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रोहिंग्या संकट के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री टिलरसन जाएंगे म्यांमार

रोहिंग्या मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन म्यांमार दौरे पर जाएंगे। यहां पर वे सेना प्रमुख व आंग सान सू की से मुलाकात करेंगे।

म्यांमार में अभी भी रोहिंग्या मुसलमानों के ऊपर अत्याचार किए जा रहे है। बड़ी संख्या में म्यांमार से रोहिंम्या लोगों का बांग्लादेश में पलायन अभी भी जारी है। इसी बीच अब अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन के म्यांमार का दौरा करने की योजना है। ( रोहिंग्या मुस्लिम कौन हैं? )

जानकारी के अनुसार रेक्स टिलरसन म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और म्यांमार के सेना प्रमुख मिन आंग हलांग से रोहिंग्या मुद्दे पर चर्चा करेंगे। अमेरिका लगातार म्यांमार की तरफ से रोंहिग्या मुसलमानों पर किए जा रहे अत्याचारों को लेकर उसे चेतावनी दे रहा है।

म्यांमार के रखाइन प्रांत में अभी भी सेना की तरफ से रोहिंग्या पर जारी हिंसा खत्म नहीं हुई है। इसलिए अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स म्यांमार में जाकर रोहिंग्या मुद्दे पर बातचीत करेंगे। आंग सान सू की नोबेल पुरस्कार विजेता भी रह चुकी है।

जब से रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार किए जाने का मुद्दा उठा है तब से ही अमेरिका ने इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया है। गौरतलब है कि म्यांमार से करीब 6 लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को अपना देश छोडने को मजबूर होना पड़ा है जो कि बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर है।

रेक्स टिलरसन म्यांमार पर बनाएंगे दबाव

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी रोहिंग्या मुद्दे पर चिंता जाहिर की है। रेक्स टिलरसन के म्यांमार की सेना व नेताओं के साथ मुलाकात के बाद म्यांमार सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। साथ ही म्यांमार से रोहिंग्या को वापस बुलाने की मांग भी की जाएगी।

अमेरिका के साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने भी म्यांमार को रोहिंग्या पर हिंसा खत्म करने, इन्हें वापस बुलाने व सुरक्षा देने की अपील की थी। म्यांमार के रखाइन प्रांत में बौद्ध धर्म की बहुलता है। जबकि यहां पर रोंहिग्या मुसलमान अल्पसंख्यक है।

सेना की तरफ से ढाई महीनों में की गई कार्रवाई में रोहिंग्या मुसलमानों के करीब हजारों की संख्या में घर जला दिए गए व बड़ी संख्या में लोगों को बेहरमी से मारा गया। जिसकी वजह से रोहिंग्या को बांग्लादेश में जाकर शरण लेनी पड़ी। इसे दुनिया में सबसे बड़ा पलायन माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे जातीय सफाई कहा। अमेरिका का मानना है कि शरणार्थी शिविरों में संकट खत्म नहीं हो रहा है। यहां पर हजारों की संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार है।

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