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    इज़रायल ने मंगलवार को गाजा पर हवाई हमले कर दो बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। उसका मानना था कि वहां उग्रवादी छिपे थे। वहीं हमास और अन्य सशस्त्र समूहों ने दक्षिणी इस्राइल पर सैकड़ों रॉकेट दागे। यरूशलम में हफ्तों के तनाव के बाद यह झड़प हुई है। रायटर्स के मुताबिक सोमवार शाम से शुरू हुई झड़प में बच्चों और महिला समेत 32 फलस्तीनियों की मौत हुई है। अधिकतर मौत हवाई हमलों से हुई। इज़रायल के भी तीन लोग मारे गए हैं।

    इज़रायली सेना के मुताबिक उसने गाजा में उग्रवादी संगठन इस्लामिक जिहाद के एक वरिष्ठ कमांडर को मार दिया है। उसने कहा कि मारे गए आतंकी कमांडर की पहचान समीह-अल-मामलुक के तौर पर हुई है जो इस्लामिक जिहाद की रॉकेट इकाई का प्रमुख था। सेना ने कहा कि हमले में उग्रवादी संगठन के अन्य वरिष्ठ उग्रवादी भी मारे गए हैं।

    क्यों है यह संघर्ष?

    इस संघर्ष की शुरुआत वर्ष 1917 में उस समय हुई जब तत्कालीन ब्रिटिश विदेश सचिव आर्थर जेम्स बल्फौर ने ‘बल्फौर घोषणा’ के तहत फिलिस्तीन में एक यहूदी ‘राष्ट्रीय घर’ के निर्माण के लिये ब्रिटेन का आधिकारिक समर्थन किया था। परंतु इसमें ‘मौजूदा गैर-यहूदी समुदायों के अधिकारों’ के संबंध में कोई चिंता व्यक्त नहीं की गई थी। उदाहरणस्वरूप- इस क्षेत्र में अरब समुदाय लंबे समय से हिंसक गतिविधियों में संलग्न था।

    अरब और यहूदी हिंसा को समाप्त करने में असफल रहे ब्रिटेन ने वर्ष 1948 में फिलिस्तीन से अपने सुरक्षा बलों को हटा लिया और अरब तथा यहूदियों के दावों का समाधान करने के लिये इस मुद्दे को नवनिर्मित संगठन संयुक्त राष्ट्र के विचारार्थ रख दिया था। संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन में स्वतंत्र यहूदी और अरब राज्यों की स्थापना करने के लिये एक विभाजन योजना प्रस्तुत की। हालाँकि, फिलिस्तीन में रह रहे कई यहूदियों ने तो इस विभाजन को स्वीकार कर लिया परंतु अधिकांश अरबों ने इस पर अपनी सहमति प्रकट नहीं की।

    वर्ष 1948 में यहूदियों ने इज़रायल के आस-पास के स्वतंत्र अरब देशों पर आक्रमण की घोषणा की थी। परंतु युद्ध के अंत में इज़रायल ने संयुक्त राष्ट्र की विभाजन योजना के आदेशानुसार प्राप्त भूमि से भी अधिक भूमि पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस युद्ध के पश्चात् जॉर्डन ने वेस्ट बैंक व जेरूसलम के पवित्र स्थानों पर तथा मिस्र ने गाजा पट्टी पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।

    हमास

    हमास को अमेरिकी सरकार द्वारा गठित एक आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता प्राप्त है। वर्ष 2006 में हमास ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण के विधायी चुनावों में अपनी जीत दर्ज की। इसने वर्ष 2007 में गाजा से फतह को निष्कासित कर दिया तथा फिलिस्तीनी आंदोलन का भी भौगोलिक रूप से विभाजन कर दिया।

    द्विराज्यीय समाधान

    द्विराज्यीय समाधान 1974 के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर आधारित है। इसके अंतर्गत यह प्रस्तावित किया गया था कि इन दोनों में से एक राज्य में यहूदी तथा अन्य में फिलिस्तीनी अरब बहुसंख्यक स्थिति में होंगे। हालाँकि इस विचार को अरबों द्वारा अस्वीकृत कर दिया गया था। दशकों से अंतर्राष्ट्रीय समुदायों द्वारा इजरायल-फिलिस्तानी संघर्ष को समाप्त करने वाला यह एकमात्र वास्तविक समझौता था। परंतु प्रश्न यह उठता है कि इस समस्या का समाधान करना इतना मुश्किल क्यों था?

