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भारत की मजबूत कूटनीति असरदार : जापान, अमेरिका सहित कई देश हुए साथ

भारत की मजबूत कूटनीति
जापान और अमेरिका समेत कई देशों ने डोकलाम विवाद मामले पर चीन को चेतावनी दी है। अमेरिका के पूर्व राजदूत और एक वरिष्ठ नेता पहले ही डोकलाम मुद्दे को चीन द्वारा शुरू किया गया विवाद बता चुके हैं। 

भारत और चीन के बीच डोकलाम में चल रहा सीमा विवाद अब सिर्फ इन दो देशों का मसला नहीं रहा। विश्व की बड़ी शक्तियां अब इसमें शामिल हो गयी हैं। इस मुद्दे पर सबसे पहले अमेरिका ने प्रतिक्रिया करते हुए इस मुद्दे को शांति से सुलझाने का सुझाव दिया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजराइल समेत कई देशों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस मामले में जहाँ चीन की दलीलें दिन प्रतिदिन कमजोर पड़ती जा रही है, वहीँ भारत का पक्ष मजबूत होता जा रहा है। जापान और अमेरिका समेत कई देशों ने इस मामले पर चीन को चेतावनी दी है। अमेरिका के पूर्व राजदूत और एक वरिष्ठ नेता पहले ही डोकलाम मुद्दे को चीन द्वारा शुरू किया गया विवाद बता चुके हैं।

मोदी और ट्रम्प

अमेरिका की और से आये इस बयान के बाद से ही चीन द्वारा युद्ध की धमकियाँ लगभग बंद हो गयी हैं। इसे भारत और मोदी सरकार की कूटनीति कहें या फिर अमेरिका का चीन की और कड़ा रुख, जमीनी हकीकत के अनुसार अमेरिका इस समय भारत का सबसे बड़ा सुरक्षा साथी माना जा रहा है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया अमेरिकी दौरे के बाद से ही उनकी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती के चर्चे दोनों देशों में हैं। जहाँ दोनों नेता आतंकवाद के खिलाफ मिलकर सामना करने का मन बना चुके हैं, वहीँ दोनों देशों के बीच कई आर्थिक एवं सुरक्षा सम्बंधित समझौते हाल ही में संपन्न हुए हैं। अमेरिका के सैन्य कमांडर पहले ही कह चुके हैं कि भारतीय सेना को आधुनिक बनाने के लिए अमेरिका उनकी पूरी तरह से मदद करेगा। हाल ही में अमेरिका ने भारत को अपाची हेलीकाप्टर देने का फैसला करके अपने बयान को सच साबित किया है। इसके अलावा पिछले महीने ही भारत और अमेरिका की सेना ने जापान के साथ मिलकर मालाबार युद्ध अभ्यास किया था। इन सब बातों से यह निष्कर्ष निकलना सही होगा कि रक्षा के मामले में अमेरिका भारत के साथ लम्बे समय तक भागीदारी बनकर रह सकता है, जो किसी ज़माने में रूस भारत के लिए हुआ करता था।

मोदी और अबे शिंजो

जापान ने हाल ही में चीन के खिलाफ बयान देकर अपना रुख साफ़ कर दिया है। जापान के इस कदम के पीछे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अन्य दक्षिणी देशों की तरह जापान भी चीन के लगातार विस्तार से परेशान था जो मुख्यतः दक्षिणी चीन सागर में देखा जा सकता है। जापानी प्रधानमंत्री शिंजो अबे और नरेंद्र मोदी की दोस्ती किसीसे छिपी नहीं है। जापानी प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत के दौरे का एलान कर अपना पक्ष साफ़ किया है। डोकलाम विवाद पर जापान की और से कहा गया था कि ‘डोकलाम को लेकर पिछले करीब दो महीनों से तनातनी जारी है। हमारा मानना है कि इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है, ऐसे में हम इस पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।’ इसके बाद कहा गया कि डोकलाम चीन और भूटान के बीच एक विवादित इलाक़ा है। भारत की इसमें दखल भूटान और भारत के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते का परिणाम है। जापान के इस बयान पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया की है। चीन ने जापान को चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत का साथ देते हुए भी जापान को चीन के खिलाफ बोलने से बचना चाहिए।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने भी अपना पक्ष साफ़ कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जुली बिशप ने हाल ही में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने चीन को चेताया था कि वह इस विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाए। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया चीन को उसके दक्षिणी चीन सागर पर बढ़ते दबदबे को लेकर चेतावनी दे चुका है।

नरेंद्र मोदी नेतन्याहू

इजराइल ने हालाँकि सीधे तरीके से डोकलाम विवाद पर कोई टिपण्णी नहीं की है पर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और नरेंद्र मोदी की दोस्ती की दास्ताँ तो सभी जानते हैं। नरेंद्र मोदी के इजराइल ऐतिहासिक दौरे के बाद से इसमें और मजबूती दिखाई पड़ रही है। जहाँ एक और दोनों नेताओं ने तकनीक, रक्षा, अर्थव्यवस्था आदि से सम्बंधित करीबन 2 अरब डॉलर के समझौते किये थे, वहीँ दोनों नेताओं ने मिलकर आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज उठायी थी। इन सब बातों से यह अनुमान लगाना ठीक होगा कि अगर भारत को युद्ध के मामले में कोई साथी की जरूरत होगी, तो इजराइल इसमें पीछे नहीं हटेगा।

इन सब देशों के अलावा यूरोप में जर्मनी, फ्रांस, इंग्लैंड समेत कई देशों से भारतीय कूटनीतिक रिश्ते मजबूत हैं। (पढ़िए: भारत फ्रांस सम्बन्ध) इसके बाद यह भी कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों का असर दिखना शुरू हो गया है। इसका असर चीन के साथ उठे इस सीमा विवाद पर साफ़ देखा जा सकता है। विवाद के शुरूआती दिनों में चीन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए तिब्बत में सैन्य अभ्यास समेत कई प्रतिक्रियाएं की। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह साफ़ तरीके पर देखा जा सकता है कि किस तरह चीन का रवैया बिलकुल बदल गया है।

हाल ही में डोकलाम में चीनी सेना के एक अधिकारी ने 100 मीटर पीछे हटने का फैसला किया था लेकिन जनता में रोष पैदा होने के डर से उन्होंने अपने इस फैसले को वापस ले लिया। इस सबके बाद चीन पूरी तरह से बौखला चुका है। यह इस बात से देखा जा सकता है कि चीन ने युद्ध की चेतावनी छोड़कर अब मीडिया के जरिये भारत पर हमले करना शुरू कर दिया है। हाल ही में चीनी मीडिया ने एक वीडियो जारी किया था जिसमे उन्होंने भारत पर व्यंग्य करते हुए डोकलाम विवाद पर भारत को नीचा दिखाने की कोशिश की थी।

चीन के इस कदम की हर तरफ आलोचना की गयी थी। इस मुद्दे पर हल यही हो सकता है कि चीन, भूटान और भारत शांति से बैठकर इसपर फैसला करें। अगर यह एक विवादित इलाका है तो चीन को इसमें रोड़ बनाने के फैसले से पीछे हटना चाहिए।

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पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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