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    संयुक्त राज्य अमेरिका 2030 तक 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा स्थापित करने की दिशा में काम करने के लिए भारत के साथ सहयोग करेगा। जलवायु के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी ने सोमवार को कहा कि, “हम वित्त, प्रौद्योगिकी और इसे हासिल करने के लिए आवश्यक अन्य तत्वों को लाने के लिए भारत के साथ साझेदारी करने के लिए तत्पर हैं।”

    वर्तमान में भारत की स्थापित अक्षय ऊर्जा से बिजली उत्पादन क्षमता 2021-22 तक 476 गीगावाट्स होने का अनुमान है और 2030 तक कम से कम 817 गीगावाट्स तक बढ़ने की उम्मीद है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के एक विज्ञप्ति के अनुसार जॉन केरी 12-14 सितंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं और “वैश्विक जलवायु महत्वाकांक्षा को बढ़ाने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने” के लिए मंत्रियों और उद्योगपतियों से मुलाकात कर रहे हैं।

    जलवायु सम्बंधिन मामलों के दूत केरी क्लाइमेट एक्शन एंड फाइनेंस मोबिलाइजेशन डायलॉग (सीएएफएमडी) के शुभारंभ पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक के बाद एक सार्वजनिक समारोह में बोल रहे थे। यह यूएस-इंडिया एजेंडा 2030 पार्टनरशिप के मुख्य ट्रैक में से एक था, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2021 में लीडर्स समिट ऑन क्लाइमेट में की थी। जॉन केरी ने कहा कि सोमवार की बातचीत एक “शक्तिशाली एवेन्यू” के रूप में काम करेगी।

    अमेरिका-भारत सहयोग, और तीन स्तंभों पर आधारित होगा। एक “जलवायु कार्रवाई स्तंभ” होगा जिसमें अगले दशक में उत्सर्जन के तरीकों को देखते हुए संयुक्त प्रस्तावों को कम किया जा सकता है। दूसरा स्तंभ परिवहन, भवन और उद्योग में 450 गीगावाट्स प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार करेगा। अंतिम स्तंभ या ”वित्त स्तंभ” में 450 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को तैनात करने और बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए वित्त को आकर्षित करने में सहयोग करना शामिल होगा। जॉन केरी ने कहा कि अमेरिका में छह बैंक स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में अगले दशक में 4.5 ट्रिलियन डॉलर का “निवेश” करने के लिए पहले ही प्रतिबद्ध हैं।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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