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उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव : मुरादाबाद में भाजपा के लिए चुनौती बने क्षेत्रीय दल

मुरादाबाद में 2 लाख के करीब की आबादी अनुसूचित जाति की है है। अगर इसमें विभाजन हो गया तो भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। बहुजन समाजवादी पार्टी के आ जाने से इन वोटरों का ध्रुवीकरण होना निश्चित है। अब देखना यह है कि बीजेपी मुरादाबाद में निकाय चुनावों में कैसे पार पाती है।

उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के मद्देनजर सूबे की सियासत गरमाई हुई है। प्रथम और द्वितीय चरण के चुनाव समाप्त हो चुके हैं। निकाय चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है और चुनाव प्रचार में जी-जान से जुट गए हैं। इन चुनावों में राष्ट्रीय पार्टियां भी कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। उत्तर प्रदेश के सत्ताधारी दल भाजपा ने तो प्रदेश के मुख्यमंत्री को ही अपना स्टार प्रचारक बनाकर मैदान में उतार दिया है। इस वजह से मुख्यमंत्री योगी को एक दिन में कई जनसभाओं को सम्बोधित करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री योगी के साथ उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य और दिनेश शर्मा भी अलग-अलग क्षेत्रों में रैलियों को सम्बोधित कर रहे है। इसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है कि मुख्यमंत्री ने सूबे के निकाय चुनावों में इतनी शिरकत की हो। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी काफी सक्रिय दिख रहे है। आपको बता दें कि मुरादाबाद में तीसरे और अंतिम चरण में चुनाव है जो 29 नंवबर को होने है। इसके लिए भाजपा समेत सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। 26 नंवबर को योगी की सभा के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी सभा को सम्बोधित किया। वहीं कांग्रेस नेता राजबब्बर भी अपने उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो करते नजर आए। इन सब के बीच बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती भी अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ अपने प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रही है।

मुरादाबाद के वर्तमान मेयर विनोद अग्रवाल है जो बीजेपी के नेता है। 2012 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद में बहुमत से जीत हासिल की थी। भाजपा मुरादाबाद में जीत के उसी मापदंड को फिर से दोहराना चाहती है। मुरादाबाद में पार्टी के मेयर प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने प्रत्याशियों को जिताने का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र और प्रदेश में अपनी सरकार है, अगर लाभ उठाना चाहते हो तो प्रत्याशियों को वोट देकर जिताओ। विजय शंखनाद रैली में उन्होंने कहा कि 15 सालों में नगरीय जीवन बर्बाद किया गया। पिछली सरकार के कार्यकाल में भाजपा के जितने भी महापौर थे उनको काम नहीं करने दिया गया। नगर विकास उल्टी खोपड़ी के पास था और सूबे में कोई कानून व्यवस्था नहीं थी। पिछली सरकार में भैंसे सर्वोपरि थी इसलिए हम नई सुबह की नई उम्मीद लेकर आए है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारें विकास को गति दे रही है। पांडेय ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि जब से भाजपा की सरकार केंद्र में स्थापित हुई है तब से उम्मीद की एक नई किरण दिख रही है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि जब से प्रदेश में योगी मुख्यमंत्री बने है तब से फैसले दनादन लिए जा रहे है। उन्होंने योगी और मोदी को कर्मयोगी कहा और लोगों से अनुरोध किया कि वो पार्टी को वोट दें ताकि विकास की जीत हो। वैसे देखा जाए तो मुरादाबाद में भाजपा पहले से ही काबिज होकर बैठी है। आपको बता दें कि यहाँ से लोकसभा सदस्य कुँवर सर्वेश कुमार सिंह है जो बीजेपी नेता है। वहीं मुरादाबाद शहरी क्षेत्र से विधानसभा सीट से रितेश कुमार गुप्ता ने समाजवादी के मोहम्मद युसूफ अंसारी को पराजित किया था। मेयर की कुर्सी पर पहले से ही भाजपा ने अपनी पकड़ बनाई हुई है।

भाजपा और समाजवादी पार्टी में मूंछ की लड़ाई

निकाय में माननीयों की मूंछ की लड़ाई शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी और भाजपा अपने चहेतों को जिताने की पूरी जोर आजमाइश कर रहे है। भाजपा ने सांसदों, विधायकों की सिफारिश पर निकाय चुनाव के टिकट बाँटे है। फिलहाल दोनों दलों के नेता अपने अपने चहेतों को जिताने के लिए मतदाताओं से संपर्क करने की कोशिशों में लगे है।

