Sat. Apr 13th, 2024
    शरद यादव

    लगता है जेडीयू में शरद यादव के दिन अब लद चुके है। बिहार की राजधानी पटना में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव द्वारा आयोजित “भाजपा हटाओ, देश बचाओ रैली” में शामिल होने की बात कहकर उन्होंने पार्टी हाई कमान को अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनके इस निर्णय के मद्देनजर जेडीयू उन्हें पार्टी से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने इस सन्दर्भ में शरद यादव को एक लिखित चिट्ठी सौंपी है। इस चिट्ठी में उन्होंने शरद यादव को सम्बोधित करते हुए लिखा है कि आपने अपनी मर्जी से 27 अगस्त को पटना में आयोजित हो रही आरजेडी की “भाजपा हटाओ, देश बचाओ” रैली में शामिल होने का फैसला लिया है। इसलिए ऐसा माना जाएगा कि आपने स्वेच्छा से पार्टी छोड़ दी है।

    नीतीश कुमार और शरद यादव
    चरम पर पहुँचा टकराव

    केसी त्यागी ने चिट्ठी में आगे लिखा है कि जेडीयू-भाजपा गठबंधन होने के बाद से ही आप पार्टी के मापदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं। हाल ही पटना में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी आपने हिस्सा नहीं लिया था। कार्यकारिणी की बैठक के वक़्त आप पटना में ही मौजूद थे। अगर आप 27 अगस्त को आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की “भाजपा हटाओ, देश बचाओ” रैली में हिस्सा लेते हैं तो यह मान लिया जाएगा कि आपने खुद अपनी मर्जी से पार्टी को अलविदा कह दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शरद यादव विरोधी पार्टी द्वारा 27 अगस्त को आयोजित रैली के लिए दिए गए आमंत्रण को अस्वीकार कर दें नहीं तो रैली में उनकी उपस्थिति जेडीयू के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगी। उनकी ऐसी किसी भी हरकत पर पार्टी कठोर कदम उठाएगी।

    छिन सकती है राज्यसभा सदस्यता

    जेडीयू शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता पर पहले ही सवाल उठा चुकी है। शरद यादव पर निशाना साधते हुए पार्टी प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा था कि शरद यादव जिसे सरकारी जनता दल यूनाइटेड कह रहे हैं उसी जनता दल यूनाइटेड के 71 विधायकों की वजह से आज वो राज्यसभा सांसद है। उन्होंने कहा था कि शरद यादव में अगर थोड़ी सी शर्म भी बची है तो इस लिहाज से उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। शरद यादव का यह कहना सही है कि 2019 में जनादेश महागठबंधन को मिला था लेकिन जनता ने यह जनादेश भ्रष्टाचार के लिए नहीं दिया था। जेडीयू ने पहले भी कहा था कि शरद यादव अपनी राज्यसभा सदस्यता का आधार सिद्ध करें। केसी त्यागी की चिट्ठी में रैली में शामिल होने पर शरद यादव पर कठोर कार्रवाई करने की बात कही गई है पर यह कार्रवाई क्या होगी यह स्पष्ट नहीं किया गया है। जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि शरद यादव लालू की रैली में शामिल नहीं हो रहे हैं।

    पार्टी में घट चुका है शरद का रसूख

    पिछले कुछ समय से शरद यादव का कद पार्टी में लगातार घटा है। एक वक़्त में वह पार्टी की धूरी हुआ करते थे और पार्टी के हर छोटे-बड़े फैसलों में उनका प्रत्यक्ष रूप से योगदान होता था। पिछले वर्ष अक्टूबर में नीतीश कुमार उन्हें हटाकर खुद जेडीयू अध्यक्ष बन बैठे। बिहार की राजनीति में भी उनकी भूमिका सीमित हो गई थी। अब वह केवल राज्यसभा सांसद हैं और वह भी कब तक हैं कुछ कहा नहीं जा सकता। इन हालातों में शरद यादव को पुराने दिन याद आ रहे होंगे जब उन्होंने नीतीश के साथ मिलकर जॉर्ज फर्नांडीस को ऐसे ही पार्टी में किनारे पर लगाया था। अब नीतीश कुमार वही बर्ताव शरद यादव के साथ कर रहे हैं और शरद अपना हाल जॉर्ज फर्नांडीस जैसा नहीं होने देना चाहते। ऐसे में शरद के लिए यही बेहतर होगा कि वह या तो खुद की नई पार्टी गठित करें या लालू यादव से हाथ मिला लें।

