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    बढ़ती महंगाई

    हाल ही में महंगाई दर में लगातार कमी देखी जा रही है। यहाँ तक की वर्तमान में महंगाई पिछले 19 महीनों के न्यूनतम स्तर पर आ गयी है जिसके कारण फल-सब्जी समेत खाने-पीने का समस्त सामान सस्ता हो गया है। इसके साथ इंधन के दामों में भी मंदी देखने को मिल रही है।

    वर्तमान में महंगाई के आंकड़े :

    दिसंबर 2018 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति को भी संशोधित किया गया है, जो पहले के 2.19 प्रतिशत के अनुमान से घटकर 2.11 प्रतिशत हो गया है। जनवरी 2018 में मुद्रास्फीति 5.07 प्रतिशत थी।

    केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों में आगे कहा गया है कि ‘ईंधन और प्रकाश’ श्रेणी की मुद्रास्फीति भी इस साल जनवरी में घटकर 2.2 प्रतिशत रह गई जो दिसंबर 2018 में 4.54 प्रतिशत थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार इस साल जनवरी में फल, सब्जी और अंडे के दाम लगातार कम हुए और इनके दाम में क्रमश: 4.18 प्रतिशत, 13.32 प्रतिशत तथा 2.44 प्रतिशत की कमी आयी।

    इससे पहले, जून 2017 में खुदरा महंगाई 1.46 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर थी।’  उन्होंने कहा कि इसके साथ मुख्य महंगाई (कोर) के 5.36 प्रतिशत पर रहने से सीपीआई में सालाना आधार पर अगले पांच महीनों में 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत के बीच वृद्धि की संभावना है। इससे अप्रैल और उसके बाद नीतिगत दर में कटौती की संभावनी बढ़ गयी है।

    आरबीआई ने रेपो रेट में की कटौती :

    गुरूवार को आरबीआई की एक बैठक के बाद घोषणा की गयी की आरबीआई द्वारा ब्याज दर में .25 प्रतिशत की कटौती कर दी गयी है जोकि कम महंगाई के चलते की गयी है। बतादें की शक्तिकांत दस के गवर्नर बन्ने के बाद से पहलीं बार दर बदली है। यह उल्लेखनीय है की पिछले 18 महीनों में 2 बार दर में परिवर्तन किया गया था लेकिन दोनों बार परिवर्तन के रूप में दर में बढ़ोतरी की गयी थी। 18 महीनों में दो बार बढ़ोतरी के बाद यह पहली बार था की हमें दर में कटौती देखने को मिली।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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