मंगलवार, दिसम्बर 10, 2019

उइगर मुस्लिमो को बंदी बनाने पर पश्चिमी देशों ने चीन को लगाई फटकार

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

चीन ने शिनजियांग प्रान्त में संजातीय उइगर मुस्लिमो को बंदी बनाने के लिए करीब दो दर्जन देशों ने चीन को फटकार लगाई है। संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद् में इस मामले पर संयुक्त पहला कदम था। यूएन के विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने कहा कि “करीब 10 लाख उइगर और अन्य मुस्लिमो को देश के पश्चिमी भाग में बंदी बनाकर रखा गया है।”

चीन ने इन शिविरों को प्रशिक्षण केन्द्र करार दिया है और कहा कि यहाँ लोगो को चरमपंथ से निकलने में मदद कर रही है। मंच के अध्यक्ष को दिए अभूतपूर्व पत्र में 22 देशों के राजदूतो ने हस्ताक्षर किये थे। इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान भी शामिल थे। इस आलावा यूरोपीय देशों में ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और स्विट्ज़रलैंड शामिल है। अमेरिका ने एक वर्ष पूर्व ही इस मंच से पीछा छुड़ा लिया था।

एक पश्चिमी कूटनीतिज्ञ ने बुधवार को रायटर्स से कहा कि “यह शिनजियांग पर पहली एकत्रित प्रक्रिया है।”प्रस्ताव का विचार कभी विचारधीन नहीं था।” एक अन्य राजदूत ने कहा कि “यह एक औपचारिक कदम है क्योंकि यह परिषद् के अधिकारिक दस्तावेज के तौर पर प्रकाशित किया जायेगा। यह एक संकेत हैं।”

इस रिपोर्ट में गैर कानूनी तरीके से बंदी गृहों के निर्माण पर चिंता व्यक्त की है। शिनजियांग में उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, व्यापक निगारानी और पाबन्दी की रिपोर्ट्स हैं। 47 सदस्य देश के मंच में उच्च स्तर के मानको को कायम रखा है।

पत्र में कहा कि “हम चीन से कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को मानने की मांग करते हैं और मानव अधिकार और मूल स्वतंत्रता का सम्मान करने की मांग करते हैं। समस्त चीन और शिनजियांग में धार्मिक आज़ादी रखने कर यकीन करते हैं। हम चीन को मनमाने ढंग से कैद और उइगर के आवजाही पर आज़ादी पर पाबन्दी पर संयमता बरतने की मांग करते हैं।”

इस पत्र में आग्रह किया गया है कि चीन अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र विशेषज्ञों को अनुमति दे। इसमें यूएन के मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बचेलेट भी शामिल हैं। बचेलेट चिली की पूर्व राष्ट्रपति हैं और उन्होंने चीन को गुमशुदगी और कैद की रिपोर्ट्स पर यूएन को जांच करने की अनुमति देने के लिए बीजिंग पर दबाव बनाया था।

यूएन में चीन के राजदूत ने बीते महीने कहा कि “उन्हें उम्मीद है कि बचेलेट यात्रा के आमंत्रण को स्वुकार करेंगी।” यूएन की प्रवक्ता ने कहा कि “इस यात्रा पर विचार किया जा रहा है।” तीन हफ्तों के सत्र का अंत शुक्रवार ही होगा। शिनजियांग के उप गवर्नर ने बंदी शिविरों के बाबत कहा कि “वह कौशल केंद्र है जहां लोगो को चरमपंथी प्रभाव से बचाने के लिए मदद की जाती है।”

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