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नोटबंदी के फायदों और नुकसान का गणित

नोटबंदी के फायदों और नुकसान का गणित
आरबीआई की रिपोर्ट आयी है जिसमे आरबीआई ने बताया है कि 8 नवम्बर 2016 के बाद रिजर्व बैंक में कूल 99% नोट पुनः जमा हो गए है।

हाल ही में आरबीआई की रिपोर्ट आयी है जिसमे आरबीआई ने नोटबंदी के बाद बैंक में आये 500 और 1000 के नोट को लेकर एक आंकड़ा प्रस्तुत किया है। जिसमे बताया है कि 8 नवम्बर 2016 के बाद रिजर्व बैंक में कूल 99% नोट पुनः जमा हो गए है। नोटबंदी के लगभग 10 महीनो बाद नोटबंदी से हुए नुकसान को और फायदे को अलग अलग रूप में देखा जायेगा। विपक्ष ने सरकार पर नोटबंदी को लेकर कई आरोप प्रत्यारोप लगाए है, सरकार ने भी अपने इस फैसले का हर मौके पर बचाव किया है।

नोटबंदी के फायदे

  • नोटबंदी के बाद होम लोन सस्ते हुए है नोटबंदी के द्वारा बंको में काफी मात्रा में कैश डिपाजिट हुआ है। जिससे बैंको ने आवासीय लोन सस्ता किया है। नोटबंदी से पहले आवासीय लोन की दरें 10 से 13 फीसदी थी वो नोटबंदी के बाद 7 से 9 फीसदी हो गई है।
  • नोटबंदी ने महंगाई पर कुछ लगाम लगाई है जहां नवम्बर 2016 में महंगाई दर 3.63 थी वहीं जुलाई 2017 में महंगाई दर 2.38 थी।
  • नोटबंदी के कारण ऑनलाइन ट्रांसक्शन बढ़ा है। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक जहां नवम्बर 2017 में कैशलेस ट्रांसक्शन 67.2 करोड़ था, वहीं फरवरी 2017 में 76.3 करोड़ पहुंच गया।

नोटबंदी के नुकसान

  • नोटबंदी को करीब 10 महीने हो गए है, परन्तु आज भी इसका थोड़ा बहुत असर बचा हुआ है। आज भी एटीएम से 2000 और 500 के नोट निकल रहे है। जिससे लोगों को छोटे-मोटे लेनदेन में व्यवहारिक दिक्कत आ रही है।
  • नोटबंदी के बाद बैंको ने बचत खाते की दर घटा दी है। बैंको में कैश लिक्विडिटी बढ़ने से बैंको ने बचत खातों की ब्याज दर घटा दी थी। रहत की बात ये है कि बैंक ज्यादा समय तक ब्याज दर काम नहीं रखेंगे।
  • नोटबंदी से छोटे उद्योगों को नुकसान हुआ है, जो छोटे उद्योग थे उनमें लेनदेन कैश से होता था कैश की कमी से लेनदेन रुक गया। कारोबार बंद हो गए जिसके चलते लोगों की नौकरियां चली गयी।

 

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