शुक्रवार, दिसम्बर 13, 2019

जन्मदिन विशेष : अटल बिहारी वाजपेयी जी के कुछ यादगार पल..

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पूर्व प्रधानमन्त्री अटल विहारी वाजपेयी का आज 93वा जन्मदिन है। अटल विहारी वाजपेयी राजनीती से संन्यास ले चुके है। पिछले काफी समय से वह बीमार है, लेकिन उनके चाहने वालो में आज के दौर में भी कमी नहीं आई है। बहु प्रतिभावान राजनीतिज्ञ अटल विहारी वाजपेयी भारतीय राजनीती में 50 वर्ष तक सक्रिय रहे है। अपने राजनैतिक सफर में वाजपेयी जी बहुत आदर्शवादी और प्रशंसनीय राजनेता के तौर पर रहे है। उनके जैसा नेता होना हर भारतीय के लिए गर्व की बात होगी। उनके बहुत से कार्यों के कारण देश आज इस मुकाम पर है।

अटल जी अपने राजनैतिक कार्यकाल में 5 दशक से संसद में रहे। वह एक ऐसे नेता है जिन्हे 4 अलग अलग प्रदेशो से जनता ने सांसद के रूप में चुना है। इन्होने अपनी राजनीती की शुरुआत भारत की आजादी से पहले की थी। अटल जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी है एवं एक अच्छे कवि है। उन्होंने अपनी कविता और व्यंगो से राजनीतिक पार्टियों को आश्चर्य में डाल दिया था। उन्हें अपनी मातृभाषा से बहुत प्रेम था, वह इकलौते इंसान है जिन्होंने युएन जनरल एसेम्बली में पहली बार हिंदी में भाषण दिया था। अटल जी पहली बार मात्र 13 दिन के लिए प्रधानमन्त्री बने थे, दूसरी बार उन्हें 1 साल तक प्रधानमन्त्री बनने का मौका मिला। जब अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमन्त्री बने तो इनका कार्यकाल पूरा 5 साल तक रहा और यह अब तक की भारतीय राजनीती का सबसे सफल कार्यकाल रहा।

अटल विहारी की जीवनी
पूरा नाम      अटल बिहारी वाजपेयी
जन्मतिथि      25 दिसम्बर
जन्मस्थान     ग्वालियर,मध्यप्रदेश
माता पिता    कृष्णा देवी, कृष्णा बिहारी वाजपेयी
विवाह          नहीं हुआ
राजनैतिक पार्टी   भारतीय जनता पार्टी

अवार्ड          1992 पद्मभूष
1994 लोकमान्य तिलक पुरष्कार
1994 बेस्ट सांसद पुरष्कार
1994 पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरष्कार
2014 भारत रत्न

अटल बिहारी वाजपेयी एक मध्यम वर्गीय परिवार से है। उनके पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी एक स्कूल में पढ़ाते थे, वह शिक्षक के साथ साथ एक अच्छे कवि भी थे। अटल जी सात भाई बहन थे, उन्होंने अपनी स्कूलिंग करने के बाद लक्ष्मीबाई कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने कानपूर डीएवी कॉलेज से इक्नोमिक्स मैं पोस्ट ग्रेजुएट किया। इसके बाद उन्होंने लॉ करने की सोची लेकिन उनका मन पढाई में नहीं लगा। उसके बाद वह आरएसएस द्वारा पब्लिश मैगजीन में एडिटर का काम करने लगे। अटल जी राजनीतिज्ञ, कवि के साथ साथ एक अच्छे पत्रकार भी थे। उन्हें एक सच्चे देश भक्त के तौर पर जाना जाता है।

अटल बिहारी की राजनैतिक शुरुआत
अटल जी का राजनैतिक सफर स्वतंत्र संग्रामी के तौर पर शुरू हुआ। 1942 में भारत छोडो आंदोलन में उन्होंने ने भी भाग लिया और बाकी नेताओ की तरह वह भी जेल गए। जेल के दौरान उनकी मुलाकात जनसंघ लीडर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी से बहुत कम समय में राजनीति के दाव पेंच सिख लियें। लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तबियत बिगड़ने लगी और कुछ ही दिन बाद मुखर्जी की मौत हो गई। इसके बाद अटल जी ने भारतीय जनसंघ की बागडोर संभाल ली और इसका विस्तार पुरे देश में किया।

