Thu. Oct 6th, 2022
    सऊदी अरब क्राउन प्रिंस

    सऊदी अरब एक ऐसा देश है जहां के कड़े नियमों व कानून की चर्चा पूरी दुनिया में होती है। देश में रूढ़िवादी ताकतों का ज्यादा प्रभाव रहता है। सऊदी अरब दुनिया की तेल संपदा के करीब एक चौथाई हिस्से पर अधिकार रखता है। प्रशासन की बात की जाए तो यहां पर लोकतंत्र की जगह राजतंत्र है।

    सऊदी अरब में महिलाओं व आम लोगों के लिए कठोर कानून बनाए हुए है। सिर्फ यहां के निवासी ही नहीं बल्कि दुनिया के लोग भी सऊदी अरब में घूमने जाते है तो वे यहां के नियमों की पूरी तरह से पालना करते है। वर्तमान में पूरी दुनिया में सऊदी अरब की चर्चा हो रही है। सऊदी की राजधानी रियाद में अचानक से इतना बदलाव हुआ है जिस पर पूरी दुनिया हैरानी जता रही है।

    सऊदी अरब की फिजा में इन दिनों भ्रष्टाचार का मुद्दा छाया हुआ है। भ्रष्टाचार रोधी कमेटी ने कई हाई प्रोफाइल लोगों, शहजादों, मंत्रियों व पूर्व मंत्रियों को हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए शहजादों में हाई प्रोफाइल प्रिंस अलवलीद बिन तलाल भी शामिल है।

    फोर्ब्स पत्रिका की ओर से तैयार दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 45वें पायदान पर मौजूद अलवलीद 17 अरब डॉलर यानी करीब 10 खरब रुपये की संपत्ति के मालिक है।

    हाई प्रोफाइल लोगों व शहजादों को भेजा जेल

    इस कमेटी का चेयरमैन क्राउनप्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को बनाया गया है जो कि सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुल अज़ीज के बेटे है। अजीज ने सत्ता की बागडोर एक तरीके से सलमान पर छोड़ रखी है। देश के अहम फैसलों में मोहम्मद बिन सलमान की मुख्य भूमिका होती है।

    मोहम्मद बिन सलमान की अगुवाई में भ्रष्टाचार रोधी कमेटी ने जिस तरह से भ्रष्टाचार को लेकर शहजादों व बड़े लोगों को सलाखों के पीछे डाला है उसको लेकर कई तरह के मायने सामने आ रहे है। कई जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहा है।

    इनका कहना है कि वर्तमान में सऊदी अरब में भ्रष्टाचार का मुद्दा काफी हावी है। इसी के मद्देनजर ये कार्रवाई की जा रही है। ऐसा करने से मोहम्मद बिन सलमान की छवि देश के साथ ही दुनिया भर में साफ दिख रही है।

    वहीं कुछ आलोचकों ने सऊदी अरब मे की गई गिरफ्तारियों को सोची-समझी साजिश करार दिया है। इनका कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाना तो सिर्फ बहाना है। हकीकत तो यह है कि क्राउन प्रिंस धीरे-धीरे पूरी सत्ता को हथियाना चाहते है। सलमान को किंग ने रक्षा मंत्री सहित कई प्रमुख जिम्मेदारी दी है। इसके लिए किंग ने कई वरिष्ठ सदस्यों को भी हटाया है।

    अमेरिका कर रहा है मदद

    आलोचकों का कहना है कि सऊदी अरब में जो कुछ भी हो रहा है उसमे अमेरिका का हाथ है। शहजादों की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ट्रंप के दामाद रियाद आए थे। हो सकता है शायद उन्हें इस कार्रवाई के बारे में पहले ही बता दिया हो।

    साथ ही शहजादों की गिरफ्तारी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके सलमान के इस कदम का समर्थन भी किया था। जिससे अटकलें लगाई गई कि ये अमेरिका की शह से हो रहा है। क्राउन प्रिंस का शासन की रक्षा, सुरक्षा और अर्थनीति पर एकछत्र वर्चस्व है।

    इसी बीच कहा जा रहा है कि शाही खानदान में इस समय वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। कई लोगों का मानना है कि मोहम्मद बिन सलमान सऊदी अरब की कमान को अपने हाथ में लेना चाहते है। इसके लिए ही उन्होंने हाई प्रोफाइल बड़े लोगों को गिरफ्तार करवाया है।

    क्राउन प्रिंस की प्रशंसा व आलोचना

    सऊदी अरब में वर्तमान में कुछ भी घटनाक्रम चल रहा हो लेकिन इन सबके बीच मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब जैसे रूढ़िवादी देश में खुद को आधुनिक व उदारवादी सुधारक के तौर पर पेश किया है। बीते कुछ समय में मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी अरब के कड़े नियमों में बदलाव भी किए है।

    इनमे सबसे प्रमुख महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति देना शामिल है। इसके अलावा महिलाओं को मनोरंजन देखने के लिए स्टेडियम में जाने की अनुमति भी दी गई है। क्राउन प्रिंस सलमान धीरे-धीरे सऊदी अरब को रूढ़िवादी की जगह आधुनिक देश के रूप पेश कर रहे है।

    लेकिन सऊदी अरब में कई वरिष्ठ आलोचकों का मानना है कि क्राउन प्रिंस ऐसे निर्णय लेकर अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार रहे है। सऊदी अरब की आय में कमी का आरोप भी प्रिंस पर लगाया गया है।

    क्राउन प्रिंस के तमाम मनमाने फैसलों का शाही परिवार में काफी विरोध किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि क्राउन प्रिंस को अनुभव की कमी है। वे ज्यादातर निर्णय बिना सोचे-समझे लेते है। अब देखना यह है कि सऊदी अरब में हो रहे उथल-पुथल की दिशा किस करवट बदलती है।