मुरादाबाद निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस, बसपा खामोश

एक ओर मुरादाबाद निकाय चुनाव भाजपा और सपा के लिए मूंछ की लड़ाई बनता जा रहा है वहीं अन्य दलों के तेवर यहाँ ढीले से दिख रहे है। कांग्रेस और बहुजन समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक ऐसा कुछ भी सुनने को नहीं मिला है कि किसी नेता ने नेता ने अपने चहेतों के लिए सिफारिश की हो।

हालाँकि देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार निकाय चुनाव लड़ने जा रही बहुजन समाजवादी पार्टी को भले ही अभी तक मेयर प्रत्याशी ना मिला हो लेकिन उसने पंचायतों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सपा और भाजपा से बढ़त बना ली है। बसपा ने जिले के पाँचों नगर पंचायतो में अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। बसपा ने अपने चुनावी प्रचार पर जोर देना शुरू कर दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जनता से अपने प्रत्याशियों के पक्ष में वोट देने की अपील कर रही है।

वैसे आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी के अलावा अभी किसी पार्टी ने मुरादाबाद में मेयर प्रत्याशी की घोषणा नहीं है। सपा ने विधायक प्रत्याशी मोहम्मद युसूफ अंसारी को मेयर पद की दावेदारी सौंपी है। सपा ने अंसारी को मैदान में उतार कर अपना परम्परागत मुस्लिम कार्ड खेला है। मुरादाबाद निकाय चुनाव में सभी पार्टियों ने अपने अपने तरीके आजमाने शुरू कर दिए है। सपा ने युसूफ अंसारी को मैदान में उतार कर मुस्लिमों को अपनी तरफ आकर्षित करने का पैंतरा अपनाया है। अगर यह सही साबित हुआ तो भाजपा के लिए बहुत मुसीबत हो सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मुस्लिम वोट तो तीन हिस्सों में बँट जायेंगे जिसमें से कोई भी भाजपा के पक्ष में आने वाला नहीं है। भले ही भाजपा ने मुस्लिमों को टिकट दिए है लेकिन इसका फायदा भाजपा को मिलने वाला नहीं और यह बात पार्टी भी भली-भाँति जानती है।

देखा जाए तो भाजपा की मुश्किलें और बढ़ सकती है क्योंकि मुरादाबाद में 2 लाख के करीब की आबादी अनुसूचित जाति की है है। अगर इसमें विभाजन हो गया तो भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। बहुजन समाजवादी पार्टी के आ जाने से इन वोटरों का ध्रुवीकरण होना निश्चित है। मुरादाबाद शहरी क्षेत्र की कुल जनसंख्या 8,87,871 है जिसमें सभी धर्मों के लोग निवास करते है।

मुरादाबाद की धर्म आधारित जनसंख्या

हिन्दू – 4,58,854 -51.68%
मुस्लिम – 4,15,448 – 46.79%
ईसाई – 5,412 – 0.61%
सिख – 3,774 – 0.43%

ऊपर दिए गए आँकड़ों के अनुसार देखा जाए तो बीजेपी को मुरादाबाद निकाय चुनाव में बहुत सक्रिय रहना पड़ेगा। भाजपा की छवि हिंदुत्ववादी राजनीति करने वाले दल की है। इस वजह से बीजेपी को यहाँ दो तरफा मार झेलनी पड़ेगी। एक तरफ जातीय समीकरण तो दूसरी तरफ हिंदुत्ववादी छवि। भाजपा अपने संकल्प पत्र के सहारे चुनाव में अपनी दावेदारी का ढिंढोरा पिट रही है।

मुरादाबाद कांग्रेस के निकाय चुनाव मंडल प्रभारी सुहेल अंसारी ने कहा कि कांग्रेस अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी का मंसूबा अच्छा प्रदर्शन कर जीत हासिल करने का है। मंडल प्रभारी ने कहा कि भाजपा की नीतियों से किसान, व्यापारी और मजदूर परेशान है। महंगाई, जीएसटी और नोटबंदी ने जनता की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसे मुद्दे के तौर पर निकाय चुनाव में पेश करेगी। अंसारी ने कहा कि पूरे प्रदेश की जनता बीजेपी के खिलाफ रोड पर उतरने के लिए तैयार है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को धर्म की राजनीति करने वाला इंसान कहा। अब देखना यह है कि बीजेपी मुरादाबाद में निकाय चुनावों में कैसे पार पाती है।

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