मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस का पूरा साथ दिया।

लेकिन अब कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय आ गया है। उमर अब्दुल्ला ने इन सालों में पहली बार कांग्रेस या यूँ कहें कि राहुल गाँधी की नीति पर सवाल उठाया है। जब उमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “चोर” कहने के राहुल की रणनीति पर सवाल उठाया तो कांग्रेस के आत्मनिरीक्षण के लिए यह महत्वपूर्ण हो गया।

उमर अब्दुल्ला ने एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी गठबंधन के बड़े नेताओं द्वारा ‘मोदी’ का नाम लेने की बढ़ती प्रविर्ती की आलोचना की थी।

उमर ने कहा था कि ‘हमें व्यक्तिगत हमले करने के मामले में सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार व्यक्तिगत हमले से जनता की नजर में मोदी विक्टिम (पीड़ित) नजर आने लगेंगे। पहले मणिशंकर अइय्यर मोदी पर व्यक्तिगत हमले करते थे और अब लगभग हर नेता मोदी को चोर कह रहा है। चाहे वो छोटा हो या बड़ा।’

कांग्रेस अध्यक्ष लगातार प्रधानमंत्री मोदी पर ‘हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है’ कह कर हमले करते आएं है। राफेल विवाद में हर बार राहुल गाँधी ने मोदी को चोर कह कर सम्बोधित किया है। कांग्रेस नेता पहले भी मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते आये हैं लेकिन तब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद कांग्रेस नेताओं ने मोदी पर टिप्पणियों को निचले स्तर तक ले गए।

भाजपा शुरुआत में प्रधानमंत्री के लिए राहुल गाँधी द्वारा प्रयोग किये गए आपत्तिजनक टिपण्णियों का प्रतिकार किया करती थी। लेकिन अब भाजपा ने इसपर प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया है। सत्तारूढ़ दल शायद सोचता है कि राहुल के ये बयान कांग्रेस को ही प्रभावित करेंगे। विधानसभा चुनाव में राहुल ने मोदी के खिलाफ गब्बर सिंह और हिटलर जैसे विशेषणों का प्रयोग किया और ये कांग्रेस पर ही उल्टा पड़ गया।

गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मणिशंकर अइय्यर ने मोदी को नीच कह दिया था उसके बाद मोदी ने इस बायान पर इमोशनल कार्ड खेल कर इसे गुजराती अस्मिता से जोड़ दिया और सारा खेल पलट दिया था। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव में अभी तक मोदी चुनाव प्रचार में नहीं उतरे हैं। अब देखना है कि खुद को राहुल द्वारा ‘चोर’ कहने पर मोदी क्या जवाब देते हैं।

उमर का ये कहना भी सही है कि हमें प्रधानमंत्री मोदी को भाजपा से अलग कर के देखना होगा। अगर हम पार्टी भाजपा पर हमले करने के बजाये प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत टिपण्णी करते हैं तो हम पुरे देश का फोकस मोदी पर कर देते हैं और इससे उन्हें इलेक्शन कैम्पेन में अपने लिए माहौल बनाने में मदद मिल जाती है।

ओपिनियन पोल्स और हालिया राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के रिजल्ट उमर की बात को समझाने के लिए काफी है।

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