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    अमेरिकी-तालिबानी वार्ता

    तालिबान और अमेरिका अफगानिस्तान में 18 वर्षों से जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए शान्ति समझौते को मुकम्मल करने के काफी करीब पंहुच गए हैं। अमेरिकी राज्य सचिव माइक पोम्पियो ने शांति संधि होने की उम्मीद जताई है जिसके तहत अफगानी सरजमीं से अमेरिकी सैनिको की वापसी होगी।

    क़तर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच शान्ति वार्ता के पांचवे दिन यह निर्णय लिया गया था। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि “इस चरम में हमें प्रगति की है तो हम शेष बिन्दुओं को अन्तिक रूप दे रहे हैं। जैसे ही शेष बिन्दुओं को अंतिम रूप दे दिया जायेगा, इस समझौते का खुलासा कर दिया जायेगा।”

    तालिबान के कमांडर ने मंगलवार को कहा था कि “अमेरिका द्वारा समर्थित अफगानिस्तान की सरकार के खिलाफ चरमपंथी समूह लड़ना जारी रखेगा और बल से ताकत पर कब्ज़ा करने की कोशिश करेगा।

    तालिबान और अमेरिका के विशेष वार्ताकारों ने चर्चा को आखिरी दौर के लिए छोड़ दिया है जिसमे  अफगानिस्तान से विदेशी सैनिकों की वापसी को अंतिम रूप दिया जायेगा। हालाँकि समझौते पर असहमति बनी हुई है, जिसके तहत  विद्रोही अफगान सरकार के साथ लड़ाई का खत्म कर देंगे।

    अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि ज़ल्माय खलीलज़ाद ने तालिबान पर काबुल सरकार के साथ प्रत्यक्ष बातचीत करने और क्षेत्र में संघर्ष विराम को बरक़रार रखने के लिए रजामंदी जाहिर करने के लिए दबाव बना रहे हैं। तालिबान के एक शीर्ष स्तर के अधिकारी ने कहा है कि “ऐसा कभी मुमकिन नहीं है।”

    एक अन्य तालिबान कमांडर ने कहा कि “इस सप्ताह शान्ति समझौते के मुकम्मल होने की संभावना है जिसके तहत अमेरिकी सेना अफगानी सरजमीं को छोड़ देगी और विद्रोहियों के खिलाफ अपनी लड़ाई को समाप्त कर देगी। हालांकि, खलीलज़ाद ने इस दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिकी सेनाएं अफगान सरकार का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने कहा  कि “किसी को भी प्रचार से भयभीत या मूर्ख नहीं बनाया जाना चाहिए।”

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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