Thu. Feb 9th, 2023
    सुशील मोदी और तेजस्वी यादव के बीच ट्वीट वॉर

    बिहार में भले ही लालू जेल में है लेकिन उनको लेकर राजनीति उतनी ही गर्म है जितनी उनके बाहर रहने पर होती थी। लालू के ना होने पर अब पार्टी की कमान उनके बेटे तेजस्वी यादव ने संभाल ली है।

    अपने पिता को बचाने के लिए तेजस्वी हर मुमकिन कोशिश कर रहे है उन्होंने यह ऐलान किया है कि आने वाले समय में एक भरी जान आंदोलन के तहत लालू के लिए समर्थन जुटाया जाएगा और जेडीयू की सत्ता को खत्म किया जाएगा।

    आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने इस मामले में जेडीयू पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बयां दिया है कि “कोर्ट के साथ जेडीयू मिल चुकी है और सीबीआई, ईडी और तमाम जांच संस्थानें क्या करने वाली होती है यह भी इन पार्टियों को पता होता है। पार्टी पहले ही यह भविष्यवाणी कर देती है कि लालू के परिवार के साथ क्या घटित होने वाला है”

    तेजस्वी ने इस मुद्दे पर सुशिल मोदी और नीतीश कुमार को घेरते हुए कई ट्वीट किए है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने विपक्षीयों की तुलना कंस से की है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि “कंस को लग रहा है कि जेल में बंद कर खतरा खत्म हो गया। उन्हें पता नहीं कि काल तो अब जन्म लेगा।” 

    तेजस्वी यहीं नहीं रुके उन्होंने अपने एक और ट्वीट में यह भी कह दिया कि “अगर लालू जी बीजेपी से हाथ मिला लेते तो वो आज हिंदुस्तान के राजा हरीशचंद्र होते, तथाकथित चारा घोटाला दो मिनट में भाईचारा घोटाला हो जाता अगर लालू जी का डीएनए बदल जाता।”

    ट्वीट पर मिला सुशिल का जवाब

    तेजस्वी के ट्वीट पर आज सुशिल मोदी ने करारा जवाब दिया है। उन्होंने लालू समेत उनके परिवार पर बयानी हमला करते हुए कहा है कि “भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सगे मामा कंस के अत्याचार को भी बर्दाश्त नहीं किया था और कौरवों के अन्याय के विरुद्ध युद्ध में न्याय का साथ दिया था। आज खुद को कृष्ण का वंशज बताने वाले कुछ लोग कंस की राह पर चल रहे हैं और न्याय के बजाय नाते-रिश्ते देख कर भ्रष्टाचार की तरफदारी कर रहे हैं..

    सुशिल ने शरद यादव को भी लपेटे में लिया है शरद पर वार करते हुए उन्होंने कहा है कि “शरद यादव ने लालू परिवार का साथ देने के लिए अपने उस दल से विश्वासघात किया, जिसने चारा घोटाला से लेकर अलकतरा घोटाला तक भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले कुशासन के खिलाफ लंबा संघर्ष किया था। पार्टी लाइन से असहमति के बाद स्वयं राज्यसभा की सदस्यता छोड़ने के बजाय उन्होंने सभापति…”