उत्तर कोरिया पर हमला होने की स्थिति में रूस व चीन करेंगे अमेरिका से युद्ध

संयुक्त सैन्य अभ्यास

उत्तर कोरिया के परमाणु व बैलेस्टिक हथियारों के लगातार परीक्षण के चलते अमेरिका उस पर कभी भी हमला कर सकता है। लेकिन उत्तर कोरिया का अप्रत्यक्ष रूप से साथ देने वाले देश चीनरूस ऐसा आसानी से नहीं होने देंगे।

दो पूर्व सैन्य अधिकारियों की माने तो अगर कोरियाई महाद्वीप पर अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया पर हमला किया जाता है तो उस स्थिति में चीन व रूस मिलकर अमेरिकी सेना पर हमला कर सकते है। इसकी योजना भी बनाई जा रही है।

पश्चिमी नानजिंग सैन्य क्षेत्र के पूर्व डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वांग होंगगुआंग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि उत्तर कोरिया पर हमला अभी या फिर अगले साल मार्च तक हो सकता है।

ये बात एक सम्मेलन के दौरान कही। वहीं अगले दिन चीनी सैन्य विशेषज्ञ, उद्घोषक और लेखक सॉन्ग जोंगपिंग ने कहा कि चीन संभावित खतरे को भांपते हुए अमेरिकी सेना के साथ शामिल हो सकता है।

वांग ने कहा कि चीन को संभावित कोरियाई युद्ध के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार होना चाहिए। ये तैयारी रक्षात्मक रूप से की जानी चाहिए। सॉन्ग ने भी कहा है कि अमेरिका व उत्तर कोरिया के बीच जारी धमकी के बीच बीजिंग में चीन और रूस द्वारा उच्च तकनीक मिसाइल अभ्यास हुए है।

हालांकि सॉन्ग ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों का विरोध किया है। लेकिन साथ ही में चीन व रूस ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक विस्तारवादी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का विरोध किया है।

अमेरिका की मिसाइल तैनाती से है खतरा

चीनी सैन्य विशेषज्ञ सॉन्ग ने बताया है कि चीन व रूस के बीच संयुक्त अभ्यासों का मुख्य लक्ष्य अमेरिका ही है। दरअसल अमेरिका ने बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइल की तैनाती कर रखी है जो कि रूस व चीन दोनों ही देशों के लिए वास्तविक खतरा पैदा कर सकते है।

इसी आशंका से निपटने के लिए चीन व रूस ने मिलकर सैन्य संयुक्त अभ्यास किया है ताकि अस्पष्ट परिस्थितियों में अमेरिका का सामना किया जा सके।

अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप में अत्याधुनिक थाड मिसाइल की तैनाती कर रखी है। चीन का कहना है कि इसे अमेरिका द्वारा तुरंत हटाया जाना चाहिए। थाड की वजह से चीन व दक्षिण कोरिया के बीच में भी तनाव उत्पन्न हुआ था।

अमेरिका की मिसाइल तैनाती की रूस व चीन ने काफी आलोचना की है।

5 दिसंबर को चीनी सशस्त्र पुलिस और रूसी राष्ट्रीय गार्ड ने चीन में एक संयुक्त आतंकवाद प्रतिरोध सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया था। दोनों ही देशों के साथ सैन्य अभ्यास करने का उद्देश्य अमेरिका की सैन्य शक्ति को विदेशों में सीमित करना है।