ईरान द्वारा ब्रितानी जब्त जहाज में 23 क्रू सदस्यों में 18 भारतीय

ब्रितानी जहाज
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ईरान ने ब्रिटेन के ध्वज वाले तेल टैंकर को होर्मुज़ के जलमार्ग पर जब्त कर लिया था और जहाज के क्रू सदस्यों की अभी जांच जारी है। आलाह्मोरद अफिफिपौर ने कहा कि “जहाज को ईरान के दक्षिणी बंदरगाह में स्थित बंदर अब्बास में ले लाया जाया गया था। जहाज के सभी 23 सदस्य जहाज पर ही थे, जब तक छानबीन खत्म नहीं हो गयी थी।”

जहाज को किया जब्त

इन 23 क्रू सदस्यों में 18 भारतीय और पांच अन्य देशों के नागरिक है। टैंकर के संचालक स्टेन बल्क ने बताया कि “जहाज सभी नौचालन और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा था लेकिन क्रू का जहाज पर नियंत्रण नहीं और संपर्क टूट गया था।”

ब्रिटेन के विदेश सचिव जेरेमी हंट ने शुक्रवार को कहा कि “इस नियंत्रण का जवाब वह विचार लेकिन ठोस रूप में देंगे और जहाज के बारे में उनके तत्काल सूचित किया गया था।” यह जहाज सऊदी अरब के बंदरगाह की तरफ जा रहा था और अचानक होर्मुज़ के जलमार्ग से इसका रास्ता बदल गया था।

ईरान और पश्चिम के संबंधों में तल्खियाँ बढती जा रही है। ब्रिटेन ने ईरान का ग्रेस 1 टैंकर को गिब्राल्टर के बंदरगाह से जब्त कर लिया था। इस टैंकर पर गैरकानूनी तरीके से सीरिया को तेल पंहुचाने के आरोप थे और यह सरासर यूरोपीय संघ के नियमों का उल्लंघन था।

ब्रिटेन की ईरान को चेतावनी

हंट ने चेतावनी दी कि “अगर जल्द ही स्टेन इम्पेरो की हालात को नहीं सुलझाया गया तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। ब्रिटेन अभी सैन्य विकल्प की तरफ नहीं देख रहा है। हम इस स्थिति के समाधान एक लिए कूटनीतिक तरीके की तरफ देख रहे हैं।”

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “वह शुक्रवार को जब्त किये गए टैंकर के बारे में ब्रिटेन से बात करेंगे इसके कारण तेल की कीमत बढ़कर 62 डॉलर प्रति बैरल हो गयी है। अमेरिका ने ईरान पर खाड़ी इलाके में सिलसिलेवार तेल टंकारो पर हमले का आरोप लगाया था। तेहरान ने इन आरोपों का खंडन किया है।

इन वारदातों ने अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को बढ़ा दिया है। अमेरिका ने सऊदी अरब में पहली बार सैनिको को भेजने की योजना बनायीं है। वांशिगटन और तेहरान के बीच बीते वर्ष से सम्बन्ध खराब होते जा रहे हैं, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को परमाणु संधि से बाहर निकाल लिया था।

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