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डोकलाम विवाद : चीन का भारतीय धार्मिक एकता पर हमला

भारत-चीन सीमा विवाद
चीन के मुताबिक भारत की विविधता ही इसमें फूट का कारण बन सकती है, जैसा 1947 में हुआ था।

डोकलाम में चल रहे भारत और चीन के बीच तनाव पर चीन ने अब नया दांव खेला है। चीन अब भारत को धर्म के नाम पर तोड़ने का विचार बना रहा है।

चीनी सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख के मुताबिक भारत पूर्ण रूप से एक हिन्दू राष्ट्र है। चीन के मुताबिक भारत की विविधता ही इसमें फूट का कारण बन सकती है, जैसा 1947 में हुआ था। दरअसल चीन का मानना है कि भारत चीन से तिब्बत की आज़ादी का समर्थन करता आ रहा है। ऐसे में चीन को भी भारत के किसी ऐसे बिंदु को पकड़ना होगा, जिससे भारत में फूट डाली जा सके।

इसके लिए चीन ने सबसे पहले जिस मुद्दे को उठाया है, वह है भारत की धार्मिक विविधता। चीन ने कहा कि भारत वैसे तो विश्व स्तर पर अपने आप को धर्म निरपेक्ष देश बताता है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। चीन का मानना है कि भारत में अल्पसंख्यक वर्गों को सामान अधिकार नहीं मिल रहे हैं और देश एक पूर्ण हिन्दू राष्ट्र की तरफ बढ़ रहा है।

चीन ने कहा कि हम भारत के इतिहास से इसके बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं। अंग्रेजों के काल से ही मुस्लिम समुदाय को दबाना शुरू हो गया था और हिन्दू समुदाय फैलने लगा था। चीन का मानना है कि इसी कारण 1947 में भारत का विभाजन हुआ था। चीन का दावा है कि इस तर्ज पर वह भारत के खिलाफ अलगाववादियों को भड़काकर इसकी एकता को तोड़ सकता है।

भारत को हिन्दू राष्ट्र बताते हुए चीन ने कहा है कि अगर आप भारत का दौरा करेंगे तो आप जानेंगे कि किस तरह भारत में हर चीज़ पर हिंदुत्व का प्रभाव है। इसके मुताबिक सीमा पर दोनों देशों के बीच का विवाद भी हिंदुत्व का ही परिणाम है। हिंदुत्व का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत की 80 फीसदी जनसँख्या हिन्दू है और भारत अपने आप को धर्म निरपेक्ष देश बताता है।

About the author

पंकज सिंह चौहान

पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

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