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चिकन की तरह अब अंडे भी हुए महंगे, जानिए क्या है कारण?

आजकल अंडे के दाम आसमान छू रहे हैं, इसके पीछे अंडों की बढ़ती डिमांड, सब्जियों के दामों में बृद्धि तथा नोटबंदी आदि जिम्मेदार है।

चिकन के साथ ही अब अंडे के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इस समय खुदरे मूल्य पर प्रति अंडा 7 रूपए के हिसाब से बिक रहा है, जो पिछले कुछ सालों में सबसे महंगा है। आप को बता दें कि पुणे के पोल्ट्री फॉमर्स 585 रूपए प्रति सैकड़े के हिसाब से अंडे बेच रहे हैं। जिसके चलते खुदरे भाव में प्रति अंडा 6.5-7.5 रुपए के हिसाब से बढ़ोतरी हुई है।

जहां अंडे का औसतन वजन 55 ग्राम होता है, उस हिसाब से अंडे का भाव प्रति किलोग्राम 120 से 135 रूपए होता है। जब कि पूणे में चिकन का भाव 130 से 150 रूपए प्रति किलोग्राम है।

अंडे के दामों में बढ़ोतरी

पिछले छह महीनों में पूणे में अंडे के दामों में बेमिसाल बढ़ोतरी देखने को मिली है। आप को बता दें कि पूणे में यही अंडा पहले 375 रूपए सैकड़े के हिसाब से बिक रहा था अब इसकी कीमत सैकड़े के हिसाब से 585 रूपए हो चुकी है।

आमतौर पर तो सर्दियों में अंडे की कीमतें बढ़ती हैं, जबकि ब्रॉयलर के दरों में गिरावट देखने को मिलती है क्यों कि इनकी आपूर्ति बढ़ जाती है। लेकिन अंडे के दामों में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी पहले कभी नहीं देखी गई।

तमिलनाडु के इरोड स्थित एक अग्रणी अंडा उत्पाद निर्माता का कहना है कि अंडे की तुलना में ब्रॉयलर उत्पादन चक्र बहुत छोटा होता है। 40 ग्राम के एक चूजे को 2 से 2.5 किलोग्राम तक होने में केवल 40-42 दिन लगता हैं, जबकि सर्दियों में ये 37-38 दिनों में ही ​तैयार हो जाते हैं।

दामों में बढ़ोतरी के कारण

अंडे की बढ़ी डिमांड

राष्ट्रीय एग समन्वय समिति (एनईसीसी) के कार्यकारी सदस्य राजू भोसले का कहना है कि वैसे तो आमतौर पर हर साल में अंडे की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिलती है लेकिन इस बार अंडे की डिमांड पहले से 15 फीसदी ज्यादा बढ़ गई है।

आसमान छूते सब्जियों के भाव

अंडे के दामों में अचानक बढ़ोतरी के पीछे सब्जियों की महंगाई भी है। मार्केट में खुदरे भाव पर गोभी,फूलगोभी और बैंगन 60-100 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहे हैं। अत: लोग सब्जियों के महंगे होने पर अंडे खरीदते हैं। ऐसे में अंडों के दामों का बढ़ना लाजिमी है। हांलाकि यह एक अस्थाई प्रभाव है।

नोटबंदी का असर

एनईसीसी के मैसूर ज़ोन के अध्यक्ष एमपी सतीश बाबू  का कहना है कि 500 तथा 1000 रूपए के नोटों की वापसी के बाद ब्रॉयलर और अंडों की खरीददारी पर सीधा असर पड़ा। आप को बता दें कि एनईसीसी मैसूर जोन के पोल्ट्री फॉमर्स और व्यापारियों के साथ मिलकर काम करता है।

कर्नाटक-तमिलनाडु में पड़ने वाला सूखा

विमुद्रीकरण के साथ कर्नाटक और तमिलनाडु में पड़ने के कारण मक्का 1900 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिका। ऐसे में पोल्ट्री फॉमर्स ने अपने व्यवसाय बिल्कुल ही कम कर दिया। इसलिए भी अंडे के दामों में इतनी बढ़ोतरी देखने को मिली।

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