रविवार, जनवरी 19, 2020

इंडिया-यूएस फोरम में पाक पर बरसीं सुषमा, कहा – उजागर हो रही करतूतें

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हिमांशु पांडेय
हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज एक बार फिर पाकिस्तान पर जमकर बरसीं। उन्होंने आतंकवादियों को शरण देने के लिए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा। वह नई दिल्ली में इंडिया-यूएस फोरम की बैठक को सम्बोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि भारत सीमापार से संचालित आतंकी गतिविधियों को वैश्विक चुनौती मानता है और देश ने इसे चुनौती के तौर पर ही स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से मुकाबला करने के लिए भारत और अमेरिका में परस्पर सहयोग बढ़ रहा है।

देश में हो रही आतंकी घटनाओं के लिए उन्होंने पड़ोसी मुल्क को दोषी ठहराया। पकिस्तान का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि सिर्फ एक देश को छोड़कर हमारी रणनीति हमेशा ही ‘पहले पड़ोसी’ की रही है। चीन पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दक्षिणी चीन सागर में निरंतर बढ़ रहा विवाद खतरनाक रूप अख्तियार कर सकता है।

वर्तमान परिदृश्य में यह विश्व की उभरती चुनौतियों में से एक है। अन्तर्राष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि इसे बरकरार रखने को लेकर भारत और अमेरिका एक साथ खड़े है और सम्पूर्ण विश्व को इससे फायदा हुआ है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आतंकवाद के खिलाफ विश्व के सभी देशों को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साझा संदेशों को अपनाने को कहा। तेजी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। यह देश में निवेशकों के बढ़ते यकीन और मजबूत होती अर्थव्यवस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि देश में पिछले वर्ष में कुल 60 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया।

अपने सम्बोधन में श्रीमती स्वराज ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों को ना हटाए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के विकास के लिए, विश्व समुदाय, प्रमुखतः अमेरिका को अफगानिस्तान में बने रहना चाहिए वरना पिछले 16 वर्षों में हुए सुधारों पर पानी फिर जायेगा और मुमकिन है वहाँ भी हालात इराक जैसे हो जाये।

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