अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका पर भारत की है पैनी निगाह

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अफगानिस्तान में तैनात सैनिक
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अफगानिस्तान में तालिबान के साथ शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका पर भारत ने निगाहें जमाई हुई है। इस विकास से सम्बंधित दो जानकार लोगों ने कहा कि अफगानी क्षेत्र में पाकिस्तान की सक्रियता को भारत करीब से देख रहा है। जंग से जूझ रहे देश में सेना की भूमिका की अभी कोई योजना नहीं है।

अमेरिका के अफगानिस्तान में शाति के लिए नियुक्त विशेष राजदूत ज़लमय खलीलजाद ने तालिबान के साथ शांति के बाबत बातचीत की थी और इसका भारत पर क्या असर होगा, इसकी समीक्षा अभी जारी है। तालिबान की टीम और ज़लमय खलीलजाद के मध्य यूएई में दो दिन की वार्ता बीते माह हुई थी।

ईरान के साथ तालिबान की बातचीत

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली शम्खानी ने कहा था कि वे भी शांति के लिए तालिबान के पतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ईरान ने सोमवार को पुष्टि की कि तालिबान ने शांति वार्ता के लिए दौरा किया था। बीते कुछ दिनों में यह दूसरी बार वार्ता का दौर था। इस शांति वार्ता का मकसद 17 वर्ष पूर्व संघर्ष का अंत है।

चरमपंथियों ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जारी कर बताया कि तालिबान के समूह ने ईरान के साथ आधिपत्य के बाद के हालातों के बाबत चर्चा की और अफगानिस्तान व क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को लेकर बातचीत की थी।  हाल की ख़बरों के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी का लिया था।

पाकिस्तान की सक्रियता पर निगाह

अफगान संबंधों के जानकार ने डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 7000 सैनकों की वापसी पर कहा कि यह अफगानिस्तान को प्रभावित करेगा, अफगान क्सार्कार के लिए इतने सैनिकों की संख्या को वापस तैनात करना बहुत मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इसके असर के बाबत अभी समीक्षा जारी है साथ ही पाकिस्तान की सक्रियता पर भी निगाह रखी जा रही है।

हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मन्त्र शाह महमूद कुरैशी ने शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका के बाबत बातचीत के लिए अफगानिस्तान, ईरान, चीन और रूस की यात्रा की थी। इस मामले से जुड़े दूसरे व्यक्ति ने कहा कि “हम अभी की सरकार को पूरा समर्थन देते हैं और हमें यकीन है कि शांति प्रक्रिया के लिए सरकार और अन्य राजनीतिक ताकतों के मध्य बातचीत होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि हम किसी भी प्रक्रिया का हिस्सा बनने में खुश होंगे और हम इसमें भाग लेने की कोशिश करेंगे। भारत के अफगानिस्तान में वैध हित है और हम इसका संरक्षण करेंगे। तक्षशिला संस्थान के निदेशक नितिन पाई ने कहा कि भारत को लम्बी दौड़ के लिए तैयार रहना चाहिए और और काबुल में जिसकी भी सत्ता हो, उसके साथ समझौता करने के लिए तैयार रहे।

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