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    सरकार ने हाल ही में ई-कॉमर्स कंपनियों के नियमों में संशोधन किया है। इन नियमों के अनुसार अब फ्लिपकार्ट एवं अमेज़न जैसी कंपनियां बम्पर डिस्काउंट, कैशबैक एवं एक्सक्लूसिव डील जैसे ऑफर का प्रयोग नहीं कर पाएंगी। ये सभी नियम इन कंपनियों पर 1 फरवरी से लागू होंगे।

    क्यों बदलने पड़े नियम ?

    सरकार के अनुसार किये गए संशोधनों का मुख्य कारण बाज़ार में ऑफलाइन विक्रेताओं द्वारा की गयी शिकायतें थी। उनकी लगातार शिकायतें आ रही थी की ई-कॉमर्स कंपनियां अपने एफिलिएटस के ज़रिये इन्वेंट्री पर अपने नियंत्रण का उपयोग कर रही हैं। इसके साथ ही वे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां एक्सक्लूसिव सेल लगाकर एवं उत्पादों की कीमतें बहुत कम करके बेचने वाला एक अनुचित बाज़ार बना रही हैं।

    अमेज़न एवं फ्लिप्कार्ट को व्यापारियों ने बताया पक्षधर :

    ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन (AIOVA) ने अक्टूबर में भारत के एंटी-ट्रस्ट बॉडी कॉम्पिटिशन कमीशन (CCI) के साथ एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि अमेजन अपने आंशिक स्वामित्व वाले व्यापारी जैसे क्लाउडटेल एवं अप्पेरियो आदि का पक्षधर है। लॉबी समूह ने मई में फ्लिपकार्ट के खिलाफ इसी तरह की याचिका दायर की थी, जिसमें चुनिंदा विक्रेताओं के लिए अधिमान्य उपचार के माध्यम से प्रतियोगिता नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था।

    इसके साथ ही उन्होंने बताया की ये ई-कॉमर्स कंपनियां अपने द्वारा स्वामित्व वाली कंपनियों के उत्पादों पर भारी डिस्काउंट देती है एवं उनकी बिक्री पर कैशबैक भी देती है। इससे ज्यादा ग्राहक उसकी तरफ आकर्षित होते हैं एवं इससे स्थानीय व्यापारियों को नुक्सान उठाना पड़ रहा है।

    क्या हैं नए नियम :

    नए नियमों के अनुसार ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा स्थानीय व्यापारियों एवं अपने स्वामित्व वाली कंपनियों के उत्पाद बिना किसी पक्षपात के बेचे जायेंगे। नए नियम छोटे व्यापारियों और उन किसानों के लाभ के लिए है जो डरते हैं कि अमेरिकी कंपनियां भारत के खुदरा बाजार में प्रवेश द्वार बना रही हैं और भारतीय खुदरा बिक्री पर हावी होने वाली छोटी दुकानों को निचोड़ सकती हैं।

    एक और बदलाव से इनवेंटरी संबंधी शर्तों को सख्त बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई वेंडर मार्केटप्लेस एंटिटी या उसकी ग्रुप कंपनियों से 25 पर्सेंट से अधिक सामान खरीदता है तो माना जाएगा कि उसकी इनवेंटरी पर मार्केटप्लेस का कंट्रोल है। इसका मतलब यह है कि कोई ब्रैंड या सप्लायर किसी एक मार्केटप्लेस के साथ खास संबंध नहीं बना पाएगा।

    नियमों का क्या होगा असर ?

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने बताया की यदि ये नियम पूरी तरह से लागू हो जाते हैं तो फिर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां एक्सक्लूसिव डील, भारी छूट एवं बड़े डिस्काउंट नहीं दे पाएंगी। इससे छोटे स्थानीय व्यापारियों को फायदा होगा।

    सीएआईटी के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि नए नियम वैश्विक खिलाड़ियों द्वारा ई-कॉमर्स के माध्यम से भारत में खुदरा व्यापार को नियंत्रित करने और हावी होने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति पर जोर डालेंगे।

    अमेज़न एवं फ्लिकार्ट की प्रतिक्रिया :

    इन नियमों के लागू होने की बात पर अमेज़न ने बताया की वह अभी नियमों का मूल्यांकन कर रहा है एवं फ्लिप्कार्ट की तरफ से वर्तमान में इस बारे में कोई जवाब नहीं आया है।

    By विकास सिंह

    विकास नें वाणिज्य में स्नातक किया है और उन्हें भाषा और खेल-कूद में काफी शौक है. दा इंडियन वायर के लिए विकास हिंदी व्याकरण एवं अन्य भाषाओं के बारे में लिख रहे हैं.

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