रविवार, दिसम्बर 8, 2019

महाराष्ट्र में बांध टूटा, 11 मरे, पीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट

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पंकज सिंह चौहान
पंकज दा इंडियन वायर के मुख्य संपादक हैं। वे राजनीति, व्यापार समेत कई क्षेत्रों के बारे में लिखते हैं।

रत्नागिरी (महाराष्ट्र), 3 जुलाई (आईएएनएस)| महाराष्ट्र में भेंडेवाड़ी गांव के निकट मंगलवार देर रात मूसलाधार बारिश होने के बाद एक छोटा बांध टूटने से ग्यारह लोगों की मौत हो गई और बारह लोग लापता हो गए। एक व्यक्ति को जीवित बचा लिया गया। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। जिले के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “तिवेर बांध हादसे पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), केंद्रीय गृह मंत्रालय, महाराष्ट्र के राज्यपाल और राज्य मुख्यालय मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी थी जो भेज दी गई है। ”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की उच्चस्तरीय जांच का आदेश दिया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने घटनास्थल का दौरा किया और बांध की मरम्मत और हादसे में घर गंवाने वाले ग्रामीणों को आवास मुहैया कराने में तेजी से काम करने का भरोसा दिलाया।

विपक्ष के नेता कांग्रेस के विजय वेडेट्टिवर ने राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों, शिवसेना के उस विधायक जिसकी कंपनी ने बांध बनाया है, पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने मंत्री महाजन के इस्तीफे की मांग की।

रेजीडेंट डिप्टी कलेक्टर दत्ता भडकवाड़ ने आईएएनएस से कहा कि भारी बारिश के कारण तिवेर बांध मंगलवार रात स्तर से ऊपर बहने लगा और कुछ समय बाद ही रात करीब 9.30 बजे यह टूट गया।

इसके बाद कम से कम सात गांवों में बाढ़ आ गई, भेंडेवाड़ी में दर्जनभर घर बह गए, जिनमें 14 परिवार रह रहे थे।

जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित ये प्रभावित गांव दादर, अकले, रिकटोली, ओवाली, करकवने और नंदीवासे हैं। इन गांवों की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 3,000 है।

आपदा प्रबंधन अधिकारी अजय सूर्यवंशी ने कहा कि सभी प्रभावित लोग भेंडेवाड़ी गांव के हैं, जो तिवेर बांध की दीवार के किनारे बसा है और अन्य प्रभावित गांवों में से किसी के मरने की खबर नहीं आई है।

उन्होंने कहा, “कल (मंगलवार) रात गांवों में बाढ़ आ गई थी, लेकिन अब बांध का पानी कम होने और बारिश की रफ्तार कम होने से स्थिति सामान्य है।”

खोजी दल को अब तक ग्यारह शव मिले हैं। पानी में ग्रामीणों के लगभग 20 वाहन भी बह गए।

पुणे और सिंधुदुर्ग से अग्निशमन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों के अलावा आस-पास के क्षेत्रों के स्वयंसेवी लोगों ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया। शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए।

महाजन ने कहा, “स्थानीय लोगों ने बांध से पानी रिसने की शिकायत दर्ज कराई थी और मरम्मत कराने की मांग की थी। उन्हें बताया गया था कि मरम्मत की जा चुकी है, लेकिन अब ये त्रासदी हो गई। हम पूरे मामले की जांच करेंगे।”

यह बांध साल 2000 में बना था और भडकवाड़ ने कहा कि इसकी क्षमता 2,452 टीएमसी थी।

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