Sun. Jul 21st, 2024

    अमेरिका की ओर से चीन पर रशिया से सैन्य उपकरण लेने के वजह से सैन्य प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प प्रशासन की ओर से बिना किसी देश का नामे लेते हुए कहा गया हैं, अगर कोई देश रशिया से सैन्य उपकरण खरीदना चाहता हैं, तो वे फिर एकबार अपने फैसले पर विचार करें।

    आपको बता दे, भारत रशिया से एस-400 मिसाइल प्रणाली लेना चाहता हैं, अगले महीने के शुरुवात में रशियन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत के दौरे पर आएँगे तब इस डील पर मुहर लगेगी। लेकिन अमेरिका के इस कड़े रवैय्ये से भारत को अपने इस डील पर पुनर्विचार करना पद सकता हैं।

    काँबटिंग अमेरिकाज एडवर्सरिज थ्रू  सॅन्कशन्स (काट्सा) यह 2017 में अमेरिकन संसद द्वारा पारित कानून हैं, जो अमेरिकन सरकार को युक्रेन और अमेरिकन चुनाव में दखलंदाजी के लिए रशिया को सजा देने के अधिकार अमेरिकन सरकार को देता हैं। इसी कानून के अंतर्गत चीन पर सैन्य प्रतिबन्ध लादे गए हैं।

    अमेरिका की ओर से कहा गया, “चीन पर सु-35 फाइटर जेट और एस-400 मिसाइल प्रणाली रशिया से खरीदने के कारन प्रतिबंध लगाए गए हैं।” अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ट आधिकारी ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा, “एस-400 मिसाइल प्रणाली के और भी संभावित ग्राहक देश हो सकते हैं, वे यह बात जानले लें, रशिया से एस-400 मिसाइल प्रणाली जैसी सैन्य प्रणालीओं को खरीदने पर उन देशों पर भी ऐसी कार्यवाही हो सकती हैं।”

    भारत, रशिया से पांच एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदना चाहता हैं, जिसकी कुल लागत करीब 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर हैं। भारत की ओर से अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा हैं, की वे इस डील के सन्दर्भ में भारत को छुट दें। पिछले दिनों नयी दिल्ली में भारत और अमेरिका के बीच हुयी 2+2 वार्ता के बाद काट्सा एक्ट में भारत को छुट दिए जाने की मांग भारत की ओर से की गयी थी।

    अमेरिका की ओर से स्पष्ट किया गया हैं, जहाँ तक काट्सा एक्ट में छुट का सवाल हैं, वह परिस्थिति और देशों के अनुरूप अमेरिकन राष्ट्रपति द्वारा दिए जाएँगे। लेकिन इस विषय में अमेरिका की ओर से भारत को आश्वस्त नहीं किया गया हैं, इसलिए अगर ट्रम्प प्रशासन ने काट्सा एक्ट की विषय में भारत को छुट नहीं दी तो, भारत को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता हैं।

    By प्रशांत पंद्री

    प्रशांत, पुणे विश्वविद्यालय में बीबीए(कंप्यूटर एप्लीकेशन्स) के तृतीय वर्ष के छात्र हैं। वे अन्तर्राष्ट्रीय राजनीती, रक्षा और प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज में रूचि रखते हैं।

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *