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    अगस्त में सकल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) राजस्व गिरकर ₹1.12 लाख करोड़ हो गया जो पिछले महीने एकत्र किए गए ₹1.16 लाख करोड़ से काम है। हालाँकि वित्त मंत्रालय ने कहा कि संग्र मुख्य रूप से जुलाई में आर्थिक गतिविधियों से संबंधित था। फिर भी अगस्त में भी इसने एक “तेज” आर्थिक सुधार का संकेत दिया है। लेकिन कई अर्थशास्त्रियों ने इसे एक असमान और कमजोर रिकवरी के संकेत के रूप में माना है।

    यह सुझाव देते हुए कि जीएसटी राजस्व उनके पूर्व-महामारी के स्तर से आगे निकल गया है मंत्रालय ने कहा कि, “अगस्त 2021 का राजस्व संग्रह पिछले साल के इसी महीने में जीएसटी राजस्व से 30% अधिक है। वहीं 2019-20 में अगस्त के राजस्व की तुलना में यह 14% की वृद्धि है जबकि कुल संग्रह ₹98,202 करोड़ था।” 2020-21 में नौ महीने लगातार जीएसटी संग्रह ₹ 1 लाख करोड़ के ऊपर के बाद दूसरी कोविड-19 लहर के कारण जून में नीचे गिर गया था।

    मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि, “कोविड-19 प्रतिबंधों में ढील के साथ जुलाई और अगस्त 2021 के लिए जीएसटी संग्रह फिर से 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है जो स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था की स्तिथि तेज गति से ठीक हो रही है।”

    रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जीएसटी राजस्व में क्रमिक गिरावट “ई-वे बिलों में सुधार को दर्शाती है जो जून 2021 में 1.8 मिलियन से जुलाई 2021 में 2.1 मिलियन पर पहुँच गया। यह सुधार विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में देखे गए।”

    साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि, “जीएसटी संग्रह में गिरावट, उम्मीद से कम कोर सेक्टर की वृद्धि, और अगस्त निर्माण पीएमआई [परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स] में मॉडरेशन से पता चलता है कि चालू तिमाही में चल रहे संग्रह की ताकत के बारे में कुछ सावधानी बरतने की जरूरत है।”

    बड़े राज्यों में, तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों ने जीएसटी राजस्व में 35% की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद आंध्र प्रदेश (33%), महाराष्ट्र (31%) और गुजरात (25%) का स्थान रहा। कुल मिलाकर घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से जीएसटी राजस्व साल-दर-साल की तुलना में अगस्त में 27% अधिक रहा।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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