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यूपी निकाय चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर राजनितिक दलों में ताना तानी

निकाय चुनाव, ईवीएम

उतर प्रदेश लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद से ही ईवीएम मशीन पर सवाल उठाये जा रहे है। यूपी विधानसभा चुनाव में भी इस मामले पर समाजवादी पार्टी और बसपा ने सवाल खड़े किये थे। लेकिन पहली बार भाजपा ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसपा सुप्रीमो मायावती को ईवीएम से जीते अलीगढ और मेरठ से इस्तीफा देकर फिर से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। हालाँकि मायावती भी हमला करने में पीछे नहीं हटी। लेकिन ईवीएम का मुद्दा दिन प्रतिदिन उत्तर प्रदेश के राजनीती दलों में ताना तानी का जरिया बनता जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के महापौर सम्मान समारोह में सीएम योगी ने कहा कि अगर बहुजन समाजवादी पार्टी को ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो अपने महापौरों को इस्तीफा दिलवाए, मैं चुनाव आयोग से बैलेट पेपर पर चुनाव करने की अपील करूँगा। नगर निगम चुनाव में बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ईवीएम पर सवाल उठाये थे। तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि सपा, बसपा और कांग्रेस अपनी हार को छुपाने के लिए इस तरह का दुष्प्रचार कर रहे है।

भाजपा कि यह दलील है कि अगर ईवीएम की विश्वसनीयता नहीं रहती तो मेरठ और अलीगढ में बसपा चुनाव कैसे जीतती। इसके अलावा नगर निगमों में भाजपा के सिर्फ 596 पार्षद जीते हैं लेकिन, सपा के 202, बसपा के 147, कांग्रेस के 110 और निर्दल 224 जीते है। अगर देखा जाये तो इन चारो ने भाजपा से ज्यादा सीट जीते है और ऐसे में सवाल उठाना गलत है।

वहीं भाजपा के लोगो का कहना है कि जहा मतपत्रों से चुनाव हुए है वहा सपा को आठ फीसदी और जहा ईवीएम से वोट पड़े है वहा 16 फीसदी उम्मीदवार जीते है। इसपर कोई सवाल जवाब नहीं।

योगी आदित्यनाथ के चुनौती के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि अगर भाजपा की जीत में ईवीएम की भूमिका नहीं है तो बसपा की जीती हुई मेरठ, अलीगढ समेत 16 सीटों पर मतपत्र से चुनाव करा के देख ले। उन्हें अपनी पार्टी की असलियत के साथ साथ प्रधानमंत्री मोदी की भी विजन का पता चल जायेगा। जनता नगर पालिका और नगर पंचायत की तरह महापौर में भी हरायेंगी।

योगी की रविवार को दी गई प्रतिक्रिया पर विफरी मायावती ने कहा कि चोरी ऊपर से सीना जोरि की बड़ी मिसाल है। असल में 2014 लोकसभा और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ईवीएम में धांधली कर जीत हासिल की थी और केंद्र और प्रदेश में बहुमत की सरकार बना ली। उन्होंने कहा कि इन दोनों चुनाव में भाजपा को इस तरह का जनसमर्थन नहीं था जिस तरह से चुनवी परिणाम बताते है। मायावती ने दावे के साथ कहा कि नगर निकाय चुनाव में 16 में से 14 सीटें धांधली कर जीती गई है।

मायावती ने कहा कि मेरठ और अलीगढ में बसपा जीती है क्योकि वहा गड़बड़ी करने पर चोरी साफ तौर पर पकडे जाने कि आशंका थी। इससे भाजपा की और भी ज्यादा फजीहत हो सकती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि नगर पंचायत और नगर पालिका चुनाव में भाजपा क्यों पिछड़ गई।

माया ने कहा कि यह तो राज्य चुनाव आयोग भी मानता है कि कई कारणों से लखनऊ के चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं रहे। इसकी जांच कराई जा रही है।

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