अयोध्या में मंदिर निर्माण ट्रस्ट को लेकर संतों के बीच मतभेद उजागर

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राममंदिर के पक्ष में भले ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, लेकिन अभी ट्रस्ट बनाने को लेकर संतों के बीच आपस में ही कई मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। रामालय न्यास ट्रस्ट के सचिव अविमुक्ते श्वरानंद ने विहिप पर राममंदिर को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर विहिप ने पलटवार किया है।

विहिप के मीडिया प्रमुख शरद शर्मा ने कहा, “जो लोग राम मंदिर आंदोलन में रोड़ा अटकाने में लगे रहे, वे अब अयोध्या का फैसला आने के बाद राम जन्मभूमि पर सोने का मंदिर बनाने का हवाई बयान दे रहे हैं।”

शर्मा ने कहा कि मंदिर संघर्ष के दौरान जिनका नामोनिशान नहीं था, ऐसे लोग अब कोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद बिना किसी तैयारी के राममंदिर निर्माण के लिए दावेदारी पेश करने अयोध्या पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा, “अयोध्या में सोने का मंदिर बनाने की बात वे(अविमुक्ते श्वरानंद) किस हक से कर रहे हैं? उनको इसका अधिकार किसने दिया है? 30 साल पहले पौने दो लाख गांवों के लोगों ने सवा-सवा रुपये दान देकर मंदिर निर्माण की मंशा जाहिर की थी। शिलाओं को पूजित कर यहां पहुंचाया। उनके दान से ही राम मंदिर कार्यशाला बनी।”

इसके अलावा जगतगुरु वासुदेवानंद सरस्वती ने रामालय ट्रस्ट के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि भारत सरकार ट्रस्ट बनाए और वही ट्रस्ट मंदिर का निर्माण करेगा। उसी के अनुसार ट्रस्ट का गठन किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “रामालय ट्रस्ट एक व्यक्तिगत संस्था है, उसका हिंदू समाज से कोई संबंध नहीं है। वह एक राजनैतिक स्पर्धा है।”

उन्होंने विहिप द्वारा तैयार मॉडल का समर्थन हुए करते हुए कहा, “इस मॉडल के लिए भारत का प्रत्येक नागरिक समर्पित है। इस पर सुप्रीम कोर्ट में भी चर्चा रही है, इसलिए इसी मॉडल के अनुरूप मंदिर का निर्माण होना चाहिए। अगर चाहें तो इसका विस्तारीकरण हो सकता है।”

उन्होंने ट्रस्ट के निर्माण को लेकर कहा कि “हम यही चाहते हैं कि राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य और राम मंदिर निर्माण के ट्रस्ट में शामिल साथी और अन्य बुद्घिजीवियों को इसमें शामिल किया जाए।”

रामालय न्यास के जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्ते श्वरानंद ने विश्व हिंदू परिषद पर हमलावर रुख अख्तियार करते हुए कहा, “संतों की पूर्व में राय थी कि प्लॉट मिल जाए, तब नक्शा बनवाया जाए। लेकिन उसके बावजूद पत्थर खरीद कर उसका मॉडल बनवा दिया गया। जो मौजूदा मॉडल है, वह 130 फुट ऊंचा है और अमित शाह कह रहे हैं कि जो भगवान राम का मंदिर का शिखर होगा, वह आकाश शिखर का होगा।”

उन्होंने कहा कि इस बाबत सरकार को पत्र भेज दिया गया है।

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