पाकिस्तान विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने नाटो सहयोगियों को भारत-पाकिस्तान तनावों के बाबत बताया

Pakistan's new Foreign Minister Shah Mehmood Qureshi listens during a news conference at the Foreign Ministry in Islamabad, Pakistan August 20, 2018. REUTERS/Faisal Mahmood

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने नार्थ अटलांटिक ट्रीटी आर्गेनाईजेशन के महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग से सोमवार को बेल्जियम में मुलाकात की थी और उन्होंने महासचिव को नई दिल्ली और इस्लामनबाद के बीच तनावों पर सुरक्षा चिंताओं के बाबत समझाया था।

कुरैशी ने नाटो के महासचिव से बेल्जियम में आंतरिक सरकार गठबंधन के मुख्यालय में मुलाकात की थी। जिओ न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि “इस्लामाबाद के निरंतर प्रयासों के बावजूद भारत सहयोग करने के लिए इच्छुक नहीं है।”

मुलाकात के बाद कुरैशी के हवाले से कहा गया कि यह बातचीत पाकिस्तान-नाटो की आपसी समझ और संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। महासचिव ने दक्षिणी और मध्य एशिया क्षेत्र, खासकर अफगानिस्तान में शान्ति और स्थिरता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों और कुर्बानियों की सराहना की है।

कुरैशी रविवार को दो दिवसीय यात्रा पर ब्रुसेल्स पहुंचे थे। यात्रा पर जाने से पूर्व कुरैशी ने कहा था कि “पाकिस्तान नाटो के साथ सहयोग कर रहा है और अफगानिस्तान से सम्बंधित मामले में हम अमेरिका और नाटो की सेना को अभूतपूर्व मदद को बढ़ाएंगे।”

रणनीतिक वार्ता सुरक्षा, मानव अधिकार, बेहतर प्रशासन और सामाजिक-आर्थिक विकास, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों को कवर करता है। एसीडी की यूरोपीय संघ ने साल 2009 में शुरुआत की थी ताकि सेना की तानाशाही के लम्बे वक्त के बाद पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना की जा सके।

पाकिस्तान में लोकतंत्र के बहाल होने के लिए ईयू ने सहयोग के स्तर को बढ़ा दिया था और देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में मदद मुहैया की थी। दो सम्मेलनों के बाद पाकिस्तान ईयू के साथ शिखर सम्मेलन के स्तर के संबंधों को बरक़रार नहीं रख सका था। एक राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी और दूसरी दफा प्रधानमंत्री योसेफ रजा गिलानी के कार्यकाल में ऐसा हुआ था।

पांच वर्षों के पूरा होने के बाद एसीडी ने साल 2014 में इसका एक बार और विस्तार किया था। पाकिस्तान ने आग्रह किया कि एसईडी को स्थायी कार्यक्रम होना चाहिए ताकि विश्व को दिखाया जा सके कि पाकिस्तान एक स्थिर लोकतंत्र है और वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नियमों का पालन करता है।

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