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अंतरिम लाभांश के रूप आरबीआई से मोदी सरकार को मिलेंगे 28,000 करोड़ रूपए

आरबीआई की एमपीसी बैठक

सोमवार को भारतीय रिज़र्व बैंक ने मोदी सरकार के लिए अंतरिम लाभांश के रूप में कुल 28000 करोड़ रूपए का वित्त स्थानांतरित करने की घोषणा की। इस से पहले इस साल के लिए आरबीआई 40000 करोड़ रूपए का लाभांश दे चूका है जोकि पिछली तिमाही में घोषित किया गया था। इससे आशा है की सरकार अपने 3.4 प्रतिशत के फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को पूरा कर पाएगी।

आरबीआई का बयान :

अंतरिम लाभांश की घोषणा पर आरबीआई ने अपनी एक स्टेटमेंट में कहा की एक सीमित ऑडिट समीक्षा के आधार पर और मौजूदा आर्थिक पूंजी ढांचे को लागू करने के बाद, बोर्ड ने 31 दिसंबर, 2018 को समाप्त छमाही के लिए केंद्र सरकार को 28,000 करोड़ रुपये का अंतरिम अधिशेष हस्तांतरित करने का फैसला किया।

सरकार ने की थी 69,000 करोड़ की मांग:

आरबीआई से अंतरिम लाभांश के रूप में सरकार ने कुल 69,000 करोड़ रूपए की मांग की गयी थी जिसमें से आरबीआई ने 40000 करोड़ रुपयों का अंतरिम लाभांश के रूप में पहले ही हस्तांतरित कर दिए थे। इसके बाद में हाल ही में आरबीआई ने बची राशी का अंतरिम लाभांश घोषित किया।

यह लगातार दूसरा वर्ष है जब केंद्रीय बैंक ने अंतरिम लाभांश हस्तांतरित किया है। आरबीआई ने नोट किया कि आर्थिक पूंजी ढांचे के आधार पर यह लाभांश घोषित किया गया है। प्रदान किये गए लाभांश को अंतिम खाते के खिलाफ समायोजित किया जाएगा, यह भी कहा। RBI ने कहा कि सीमित ऑडिट रिव्यू के बाद सरप्लस घोषित किया गया है।

सरकार लाभांश को इन क्षेत्रों में करेगी प्रयोग :

सरकार को आरबीआई से अतिरिक्त वित्त की इस कारण भी ज़रुरत पद रही है क्योंकि राज्य संचालित बैंक जो सरकार की आय हैं उन्हें मुख्यतः घाटा हो रहा है जिससे वे सरकार की मदद नहीं कर पा रहे हैं। इसी के चलते आरबीआई से सरकार को वित्त प्राप्त करने की आशा है।

इसके साथ ही सरकार द्वारा यह मांग निम्न कारणों के चलते रखी गयी है : सबसे मुख्य कारण तो यह है की हर माह होने वाला जीएसटी संग्रह का लक्ष्य 1 लाख करोड़ होता है जोकि कुछ महीनों से पूरा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, राज्य संचालित फर्मों में सरकार की योजनाबद्ध हिस्सेदारी की बिक्री अभी भी लक्ष्य से कम है, हालांकि वित्त मंत्री पीयूष गोयल 80,000 करोड़ रुपये के अनुमान को पार करने के लिए आश्वस्त हैं।

इसके साथ ही सरकार अपने 3.4 प्रतिशत के फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को पूरा करने में असफल रही जिसके चलते भी इसको वित्त की जरूरत है और आरबीआई द्वारा प्रदान किये गए इस वित्त से यह अपने लक्ष्य को पूरा कर पाएगी।

About the author

विकास सिंह

विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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