    बिहार सरकार के खिलाफ तीन दिवसीय यात्रा अभियान चला चुके हैं शरद

    शरद यादव 10 से 12 अगस्त तक बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने 7 जिलों की यात्रा की थी और जनता के बीच जाकर बात की थी। विभिन्न मुद्दों पर उन्होंने जनता का मन टटोलने की भी कोशिश की थी। उन्होंने लोगों से कहा था कि नीतीश कुमार के साथ वो लोग खड़े हैं जो अपना स्वार्थ साधने में लगे हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड सरकारी है। अपने गुट के बारे में उन्होंने कहा कि मेरे साथ वो लोग खड़े हैं जो जनता से जुड़े हैं और जनता की सेवा को लेकर फिक्रमंद है। मेरी जनता दल यूनाइटेड जनता की है और जनता के लिए है। माना जा रहा है कि शरद यादव नीतीश कुमार से अलग होकर अपने समर्थकों के साथ नई पार्टी का निर्माण करेंगे और लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगे। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने स्पष्ट कहा है कि शरद यादव के नेतृत्व वाली जेडीयू के साथ उनका गठबंधन जारी रहेगा।

    लालू प्रसाद यादव
    शरद यादव को लालू का समर्थन

    लालू के साथ खड़े नजर आ सकते हैं शरद यादव

    नीतीश कुमार के भाजपा के साथ जाकर गठबंधन कर सरकार बनाने के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने बागी रुख अख्तियार कर लिए थे। उन्होंने नीतीश कुमार के फैसले से असहमति जताते हुए उसे गलत करार दिया था। उसके बाद से ही शरद यादव लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। शरद यादव हाल ही में पटना में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। इससे स्पष्ट है कि अभी तक शरद यादव की नाराजगी मिटी नहीं है और वह अपनी अलग राह चुन सकते हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के बाद जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा भी तरह कि शरद यादव अपनी राह चुनने के लिए स्वतंत्र है।

    फिलहाल नीतीश कुमार सृजन घोटालों के आरोपों से घिरे नजर आ रहे हैं। जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जेडीयू के एनडीए में शामिल होने की घोषणा कर उन्होंने अपना भविष्य तो सुरक्षित कर लिया है पर बिहार की वर्तमान परिस्थितियां उनके माकूल नहीं है। बागी रुख अपनाये पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने अभी तक कोई फैसला तो नहीं लिया है पर वह लगातार एनडीए के खिलाफ विपक्षी दलों के महागठबंधन का संकेत देते नजर आ रहे हैं। बिहार विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव खुल कर उनके समर्थन में आ चुके हैं और कह चुके हैं कि शरद यादव की जेडीयू से उनका गठबंधन जारी रहेगा। अब मुमकिन है शरद यादव इस मौके का फायदा उठाये और नाराज पार्टी नेताओं के साथ जाकर अपने गुट के नाम और चुनाव चिन्ह के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाएं।

    शरद यादव और लालू यादव गठबंधन
    शरद यादव और लालू यादव

    शरद यादव की अब भी बिहार की जनता में पकड़ है और उनकी तीन दिवसीय बिहार यात्रा में यह बात नजर आ चुकी है। दिल्ली में उनके द्वारा आयोजित ‘सांझी विरासत सम्मलेन’ को विपक्ष का पूरा समर्थन मिला था। आगामी 27 अगस्त को आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी पटना में “भाजपा हटाओ, देश बचाओ” रैली का आयोजन किया है। इसमें देश की सभी विपक्षी पार्टियों के शामिल होने की उम्मीद है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह भाजपा को रोकने के लिए किसी के भी साथ जाने को तैयार हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि एक ही मंच से देश की राजनीति के यह तीनों यदुवंशी दिग्गज ‘जातीय महागठबंधन’ की भी घोषणा कर सकते हैं। परिस्थितियां शरद यादव के अनुकूल है और मुमकिन है वह जल्द ही अपना रुख स्पष्ट कर दें।

    By हिमांशु पांडेय

    हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।