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आर्थिक सुधार के संकेत: जुलाई में निर्यात पूर्व-कोरोना स्तर से 34% अधिक रहे

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि जुलाई में भारत का व्यापारिक निर्यात जुलाई 2019 के पूर्व-कोरोना ​​स्तर से 35.17 बिलियन डॉलर अधिक था। लेकिन व्यापार घाटा तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया क्योंकि सोने का आयात 2019 के स्तर से 145.4% बढ़ गया है।

जून में आयात 41.8 अरब डॉलर से बढ़कर 46.4 अरब डॉलर हो गया, जो महामारी से पहले की गतिविधि से 14.75% अधिक है। लेकिन तेल और रत्नों और आभूषणों में फैक्टरिंग के बिना आयात वास्तव में इसी अवधि में 0.17% कम हो गया। 2021-22 के पहले चार महीनों के दौरान कुल व्यापारिक निर्यात अब 130.6 बिलियन डॉलर है, जो 2019 की तुलना में लगभग 22% अधिक है। सरकार इस पूरे वर्ष के 400 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को पूरा करने के लिए आश्वस्त है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि, “शेष आठ महीनों के लिए (आवश्यक) लक्ष्य औसतन 33.68 अरब डॉलर प्रति माह है।”

आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि, “गैर-तेल निर्यात जुलाई 2021 में मजबूत था लेकिन वह मार्च 2021 के स्तर से नीचे रहा। तेल निर्यात में बढ़ोतरी ने जुलाई में समग्र व्यापारिक निर्यात को रिकॉर्ड-उच्च स्तर पर पहुंचा दिया।”

उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था के चरणबद्ध रूप से फिर से खुलने से सोने के आयात में उछाल आया है। यह अप्रैल और जुलाई के बीच पहले ही $ 12 बिलियन के आयात को पार कर चुका है और संभवत: पिछले साल के $ 34.6 बिलियन के स्तर को पार कर जाएंगे क्योंकि त्योहारी मांग से सोने की आमद बढ़ने की उम्मीद है।

मूल्य के संदर्भ में अमेरिका और चीन को भारत के निर्यात में जुलाई में सबसे तेज उछाल देखा गया, जो क्रमशः पूर्व-कोरोना आउटबाउंड व्यापार से 51.6% और 52.3% बढ़ गया। आयात मूल्य के मामले में इराक से सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गयी जो कि जुलाई 2019 की तुलना में 76.3% बढ़ी है।

भारत-चीन व्यापार में इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में सबसे बड़ी वृद्धि (जुलाई 2019 से लगभग 261%) दर्ज की गई और पेट्रोलियम उत्पादों में लगभग 98% की वृद्धि हुई। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्टर्स ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने कहा कि जुलाई का निर्यात कम से कम नौ वर्षों में सबसे अधिक था और वैश्विक मांग में तेजी से सुधार का संकेत है जो निर्यातकों की ऑर्डर बुक में दिखाई दे रहा है।

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आदित्य सिंह

दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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