मंगलवार, जनवरी 21, 2020

सीपीईसी में भारत के शामिल होने पर नाम बदलने को तैयार चीन

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चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरूवार को कहा कि अगर भारत वन बेल्ट वन रोड में शामिल हो जाता है तो वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का नाम बदल सकता है। इसके अलावा कहा कि सीपीईसी एक आर्थिक सहकारिता पहल है जिसका क्षेत्रीय संप्रभुता विवादों के साथ कुछ भी संबंध नहीं है।

साथ ही यह कश्मीर मुद्दे पर चीन और पाकिस्तान की स्थिति को प्रभावित नहीं करता है। गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्रालय ने यह बयान अपने राजदूत के पिछले हफ्ते दिए बयान की प्रतिक्रिया के रूप में आया है।

पिछले हफ्ते दिल्ली में चीनी राजदूत ने कहा था कि भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए चीन सीपीईसी का नाम बदल सकता है और जम्मू-कश्मीर, नाथू ला पास या नेपाल से होकर एक वैकल्पिक कॉरिडोर बना सकता है।

चीन, भारत को वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट में शामिल करना चाहता है। इसलिए ही चीन ने अपने चीनी राजदूत के जरिए ये संकेत भारत में पहुंचाए गए। चीन ने ये भी कहा है कि वो इस्लामाबाद को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है।

इसलिए ही सीपीईसी में पाकिस्तान का नाम लिया है। अगर भारत इस प्रोजेक्ट में शामिल होता है तो वह सीपीईसी के नाम में बदलाव भी कर सकते है। चीन भारत को किसी भी तरह इसमें शामिल करना चाहता है।

चीनी राजदूत के बयान पर चीन की प्रतिक्रिया

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) प्रोजेक्ट के लिए हुई संयुक्त सहयोग समिति (जेसीसी) में चीन व पाकिस्तान के अधिकारी शामिल हुए थे। चीन के राजदूत लुओ झाहाई ने पिछले सप्ताह यह कहा था कि चीन सीपीईसी के नाम पर बदलाव कर सकता है।

साथ ही कहा था कि अगर जम्मू-कश्मीर में सीपीईसी को लेकर विरोध है तो वो वैकल्पिक तौर पर अलग से मार्ग का निर्माण किया जा सकता है। ऐसा कहकर लुओ ने काफी सुर्खियों बटोरी थी।

लेकिन अब चीन ने अपने राजदूत के किसी प्रस्ताव को मानने से स्पष्ट रूप से इंकार नहीं किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने लुओ के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है। हालांकि अभी भी विशेषज्ञों की तरफ से संभावना जताई जा रही है कि चीन सीपीईसी का नाम बदलने को तैयार है।

सीपीईसी को लेकर हाल ही में हुई जेसीसी की बैठक

हाल ही में कुछ दिनों पहले ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) प्रोजेक्ट के दीर्घकालीन योजना को संयुक्त सहयोग समिति (जेसीसी) ने आखिरकार स्वीकृति दे दी है। सीपीईसी की दीर्घकालीन योजना (एलटीपी 2017-30) को विकास परियोजनाओं और विशेष आर्थिक क्षेत्रों पर सहमति के बिना ही मंजूर कर लिया गया।

जेसीसी में चीन व पाकिस्तान के विशेषज्ञ व अधिकारी मौजूद रहे। अब सीपीईसी को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर अपने नागरिकों के विरोध को देखते हुए लंबी अवधि की परियोजना कार्यक्रम को शामिल किया है।

सीपीईसी प्रोजेक्ट पर सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों को जेसीसी के द्वारा ही लिया जाता है। इस बैठक के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के राजनीतिक अस्थिरता को लेकर नाराजगी व्यक्त की।

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