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ज्वेलर्स को राहत, गोल्ड सेविंग स्कीम के लिए जीएसटी नियम में बदलाव

गोल्ड सेविंग स्कीम में राहत
सरकार ने गोल्ड सेविंग स्कीम के तहत आने वाले कस्मर्स को राहत दी है, अब तीन फीसदी जीएसटी अंत में जमा करनी होगी।

यदि आप भी ज्वेलर्स के यहां से गोल्ड सेविंग्स स्कीम के तहत हर माह निवेश कर रहें हैं तो यह आपके लिए बड़ी खबर हो सकती है। अब गोल्ड सेविंग्स स्कीम के तहत आप को हर महीने जीएसटी नहीं देना होगा। ज्वैलर्स ने जीएसटी काउंसिल के इस फैसले का स्वागत किया है कि अब ग्राहकों को हर महीने किश्त जमा करने के बजाय गोल्ड सेविंग स्कीम बंद करते समय या फिर स्कीम पूरी होने के बाद ही 3 फीसदी जीएसटी ​राशि का भुगतान करना होगा।

ऑल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष नितिन खंडेलवाल ने ईटी को बताया कि प्रत्येक जौहरी को छोटे शहरों तथा ग्रामीण ग्राहकों को समझाने में उस वक्त मुश्किलों का सामना करना पड़ता था जब उनसे तीन फीसदी जीएसटी के तहत अग्रिम राशि जमा कराई जाती थी। उन्होंने कहा कि हम सभी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार से सिफारिश की थी।

खंडलेवाल का कहना है कि, जीएसटी काउंसिल के अनुसार अब 3 फीसदी जीएसटी तभी लगेगा जब फाइनल बिल बनेगा।  आप को जानकारी के लिए बता दें कि गोल्ड सेविंग स्कीम के तहत ज्वेलर्स अपने कस्टमर्स से 11 महीने तक हर माह किश्त के जरिए पैसा जमा कराता है और 12वें महीने की किश्त जौहरी खुद भरता है, अंत में जब ग्राहक गहनों की खरीदारी करता तो यह स्कीम भुना ली जाती है।

जीएसटी नियम के मुताबिक 11 महीने की किश्तों को अग्रिम प्राप्त रकम माना गया है, जिस पर जीएसटी पेमेंट किया जाता था। चार्टर्ड एकाउंटेंट भाविन मेहता ने कहा कि 6 अक्टूबर को हुई पिछली जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार ने उन पंजीकृत व्यक्तियों के लिए राहत की घोषणा की थी, जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में 1.5 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। मेहता ने कहा कि अब यह सीमा सभी वर्गों के पंजीकृत व्यक्तियों के लिए बढ़ा दी गई है।

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