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    बीजेपी , गुजरात में केशुभाई पटेल

    गुजरात में मोदी एक ऐसा चेहरा है, जिसके कारण 2002 के बाद गुजरात की राजनीति को एक अलग पहचान मिलती आई है। लेकिन 2014 के आम चुनाव के बाद मोदी अपनी राजनीति को दिल्ली से निहार रहे है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने गुजरात को अपने राम लखन के हवाले कर दिया है। वैसे देखा जाये तो गुजरात की सियासत में विजय रुपाणी और नितिन पटेल मोदी के राम लखन माने जाते है। क्योकिं मोदी के बाद बीजेपी की बागडोर इन्ही दोनों नेताओ ने संभाली है। इन दोनो ने शपथग्रहण के एक दिन पहले गुजरात के पिछले मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल से आशीर्वाद लिया। हालाँकि 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने के बाद नरेंद्र मोदी ने भी केशुभाई पटेल को जाकर मिठाई खिलाई थी। लेकिन यह देखा जा रहा है कि मोदी के तर्ज पर रुपानी और पटेल का केशुभाई के पास जाना जरूर कोई सियासी मायने को संकेत दे रहा है।

    बता दे कि 22 सालो में ऐसा पहली बार हुआ है कि गुजरात में बीजेपी को 100 से कम सीटें मिली है। गुजरात में विधानसभा की कुल 182 सीटें है जिसमे भाजपा को केवल 99 सीटों पर ही संतुष्टि करनी पड़ी है। इसके पहले आज तक बीजेपी को गुजरात में 100 सीटों से कम आयी ही नहीं, लेकिन इस बार सौराष्ट्र में बीजेपी को झटका लगा है। वहां की कुल 54 सीटों में 25 पर भाजपा कायम रही है और 29 पर कांग्रेस ने बाजी मारी है।

    सौराष्ट्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार गुजरात विधानसभा में बीजेपी को इसी क्षेत्र में जबरदस्त झटका लगा है। परिणाम आने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ हो। लेकिन जब बीजेपी गुजरात की सत्ता में पहली बार आई थी तो सौराष्ट्र से बीजेपी ने 44 सीटें अपने खातें में अर्जित किये थे। 1995 के बाद सौराष्ट्र गुजरात में बीजेपी का गढ़ माने जाने लगा। सौराष्ट्र में बीजेपी की पहचान को बनाये रखने में केशुभाई पटेल का बड़ा योगदान रहा है। केशुभाई के राजनीति विचार और समझ बुझ के चलते 1995 से लेकर 2012 तक यह क्षेत्र बीजेपी का गढ़ रहा है। लेकिन 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र को कांग्रेस ने अपने नाम कर लिया है। कांग्रेस ने सौराष्ट्र में 54 में 29 सीटें जीतने के बाद बीजेपी गढ़ को भेदने में सफल हुई है।

    गुजरात चुनाव में सौराष्ट्र में बीजेपी की सीटों में कमी आना पार्टी की चिंता का सबब बन गया है। ऐसे गुजरात में बीजेपी के वर्तमान दिग्गज माने जाने वाले विजय रुपानी और नितिन पटेल ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के दर पर दस्तक दी है। इस बार विजय रुपानी सौराष्ट्र के राजकोट से विधायक चुने गए है। कहा जा रहा कि जिस क्षेत्र से गुजरात के मुख्यमंत्री उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे है, वहा पार्टी कम सीटें ला रही है तो लाजमी है कि यह चिंता का विषय है। सौराष्ट्र में आये बीजेपी के खाते में कम सीटों को लेकर चिंता करना इसलिए जायज है कि रुपानी’ नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री के सिहासन पर दोबारा विराजमान होने जा रहे है।

    वहीं बीजेपी गुजरात में सौराष्ट्र के जनाधार को केशुभाई पटेल के जरिये फिर से वापस लाना चाहती है। दोनों के केशुभाई से मुलाकात इसी सन्दर्भ में निकाली जा रही है। लेकिन अगर देखा जाए तो विजय रुपानी ने अपने नामांकन के पहले भी केशुभाई पटेल से मुलाकात की थी। इसके पीछे सीधे तौर पर सौराष्ट्र के बिगड़े सियासी समीकरण को सुधारने की मंशा देखी जा रही है। क्योंकि 18 महीने के बाद लोकसभा का चुनाव है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का यह कदम पटेलों की नाराजगी को दूर करने के लिए भी समझा जा रहा है।