Sat. Oct 1st, 2022
    मोदी ट्रम्प और शी चिनपिंग

    भारत और चीन के बीच सीमा पर शुरू हुआ विवाद अब राजनीति और व्यापारिक रिश्तों में भी असर दिखा रहा है। चीनी मीडिया की हालिया रिपोर्ट की मानें तो भारत और चीन के बढ़ते विवाद का एक कारण नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की दोस्ती बताई जा रही है। चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में लिखे एक लेख के मुताबिक डोकलाम विवाद नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात के बाद शुरू हुआ था। यह मात्र एक संयोग नहीं हो सकता है। इस लेख में यह भी लिखा गया था कि भारत चीन और अमेरिका के बीच टकरार का फायदा उठाना चाहता है एवं अमेरिका की सहायता से दक्षिणी एशिया में धाक जमाना चाहता है।

    मोदी और ट्रम्प

    अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में खटास तब आयी थी जब 2010 में ओबामा ने चीन को दक्षिण चीन सागर में सैन्य शक्ति बढ़ने पर चेताया था। चीन के अनुसार ओबामा सरकार एशिया में चीन के बढ़ते दबदबे से परेशान थी। ओबामा ने अपने भाषणों में चीन पर कई बार निशाना साधा था। इसके बाद चीन और अमेरिका के बीच दूरियां बढ़ गयी थी। अब ट्रम्प के आने से चीन को अमेरिका से रिश्तों में एक नए मोड़ की आशा थी। ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति अभियान के दौरान अपने भाषणों में कई बार चीन का जिक्र किया था। आकड़ों के मुताबिक ट्रम्प ने अपने भाषणों में 235 बार चीन का नाम लिया था। ट्रम्प अमेरिका की अर्थव्यवस्था और कूटनीति को मजबूत करने के लिए चीन का सहारा लेना चाहता था।

    चीन के अनुसार उत्तर कोरिया और दक्षिण चीन सागर के मुद्दों की वजह से ट्रम्प और चीन के बीच दूरियां आयी है। ट्रम्प चीन के प्रभाव को रोकना चाहते हैं। इसके लिए ट्रम्प दूसरे देशों की सहायता ले रहे हैं। चीनी अख़बार के मुताबिक चीन पर नज़र रखने के लिए ट्रम्प ने भारत, जापान, वियतनाम और ऑस्ट्रेलिया से रिश्ते मजबूत कर लिए हैं। चीन का दावा है कि डोकलाम में भारत और चीन के बीच बढ़ रहे तनाव का एक कारण ट्रम्प और मोदी की दोस्ती हो सकती है। चीन ने कहा है कि इस बात का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि मोदी के अमेरिका दौरे के तुरंत बाद डोकलाम का मुद्दा उठाया गया था। चीन के अनुसार भारत और चीन के बीच बनी हालिया दुरी निकटतम समय में खतम होती नहीं दिख रही है। चीन का दावा है कि डोकलाम का विवाद भले ही कुछ दिनों में सुलझ जाए पर इसका असर भारत और चीन के बीच बाकी रिश्तों में देखने को मिलेगा।

    इसके अलावा चीन ने एशिया में अपना दबदबा बनाने के लिए एशिया के अन्य देशों से रिश्ते सुधारना शुरू कर दिया है। चीन के मुताबिक उन्होंने पिछले कुछ समय में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और मालदीव आदि देशों से अपने रिश्तों को सुधारा है। पाकिस्तान के रिश्तों के मद्देनज़र चीन ने आर्थिक गलियारे का जिक्र किया है जो व्यापर के छेत्र में चीन और पाकिस्तान दोनों को मदद पहुंचाएगा। इसके अलावा चीन ने श्रीलंका के सबसे बड़े शहर कोलोंबो में अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है। श्रीलंका का सहारा लेकर चीन हिन्द महासागर में व्यापर के दृष्टिकोण से पकड़ बनाना चाहता है।

    चीन का व्यापर मार्ग

    चीन ने अपने लेख के जरिये भारत की मौजूदा सरकार पर भी सवाल उठाये हैं। चीन के अनुसार भारत के पास चीन से दोस्ती करने या मुक़ाबला करने का विकल्प था और भारत ने चीन का मुक़ाबला करने का फैसला किया है। इसके लिए चीन ने मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। चीन का दावा है कि सरकार के इस फैसले से भविष्य में चीन और भारत के बीच रिश्तों पर असर पड़ सकता है।

    By पंकज सिंह चौहान

    पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।