    दोनों पक्षों पर विभाजित राजनीतिक नेतृत्व

    फिलिस्तीनी नेतृत्व विभाजित है। वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी नेतृत्व ने द्विराज्यीय समाधान का समर्थन किया है जबकि गाजा के नेताओं ने इज़रायल को मान्यता तक प्रदान नहीं की है। यद्यपि इज़रायल के प्रधानमंत्रियों यथा-एहुद बराक, एरियल शेरोन, एहुद ओल्मर्ट और बेंजामिन नेतान्याहू ने फिलिस्तीनी राज्य के विचार को स्वीकृति दी तथापि ये इन विचारों में भिन्न थे कि इसका सृजन वास्तव में किस प्रकार होना चाहिये।

    इजरायल के प्रधानमंत्री की हाल ही में हुई अमेरिकी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह वक्तव्य दिया कि वह फिलिस्तीन में द्विराज्यीय समाधान के माध्यम से इस विचलन का समर्थन कर सकते हैं। वह संभवतः ऐसे प्रथम अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी नीति से पृथव्फ़ रुख अपनाकर इज़रायल और फिलिस्तीनियों के लिये द्विराज्यीय समाधान का समर्थन किया है।

    अचानक से क्यों बढ़ा तनाव

    मध्य अप्रैल में रमज़ान की शुरुआत के बाद से ही ग़ाज़ा पट्टी के दोनों ओर तनाव पैदा हो रहा था जब इजरायली पुलिस ने कब्जे वाले ओल्ड सिटी के बाहर दमिश्क गेट पर बैरिकेड्स लगा दिए, जिससे फिलिस्तीनियों को वहां इकट्ठा होने से रोका जा सके। झड़प के बाद, पुलिस ने बैरिकेड हटा दिए, लेकिन तनाव पहले से ही अधिक था। शेख जर्राह के पूर्वी यरुशलम में दर्जनों फिलिस्तीनी परिवारों के धमकी भरे बयान ने रमजान के आखिरी हफ्ते में संकट को और बढ़ा दिया।

    फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों और इजरायली पुलिस के बीच येरूशलम में 7 मई की रात को झड़पें हुईं जिसमें सैकड़ों फिलिस्तीनी और एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मी घायल हो गए। इजरायल के अधिकारियों ने पुराने शहर के अरब क्वार्टर के माध्यम से दूर-दराज़ ज़ायोनी लोगों द्वारा परंपरागत रूप से निकाले गए यरुशलम मार्च को अनुमति दी थी। 10 मई के बाद इजरायली सशस्त्र बलों ने फिलिस्तीनियों को अल-अक्सा मस्जिद से बाहर निकालने के लिए रबर की गोलियों, अचेत हथगोले और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसरायली पुलिस का कहन था कि फिलिस्तीनियों ने पत्थरों और मोलोटोव कॉकटेल के साथ शिविर लगाया था। हमास ने अल-अक्सा से नीचे खड़े होने के लिए इजरायली सैनिकों को एक अल्टीमेटम जारी किया। शाम तक, उन्होंने रॉकेट लॉन्च किए। जिसका इज़राइल ने जवाब दिया।

    जेरूसलम ही क्यों?

    जेरूसलम इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष के केंद्र में रहा है। 1947 संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना के अनुसार, जेरूसलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बनाने का प्रस्ताव था। लेकिन 1948 के पहले अरब इजरायल युद्ध में, इजरायलियों ने शहर के पश्चिमी हिस्से पर कब्जा कर लिया, और जॉर्डन ने पूर्वी हिस्से को ले लिया, जिसमें ओल्ड सिटी भी शामिल थी। अल-अक्सा मस्जिद, इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र स्थल और रॉक का गुंबद, हरमेश-शरीफ (नोबल अभयारण्य) के भीतर स्थित है। रॉक का गुंबद का एक पक्ष, जिसे यहूदियों द्वारा टेम्पल माउंट कहा जाता है, वेलिंग वॉल (पश्चिमी दीवार) है। ये माना जाता है कि यह यहूदी धर्म के सबसे पवित्र स्थल, दूसरे यहूदी मंदिर के अवशेष हैं।

    1967 के छह-दिवसीय युद्ध में इज़राइल ने जॉर्डन से पूर्वी जेरूसलम पर कब्जा कर लिया और बाद में इसे रद्द कर दिया। अपने अनुलग्नक के बाद से, इज़राइल ने पूर्वी यरूशलेम में बस्तियों का विस्तार किया है, जो अब लगभग 220,000 यहूदियों के लिए घर है। पूर्वी जेरूसलम में पैदा हुए यहूदी इजरायली नागरिक हैं, जबकि शहर में फिलिस्तीनियों को सशर्त निवास परमिट दिए जाते हैं। हालांकि, पूर्वी जेरूसलम में फिलिस्तीनियों के कब्जे वाले वेस्ट बैंक के अन्य हिस्सों के विपरीत, इजरायल की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। बहुत कम फिलिस्तीनियों ने ऐसा किया है।

    इज़राइल पूरे शहर को अपने “एकीकृत, अनन्त राजधानी” के रूप में देखता है, एक दावा जो डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा समर्थित था जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति थे लेकिन इसके लिए अधिकांश अन्य देशों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। राजनीतिक स्पेक्ट्रम को देखते हुए फिलिस्तीनी नेताओं ने कहा है कि वे भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य के लिए कोई समझौता फार्मूला स्वीकार नहीं करेंगे जब तक कि पूर्वी जेरूसलम उसकी राजधानी नहीं बन जाती।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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