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    New Delhi: Health workers collect swab samples from people for COVID -19 tests, in New Delhi, Thursday, April 23, 2020. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI23-04-2020_000042B)

    कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के फैलाव का आकलन कर तीसरी लहर की तैयारी के लिए देश में अगले हफ्ते से सीरो सर्वे शुरू हो रहा है। सर्वे में जो नतीजे आएंगे, उसके हिसाब से अगली रणनीति तय होगी।

    सीरो सर्वे होता क्या है?

    इस सर्वे के नतीजे के आधार पर संक्रमण का फैलाव पता चलता है। इस सामुदायिक सर्वे के नतीजे के अध्ययन के आधार पर प्रशासन भविष्य में इस महामारी की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाएगा। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल होंगे। सीरो सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि अब तक शहर की कितनी आबादी महामारी के इस दौर में कोरोना से संक्रमित हो चुकी है।

    प्रशासन को लगता है कि अब तक जितने भी कुल संक्रमण के केस आए हैं, उससे कहीं ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके पीछे का कारण बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि बहुत से लोगों को संक्रमण हुआ, लेकिन वह घर पर ही ठीक हो गए। उन्होंने इसकी सूचना कहीं पर नहीं दी। इसी तरह बहुत से लोगों में कोरोना की बीमारी बिना लक्षणों के रही लेकिन ये लोग अपने आप ही ठीक हो गए। इसे सीरोलॉजी टेस्ट भी कहा जाता है।

    व्यक्तिगत लोगों के ग्रुप का ब्लड सीरम लेकर इसकी जांच होती है। इसमें देखा जाता है कि कितने लोगों में एंटीबॉडी बनी है और उनके शरीर के इम्यून सिस्टम ने एंटीबॉडी बनाकर कैसे बीमारी के प्रति रिस्पांड किया है। पीजीआई के वरिष्ठ डाक्टरों के मुताबिक एक स्वस्थ शरीर में दो तरह की एंटीबॉडी बनती हैं। एक इम्यूनोग्लोबिन एम और दूसरी इम्यूनोग्लोबिन जी, जो किसी भी संक्रमण के खिलाफ काम करती हैं। बीमारी से ठीक हुए लोगों में यह काफी देर तक रहती हैं।

    सीरो सर्वे कैसे किया जाता है?

    सीरो सर्वे के लिए रैंडम सैम्पलिंग की जाती है। पिछले साल देश में पहला सीरो सर्वे हुआ था, तब देश को 2 भागों में बांटा गया था। पहले हिस्से में वे शहर या जिले थे जिनमें इन्फेक्शन रेट सबसे ज्यादा थी। इन शहरों में 5 कंटेनमेंट ज़ोन चुने गए। हर कंटेनमेंट जोन से 10-10 लोगों के ब्लड सैम्पल लिए गए।

    दूसरे हिस्से में करीब 60 जिले या शहर चुने गए जिन्हें कोरोना के कन्फर्म्ड केस के आधार पर लो, मीडियम और हाई कैटेगरी में बांटा गया। इन सभी जगहों से 10 कंटेनमेंट जोन में से सैंपल लिए गए। यानी कोशिश होती है कि देश के ज्यादातर हिस्सों से अलग-अलग वर्ग के लोगों का सैम्पल लिया जाए ताकि सही और सटीक आंकड़े मिल सकें।

    सीरो सर्वे कितना जरूरी है?

    कोरोना महामारी पूरे चिकित्सा जगत के लिए नई है। इसके बारे में वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के पास पहले से कोई जानकारी मौजूद नहीं है। इसलिए महामारी से जुड़े बुनियादी सवालों का जवाब पता करने के लिए सीरो सर्वे किया जाता है ताकि भविष्य में बीमारी से लड़ने की रणनीति तैयार की जा सके। सीरो सर्वे के जरिए वैज्ञानिक और डॉक्टर इन सवालों के जवाब पता करने की कोशिश करते हैं।

    जिन लोगों में एंटीबॉडी बनी है, वे इन्फेक्शन रोकने दीवार की तरह काम करते हैं। इसे हर्ड इम्यूनिटी कहते हैं। सीरो सर्वे से इसका पता लगाने में मदद मिलती है। सीरो सर्वे से पता चलता है कि देश की कितने प्रतिशत आबादी में एंटीबॉडी है। विशेषज्ञों के मुताबिक जब 60-70% आबादी में एंटीबॉडी डेवलप हो जाएगी, तब हर्ड इम्यूनिटी बन जाएगी। देश के किन इलाकों में और किस उम्र के लोगों में इन्फेक्शन ज्यादा है? कितने लोग कोरोना से इन्फेक्ट हुए और इन्फेक्टेड लोगों में एंटीबॉडी कब तक रहेगी?

    अब तक देश में कितने सीरो सर्व हुए और उनमें क्या नतीजे मिले

    आईसीएमआर ने देश में पहला सीरो सर्वे मई 2020 में किया था। इसके बाद 2 और सीरो सर्वे किए गए। अंतिम सीरो सर्वे 17 दिसंबर 2020 से 8 जनवरी 2021 के बीच हुआ था। इस सर्वे के नतीजों में पता लगा था कि देश की 21.5% आबादी कोरोना से संक्रमित हो चुकी है। अभी भी 80% लोगों में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है।

    पूरे देश में रैंडम सैंपलिंग के आधार पर 28,589 लोगों के बीच यह सर्वे किया गया था। पहले सीरो सर्वे में 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को ही शामिल किया गया था। इसके बाद के दोनों सर्वे में 10 साल से अधिक उम्र के बच्चे भी शामिल थे। अलग-अलग शहरों और राज्यों ने अपने स्तर पर भी सीरो सर्वे भी किए हैं।

    By आदित्य सिंह

    दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास का छात्र। खासतौर पर इतिहास, साहित्य और राजनीति में रुचि।

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