Wed. Dec 7th, 2022
    पाकिस्तान-चीन

    पाकिस्तान ने चीन की मंदारिन को अपने देश की आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं दिया है। कल पूरे मीडिया जगत में ये खबर महज अफवाह निकली। जानकारी के मुताबिक वास्तव में सीनेटर खालिद परवेन ने पाकिस्तानी संसद को प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि सीपीईसी के तहत पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सहयोग को देखते हुए, सरकारी चीनी भाषा के पाठ्यक्रमों को सभी मौजूदा और संभावित पाकिस्तानी सीपीईसी मानव संसाधनों के लिए लॉन्च किया जाना चाहिए ताकि किसी भी महंगे संचार बाधाओं को दूर किया जा सके।

    इसमें कही भी ये नहीं कहा गया कि चीन की मंदारिन को पाक की अाधिकारिक भाषा मानना चाहिए। इसमें तो सिर्फ सीपीईसी के लिए बाधाओं को दूर करने के लिए जानने पर बल दिया गया था।

    कल मीडिया  रिपोर्टो में कहा गया था कि पाकिस्तान ने चीन को खुश करने के लिए उसकी मंदारिन भाषा को अपने देश की आधिकारिक भाषा घोषित कर दिया है। पाक के इस कदम का उद्देश्य सीपीईसी से जुडे लोगो को आसानी से संवाद करने में मदद करने के लिए है। चीन की मंदारिन भाषा को सीखने के बाद अब चीन व पाकिस्तान अधिक करीबी हो जाएंगे।

    विभिन्न न्यूज एजेंसियों ने इस तरह की खबर प्रकाशित की थी लेकिन मंदारिन भाषा वाली खबर गलत निकली। पाकिस्तान ने मंदारिन को अपनी आधिकारिक भाषा का दर्जा नहीं दिया है। पहले की खबरो के मुताबिक पाकिस्तानी सीनेट ने मंदारिन को देश की आधिकारिक भाषाओं में से एक घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया था। पाकिस्तान में प्रस्ताव के अनुसार, चीन के साथ देश के संबंधों को देखते हुए यह कदम जरूरी था।

    अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी ने भी ट्वीट कर कहा था कि पिछले 70 सालो की छोटी सी अवधि में पाकिस्तान ने चार भाषाओं का प्रचार किया है जो कि देश के कई लोगो की मातृभाषा तक नहीं है। अंग्रेजी, उर्द, अरबी और अब चीनी मूल की भाषा को अपनाकर पाकिस्तान स्थानीय लोगों की भाषाओं की उपेक्षा कर रहा है। पाकिस्तानी न्यूज चैनल अब तक ने सबसे पहले इस खबर को चलाया था।

    सीपीईसी प्रोजेक्ट मे भी मंदारिन भाषा को सीखने से अब चीनी अधिकारियों के साथ संवाद करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। पाकिस्तान ने ये निर्णय औद्योगिक व वाणिज्यिक बैंक ऑफ साइंस (आईसीबीसी) से 500 मिलियन डॉलर का विदेशी वाणिज्यिक ऋण अनुबंध स्वीकार करने के तीन दिन बाद लिया है। चीन बड़ी मात्रा में पाकिस्तान को ऋण उपलब्ध करवाकर उसे अपने जाल में फांस रहा है।

    इस बीच ही अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अमेरिका की पकड़ से बाहर निकल रहा है और चीन के करीब पहुंच रहा है।