सोमवार, फ़रवरी 24, 2020

चीन की बेल्ट एंड रोड योजना का मुकाबला करने में जापान सक्षम

Must Read

आयुष्मान खुराना: “मैं एक प्रशिक्षित गायक हूं क्योंकि मैं एक ट्रेन में गाता था”

आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपने बॉलीवुड डेब्यू के लिए सही प्रोजेक्ट लेने के...

जाफराबाद में एंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम किया, DMRC ने मेट्रो स्टेशन को किया बंद

केंद्र की ओर से जारी नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) को रद्द करने की मांग करते हुए 500 से अधिक...

‘हैदराबाद में शाहीन बाग जैसे विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी’: पुलिस आयुक्त

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार ने शनिवार को कहा कि शहर में "शाहीन बाग़ जैसा" विरोध प्रदर्शन की...

चीन अपनी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट और रोड इनिशिएटिव के तहत कई देशों को अपने अधीन लेने की फिराक में है। श्रीलंका, पाकिस्तान के बाद अब अफगानिस्तान को भी चीन अपने इस प्रोजेक्ट मे ले रहा है। भारत चीन के इस प्रोजेक्ट में हिस्सा लेने से इंकार कर चुका है। चीन का असली मकसद इस प्रोजेक्ट के जरिए अन्य छोटे देशों को कर्ज में डूबाकर उनको अपने अधीन लेना है।

इसका उदाहरण श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह से देखने को मिलता है। कर्ज नहीं चुकाने की वजह से श्रीलंका को अपना महत्वपूर्ण बंदरगाह चीन को देना पड़ा था। चीन अपनी परियोजना को दुनिया की सबसे बडी परियोजना बता रहा है जिसके जरिए वो अपने आर्थिक हितों की पूर्ति करना चाहता है।

चीन के इस प्रोजेक्ट को टक्कर देने के लिए जापान पूरी तरह से तैयार है। चीन के बेल्ट और रोड इनिशिएटिव का मुकाबला करने का नेतृत्व जापान के प्रोजेक्ट ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप भी कर सकता है। चीन के प्रोजेक्ट को जापान का यह कदम टक्कर देता है।

जापान अन्य देशों, विशेष रूप से भारत के साथ तेजी से जुड़ रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन को चुनौती देने के लिए जापान भारत के नजदीक आ रहा है। दोनों देशों के बीच में मजबूत संबंध है। चीन के दुश्मन देश भारत, अमेरिका व जापान ही मुख्य रूप से है।

15 वर्षों में पहली बार, जापान के विदेश मंत्री ने श्रीलंका जैसे छोटे देश का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने व निवेश समझौतों पर चर्चा हुई। जापान का ये कदम चीन की श्रीलंका के प्रति बढ़ती नजदीकी को दूर करने के लिए मान जा रहा है। दरअसल पाकिस्तान के बाद चीन की नजर श्रीलंका को कर्ज में डूबाने की है।

चीन जापान

चीन के तेजी से बढ़ते प्रभाव और सैन्य पहुंच से चिंतित जापान का दौरा काफी अहम माना गया। जापानी विदेश मंत्री तारो कोनो ने श्रीलंका के दूसरे बंदरगाह कोलंबो पर प्राकृतिक गैस आयात टर्मिनल बनाने में मदद करने की योजना की घोषणा कर चीन को रणनीतिक नुकसान दिया। एशिया और यूरोप में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए चीन की भव्य योजनाओं के खिलाफ जापान, अमेरिका व भारत मिलकर काम कर रहे है।

चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए जापान अन्य देशों और विशेष रूप से भारत के साथ तेजी से जुड़ रहा है, जिसमें 200 अरब डॉलर की बुनियादी ढांचे की योजना है। हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य प्रयासों को भी बढ़ाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के फ्रेंच संस्थान के जापान विशेषज्ञ ने कहा है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के पास चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशियटिव प्रोजेक्ट का विकल्प मौजूद है।

अमेरिका ने किया था खुद को टीपीपी से अलग

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही अमेरिका व जापान प्रमुख साथी दोस्त रहे है। व्यापारिक क्षेत्रों में दोनों ही देशों ने साथ में काम किया है। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जापान के ट्रांस-प्रशांत पार्टनरशिप (टीपीपी) व्यापार समझौता से अमेरिका को अलग कर लिया था। 2016 में, शिंजो आबे ने एशिया के लिए एक विकास और सुरक्षा योजना की शुरूआत की थी जिसे चीन के प्रोजेक्ट के विकल्प के रूप में देखा गया।

अमेरिका के बाद अब भारत व जापान मिलकर चीन का मुकाबला कर रहे है। दोनों देश श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार और हिंद महासागर द्वीपों में बिजली संयंत्र, रेलवे और बंदरगाह की सुविधा विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रहे है।

पूर्वी एशिया के साथ ही अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में आर्थिक संबंधों को मजबूत किया जा रहा है। भारत व जापान दोनो ही देश चीन के प्रोजेक्ट का विकल्प निकालना चाहते है।

वन बेल्ट वन रोड

जापान की नेतृत्व वाली योजना में एशियाई देशों के विकास के लिए जापान इंफ्रास्ट्रक्चर इनिशिएटिव और एशियाई विकास बैंक सहित बहुबिलियन-डॉलर के प्रयासों को विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में जापान बडी मात्रा मे निवेश करना चाहता है।

चीन को टक्कर दे रहा जापान

जापान अपने आर्थिक प्रभाव का विस्तार करने के लिए मध्य और पूर्वी यूरोप जैसे स्थानों में ध्यान दे रहा है। जापान एशिया में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है, और यह प्रतियोगिता अन्य क्षेत्रों में विस्तार कर रही है।

यह नहीं कहा जा सकता है कि जापान अपनी योजनाओं से चीन की योजना को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। चीन सीपीईसी के जरिए पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है।

एक पाकिस्तानी विशेषज्ञ के अनुसार चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशियटिव का भारत व जापान मुकाबला करना चाहते है लेकिन वे जल्द ही या बाद में शामिल होने का विकल्प भी सोच सकते है।

इनके मुताबिक जापानी विदेश मंत्री ने भी सीपीईसी में रूचि व्यक्त की है। वहीं जापान के बड़ व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जापान सीपीईसी का विरोध नहीं करता है।

- Advertisement -
- Advertisement -

Latest News

आयुष्मान खुराना: “मैं एक प्रशिक्षित गायक हूं क्योंकि मैं एक ट्रेन में गाता था”

आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपने बॉलीवुड डेब्यू के लिए सही प्रोजेक्ट लेने के...

जाफराबाद में एंटी-सीएए प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम किया, DMRC ने मेट्रो स्टेशन को किया बंद

केंद्र की ओर से जारी नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) को रद्द करने की मांग करते हुए 500 से अधिक लोगों, ज्यादातर महिलाओं ने शनिवार...

‘हैदराबाद में शाहीन बाग जैसे विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी’: पुलिस आयुक्त

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अंजनी कुमार ने शनिवार को कहा कि शहर में "शाहीन बाग़ जैसा" विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका...

निर्भया मामला: आरोपी विनय नें खुद को चोट पहुंचाने की की कोशिश, इलाज के लिए माँगा समय

2012 में दिल्ली में हुए निर्भया मामले (Nirbhaya Case) में चार आरोपियों में से एक विनय नें आज जेल की दिवार से खुद को...

गुजरात सीएम विजय रूपानी ने डोनाल्ड ट्रम्प-मोदी रोड शो की तैयारी की की समीक्षा

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी (Vijay Rupani) ने गुरुवार को अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi)...
- Advertisement -

More Articles Like This

- Advertisement -