सोमवार, जनवरी 27, 2020

उद्धव ने साधा मोदी सरकार पर निशाना : झूठे वादें चुनाव जिता सकते हैं जंग नहीं

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हिमांशु पांडेय
हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एकबार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने हालिया बयान में कहा है कि डोकलाम में चीन के खिलाफ उकसावे भरे कदम से पहले देश को अपनी तैयारियों का ध्यान रखना चाहिए था। कैग की रिपोर्ट खुलासा कर चुकी है कि देश की सेना के पास पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है। ऐसे में यह उकसावे भरा कदम भारी पड़ सकता है। सरकार के सभी प्रमुख मंत्री इस मुद्दे पर झूठी बयानबाजी कर रहे हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि झूठे वादें सिर्फ चुनाव जीतने में कारगर होते हैं, झूठे वादों से जंग नहीं जीती जाती।

शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में चीन और पकिस्तान से मिलने वाली धमकियों में वृद्धि हुई है। सेना के पास युद्ध की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है। खोखले दावों से परे जाकर सरकार को इस जमीनी हकीकत को स्वीकारना होगा। आखिर इस ताकतवर सरकार ने पिछले तीन सालों में देश को दिया ही क्या है। किसी को भी चुनौती देने से पहले हमें अपनी वास्तविक स्थिति का का ध्यान कर लेना चाहिए।

केंद्र में सहयोगी, फिर भी सुर विरोधी

भारत की ओर से चीन को आज के भारत को 1962 वाला भारत ना समझने की चेतावनी देने पर उन्होंने कहा कि जब हम खुद को बेहतर बताते हुए मुँह खोलते हैं तो हमें अपने पास मौजूद गोला-बारूद को भी याद कर लेना चाहिए। ठाकरे ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध करने में असफल रही है और नोटबंदी की वजह से लाखों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। उन्होंने भविष्य में परिस्थितियों के और भी बिगड़ने की आशंका जताई।

यह पहला मौका नहीं है जब उद्धव ठाकरे या शिवसेना के किसी सांसद ने सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व में भी शिवसेना की ओर से ऐसी कई प्रतिक्रियाएं आ चुकी हैं। भाजपा और शिवसेना में विरोध के स्वर तभी से फूटने लगे थे जब केंद्र में सहभागिता के बाद भी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। भाजपा ने शिवसेना को शिकस्त दी थी और देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व में राज्य में सरकार का गठन किया था।

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