अटल जी सिधान्तो की राजनीति पर अडिग
अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति को एक अलग नजरिये से देखा। उन्होंने राजनीति को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हट कर अपनाया। जीवन में आने वाली हर विषम परिस्थितियों का उन्होंने डटकर सामना किया। उन्होंने अपने राजनीति जीवन के उतार चढ़ाव से अपने आपको कभी टूटने नहीं दिया और एक कुशल व्यक्ति की तरह खड़े रहे। राजनीति में धुर विरोधी भी उनकी विचारधारा और कार्यशैली के कायल रहे। अपने प्रधानमन्त्री कार्यकाल में पोखरण परमाणु परिक्षण कर दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के साथ मिलकर दूसरे देशो को भारत की शक्ति का अहसास कराया। जनसंघ के संस्थापकों में से अटल बिहारी की पहचान राजनीति मूल्यों में बाद में हुई और उन्हें बीजेपी सरकार में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उनके विचारो का विपक्ष भी कायल
अटल बिहारी वाजपेयी अपने पुरे राजनीति काल में कभी आक्रामक रूप में अपनी व्यवहारिकता से पेश नहीं आये। उन्होंने अपने राजनीति दौर में वैचारिकता को तवज्जो दी। वह मानते थे कि राजनीति उनके मन का पहला विषय नहीं था। कभी कभी उन्हें इस राजनीति से तृष्णा होती थी, लेकिन चाहकर भी वे इसे दरकिनार नहीं कर सकते थे, क्योकि विपक्ष उनपर पलायन का मोहर लगा देता। अटल जी अपने राजनैतिक दायित्वों का जमकर मुकाबला करना चाहते थे। यह उनके जीवन संघर्ष की खूबी भी रही है। अटल बिहारी वाजपेयी अपने पिता की तरह एक कवि बनना चाहते थे लेकिन उनकी शुरुआत पत्रकारिता से हुई। पत्रकारिता के कारण ही उनके राजनीति जीवन की आधारशिला बनी। उन्हें अपने मातृभाषा से बहुत लगाव था, संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधत्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले अटल जी भारत के पहले राजनेता थे। हिंदी भाषा को विदेश की धरती पर सम्मानित करने का कार्य सबसे पहले अटल जी ने ही किया था। उन्होंने पहली बार 1955 में चुनाव लड़ा लेकिन उस चुनाव में उन्हें शिकस्त हाथ लगी। लेकिन 1957 में उन्हें गोंडा के बळीरामपुर से टिकट मिला और उस चुनाव में वे जीत गए। 1957 में वह पहली बार लोकसभा सदस्य बनकर संसद में गए थे। उन्होंने इंदिरा गांधी के कुछ कार्यों की तब सराहना की थी, जब संघ उनकी विचारधारा का विरोध कर रहा था। संसद में इंदिरा गांधी को दुर्गा की उपाधि उन्हीं की तरफ से दी गई। उन्होंने इंदिरा सरकार की तरफ से 1975 में लादे गए आपातकाल का विरोध किया। लेकिन बांग्लादेश के निर्माण में इंदिरा गांधी की भूमिका को उन्होंने सराहा था।

अटल जी के द्वारा किये गए कुछ मुख्य बड़े कार्य
सत्ता में आने के एक महीने बाद अटल जी और उनकी सरकार ने राजस्थान के पोखरण में 5 अंडरग्राउंड न्यूक्लियर का सफर परिक्षण करवाया था। जिससे देश और विदेश में भारत की शक्ति का डंका बज गया था।

अटल जी द्वारा शुरू किये गए नेशनल हाईवे डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट और प्रधानमन्त्री ग्राम सड़क योजना उनके दिल के बहुत करीब रहा। वे इसका कार्य खुद देखते थे। NHDP के द्वारा उन्होंने देश के चार सबसे बड़े शहरो दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई को जोड़ने का कार्य किया था। PMGSY के द्वारा पुरे देश को अच्छी सड़के मिली जो कि छोटे छोटे गावो को शहरो से जोड़ने लगी।
कारगिल युद्ध और आतंकवादी हमले के दौरान अटल जी के लिए गए निर्णय की बदौलत उनकी लीडरशिप और उनकी कूटनीति उभर कर सामने आई।

अटल जी को संगीत से भी बहुत लगाव है। उनके पसंदिता गायक लता मंगेशकर, मुकेश और मोहम्मद रफ़ी थे। उन्होंने आजीवन शादी ना करने की प्रतिज्ञा ली थी जिसपर वह कायम रहे। उनके शादी ना करने का सबसे बड़ा कारण था उनकी गोद ली हुई दो लड़किया, नमिता और नंदिता। अटल जी का जीवन एक साधारण व्यक्ति की तरह रहा है। वह अपने गोद ली हुई बच्चियों के बहुत ही करीब है। वह अपने सभी रिश्तेदारों से बेहद लगाव रखते है। आज वह 93 बर्ष के हो गए है और वह बहुत सी बिमारियों से पीड़ित है। भारतीय जनता पार्टी के लिए अटल बिहारी वाजपेयी एक पिता और संरक्षण के रूप में है। आज के दौर में भी देश का हर व्यक्ति अटल जी को सम्मान के नजरिए से देखता है। वही दूसरी पार्टी के सदस्य भी अटल जी को प्रेरणा स्रोत मानते है।

अटल बिहारी वाजपेयी देश के सम्मानीय पुरुषों में से एक है, जिन्होंने अपनी जिंदगी का हर पल देश के हित के लिए न्यौछावर कर दिया।

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