ईरान-अमेरिका संघर्ष पर दोनों देशों के दो-टूक बयान

ईरान
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ईरान और अमेरिका ने संघर्ष को सुलझाने के बाबत दो-टूक रवैया दिखाया है। रायटर्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम नेता ने साल 2015 का उल्लंघन करने की धमकी दी थी, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति ने समाधान में काफी प्रगति होने का बयान दिया था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बीते वर्ष ईरान के साथ हुई परमाणु संधि को तोड़ दिया था और ईरान पर सभी प्रतिबंधों को वापस थोप दिया था। ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिका ने प्रतिबंधों को थोपकर अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।

ईरान और अमेरिका के प्रत्यक्ष संघर्ष का भय मई में काफी बढ़ गया था जब खाड़ी इलाके में सिलसिलेवार तेल टैंकर पर हमले किये गए थे। इसके बाद ईरान ने अमेरिका के निगरानी ड्रोन को मार गिराया था और ट्रम्प ने ईरान पर हमले के दिए आदेश को आखिरी मौके पर रोक दिया था।

ईरान के सुप्रीम नेता ने मंगलवार को कहा कि “ईरान संधि में परमाणु गतिविधि पर संयमता को हटाना जारी रखेगा और ब्रिटेन द्वारा तेल टैंकर को जब्त करने का प्रतिकार लेगा।” अयातुल्ला अली खामेनेई ने ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस पर संधि के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वाह न करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि “हमारे विदेश मंत्री के मुताबिक यूरोप ने 11 वादे किये थे और और इसमें से एक को भी पालन नहीं किया है। हम अपनी प्रतिबद्धताओं के पालन कर रहे हैं लेकिन अब हम अपनी प्रतिबद्धताओं से मुकरना शुरू करेंगे, जिसका वे विरोध करते हैं। कैसे असभ्य है। आप अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं कर रहे हैं।”

खामेनेई ने कहा कि “हम अपनी प्रतिबद्धताओं से हटना शुरू कर दिया है और यह प्रवृत्ति जारी रहेंगी।” पहली बार सुप्रीम नेता ने परमाणु संधि के उल्लंघन का संकल्प लिया है। ईरान संवर्धन की सीमा को पार करेगा और परमाणु बम का निर्माण करेगा।

ईरान ने परमाणु हथियारों को रखने के इरादे को खारिज किया है और कहा कि अगर वांशिगटन वापस समझौते पर आ गया है टो हम भी पीछे हट जायेंगे। तेहरान ने वांशिगटन पर आर्थिक जंग थोपने का इल्जाम लगाया है।

खामेनेई ने कहा कि “पश्चिमी देशों का प्रमुख उनका अहंकार है और अगर कोई इसका विरोध करे तो वह कमजोर है, उनका अहंकार कार्य करता है। लेकिन अगर कोई देश जानता है और उनके खिलाफ खड़े होता है, वह शिकस्त खा जायेंगे।”

अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक ने कहा कि “ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइल पर वार्ता के लिए तैयार है। जिस पर ट्रम्प ने कहा कि “हम देखते हैं क्या होता है लेकिन इसके लिए बेहद प्रगति की जरुरत है।” ईरान के विदेश मंत्री ने कहा था कि तेहरान मिसाइल कार्यक्रम के बाबत तब बातचीत करेगा जब अमेरिका सऊदी अरब और यूएई को हथियार मुहैया करना बंद कर देगा।” पोम्पियों ने इस बयान  पर प्रतिक्रिया दी कि अमेरिका ऐसा नहीं करना चाहेगा।

इसके जवाब में यूएन में ईरान के प्रवक्ता ने ट्वीटर पर लिखा कि “ईरान की मिसाइल पर किसी मुल्क या किसी के साथ भी बातचीत को कोई गुंजाईश नहीं है।” डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “हम उनके साथ अच्छा रहेंगे, हम उनके साथ कार्य करेंगे, लेकिन उनके समक्ष परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। हम शासन में बदलाव की तरफ नहीं देख रहे हैं।

ईरान के विदेश मन्त्री जावेद जरीफ ने कहा कि “जब ट्रम्प प्रशासन प्रतिबंधों को हटा देगा, इसके बाद बातचीत के लिए कमरा खुला रहेगा। अगर वह हमारी मिसाइल के बाबत बातचीत करना चाहते हैं तो उन्हें हमारे क्षेत्र में इन हथियारों को बेचना रोकना होगा।”

ख़मेनेई ने ब्रिटेन द्वारा जहाज को हिरासत में लेने को डकैती करार दिया है। उन्होंने कहा कि “दुष्ट ब्रिटेन ने हमारे जहाज को लूटा और चोरी कर लिया और इसे कानूनी जामा पहना दिया। हम इसका जवाब दिये बगैर नहीं रहेगे, सही मौके और स्थान पर हम इसका जवाब देंगे।”

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