Thu. May 23rd, 2024
    लेगाटम समृद्धि सूचकांक

    भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार को एक और बड़ी सफलता हासिल हुई है। लेगाटम समृद्धि सूचकांक में भारत ने बढ़ोतरी करते हुए 100वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले बार भारत 104वें स्थान पर था। इस साल 2017 में भारत ने चार अंकों की छलांग लगाते हुए 100 वें स्थान पर काबिज होने में सफलता प्राप्त की है।

    द्विपक्षीय व्यापार सूचकांक में बढ़ोतरी के बाद भारत ने ‘द लेगाटम समृद्धि सूचकांक 2017’ में भी अपनी रैंक को उन्नत किया है। साथ ही नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार को 41 वीं रैंक मिली है।

    इससे भारत व चीन के बीच समृद्धि की खाई भी कम हुई है। भारत को इस सूची में 100 वां स्थान व चीन को 90 वां स्थान मिला है। भारत व्यावसायिक माहौल, आर्थिक गुणवत्ता और प्रशासन में सुधार की बदौलत चीन के नजदीक आ सका है।  इससे पता चलता है कि भारत समृद्धि के मामले में आने वाले कुछ सालों में चीन को मात दे सकता है।

    शासन मामले में मिला भारत को सर्वश्रेष्ठ स्थान

    नरेन्द्र मोदी सरकार ने विकास को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाओं को संचालित किया हुआ है। जिसकी वजह से ही भारत को अच्छी रैंक लाने में मजबूती मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत पहली बार शीर्ष 100 समृद्ध देशों में आ गया है।

    अगर लेगाटम के सभी नौ सूचकांकों की बात करे तो इसमें सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान भारत को शासन में 41 वें नंबर पर मिला है। इन सूचकांकों से साबित हो रहा है कि भारत दुनिया भर में समृद्धि देश बन रहा है।

    लेगाटम समृद्धि सूचकांक के 149 देशों की समृद्ध सूची में भारत का 100 वां स्थान है। भारत ने इस सूचकांक में प्रशासन और आर्थिक गुणवत्ता पर सर्वोत्तम प्रदर्शन किया है और सुरक्षा व प्राकृतिक पर्यावरण पर सबसे कम अंक हासिल किए है।

    हालांकि भारत अभी भी चीन (52) और श्रीलंका (61), थाईलैंड (48) और नेपाल (89) जैसे पड़ोसी देशों के पीछे है। लेगाटम समृद्धि सूचकांक में नार्वे सबसे ऊपर व यमन सबसे नीचे है। यमन के नीचे रहने की वजह वहां चल रहा गृहयुद्ध है।

    लेगाटम समृद्धि सूचकांक के विभिन्न क्षेत्रों में भारत की स्थिति

    आर्थिक गुणवत्ता – 56 वां

    व्यापार पर्यावरण- 65 वां

    शासन – 41 वां

    शिक्षा – 99 वां

    स्वास्थ्य- 109 वां

    सुरक्षा और सुरक्षा- 134 वां

    व्यक्तिगत स्वतंत्रता -100 वां

    सोशल कैपिटल – 82 वां

    प्राकृतिक पर्यावरण- 139 वां