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आनंदपाल सिंह : अपराधी या मसीहा

आनंदपाल
पिछले एक दशक से राजस्थान में आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के बाद भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। यह तो स्पष्ट है कि इस अपार जनसमर्थन के पीछे कोई ना कोई बात जरूर दबी पड़ी है।

पिछले एक दशक से राजस्थान में आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के बाद भड़की हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। यह तो स्पष्ट है कि इस अपार जनसमर्थन के पीछे कोई ना कोई बात जरूर दबी पड़ी है। पुलिस रिकार्ड्स की मानें तो वह राजस्थान का सबसे बड़ा गैंगस्टर था। अगर तथ्यों पर गौर करें तो ये सही भी लगता है। पर एक तबका है जो उसे रॉबिनहुड की उपाधि दे रहा है।

आनंदपाल के घर से 80 करोड़ रूपये की संपत्ति के दस्तावेज बरामद हुए है। इतनी बड़ी संपत्ति बिना किसी सियासी पैठ के अपने नाम करना एक अपराधी के लिए आज के दौर में संभव नहीं है। असल में सियासत ही वो दलदल है जो ऐसे अपराधियों को जन्म देता है। सियासी हुक्मरान अपने फायदे के लिए इन्हें इस्तेमाल करते है और काम निकल जाने पर इन्हें मसलना जानते हैं। पर हर बार ये मुमकिन नहीं होता और मुमकिन हो भी तो मुनासिब नहीं होता।

राज्य सरकार का ये कदम आज उसके ही गले की फांस बन चुका हैं। सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट जवाबदेही नहीं मिल रही हैं और जो जवाब मिल रहे हैं वो हलक से नीचे नहीं उतर रहे हैं। सरकार के इस फैसले के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर तांडव कर रहे हैं और रोज जान-माल का नुकसान हो रहा हैं।

राजपूत समाज के साथ अब विपक्ष भी खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष सीबीआई जाँच कराने की मांग की है। एनकाउंटर के 3 हफ़्तों बाद भी आनंदपाल का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है और परिवार वाले शव लेने को तैयार नहीं हैं।

एक नजर राजपूतों की मांगों पर

पिछले 3 हप्तों से पूरा राज्य इसी आग में धधक रहा है। राजपूतों ने राज्य सरकार से आनंदपाल एनकाउंटर की निष्पक्ष जाँच की मांग की है। उनके अनुसार आनंदपाल को सियासी साजिश के तहत निशाना बनाया गया है क्यूंकि वो होता तो कई नेताओं का कच्चा-चिटठा खोल कर रख देता। उन्होंने पुलिस की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगाया। मुख्य सवाल जो पूरे घटनाक्रम को सवालों के घेरे में खड़े करते हैं-

– आनंदपाल के पास 6 घंटे तक फायरिंग करने लायक कारतूस था तो पुलिस उस तक कैसे पहुंची?
– पुलिस ने शीशे में देखकर गोली चलाने की बात कही है। रात के वक़्त शीशे में देखने की बात हजम नहीं हो रही है।
– सामने से एके-47 की गोलियां लगने पर भी पुलिस वाले सिर्फ ज़ख़्मी कैसे हुए?
– दोनों घायल पुलिस वाले आनंदपाल की बिरादरी के ही क्यों?
-राज्य के गृह मंत्री और आईजी को इतने लम्बे समय तक चले एनकाउंटर की जानकारी क्यों नहीं थी?

राजपूतों का कहना है कि आनंदपाल बिरादरी की शान था। उसके साथ गलत हुआ है और हम उसे न्याय दिला कर रहेंगे।

About the author

हिमांशु पांडेय

हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।

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