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    संरक्षित जनजातियों का इलाका

    अंडमान और निकोबार के द्वीप पर अमेरिकी धार्मिक प्रचारक की आदिवासियों की हत्या के बाद उसका शव वापस लेने के लिए अधिकारियों को मशक्कत करनी पड़ी है। पुलिस अधिकारियों को आदिवासियों के साथ मुठभेड़ करनी पड़ी थी। स्थानीय पुलिस प्रमुख दीपेन्द्र पाठक ने कहा कि शनिवार को एक पुलिस की टुकड़ी इस द्वीप पर गयी थी, जहां आदिवासियों द्वारा मारे गए अमेरिकी धर्म प्रचारक को आखिरी बार देखा गया था।

    उन्होंने कहा कि किनारे से 400 मीटर दूरी से पुलिस ने कई आदिवासियों को देखा, जिनके हाथों में तीर और धनुष थे। ख़बरों के मुताबिक इन हथियारों का इस्तेमाल आदिवासियों ने अमेरिकी प्रचारक को मारने के लिए भी इस्तेमाल किया था। दीपेन्द्र पाठक ने कहा कि इस आदिवासियों के इलाके को नुकसान न पहुंचाने का पुलिस ने भरसक प्रयास किया और पुलिस ने कहा कि उन्हें प्रचारक का शव चाहिए।

    इन आदिवासियों ने 17 नवम्बर को 27 वर्षीय एक अमेरिकी धर्म प्रचारक को मार दिया था। आज भी ऐसी जनजातियों के संरक्षण करने की आवश्यकता है, जिनकी भाषा और रहन-सहन बाहरवालों के लिए एक रहस्य बना हुआ है। अमेरिकी प्रचारक को इस द्वीप में ले जाने वाले मछवारे ने कहा कि उसने आदिवासियों को उसके शव को किनारे पर दफनाते हुए देखा था।

    इस द्वीप पर आने वाले किसी पर भी यह आदिवासी हमला कर देते हैं, पुलिस ने कहा कि वह इस द्वीप पर निगरानी रखेगी। साल 2006 में भटके हुए दो मछ्वारों की इस में हत्या कर दी गयी थी। इन मछ्वारों की हत्या के बाद इनके शव को लकड़ी से लटकाया गया था। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम साल 2006 के केस पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने मनोवैज्ञानिकों से बाहरी लोगों की हत्या करने पर क्या कदम उठाने चाहिए, इसके बाबत पूछा है।

    अमेरिकी प्रचारक की मौत एक एक हत्या का मामला है और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक उसके शव को वापस लाना संभव नहीं है और न ही इस संरक्षित जनजाति के खिलाफ कोई केस किया जा सकता है। छह मछ्वारों सहित सात लोगों  को प्रचारक को द्वीप पर ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

    By कविता

    कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

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