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नए दिवालिया कोड से बैंकों को धोखा देने वालों पर गिरेगी गाज

दिवालिया कोड में संशोधन
धोखेबाज ऋणदाताओं तथा दिवालिया कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए सरकार ने दिवालिया कोड में संशोधन किया है।

अब उन लोगों के लिए दुश्वारियां बढ़ने जा रही है जो ऋण चुकाने में सक्षम होते हुए भी धोखाधड़ी करते आ रहे हैं। अब ऐसे धोखेबाज ऋणदाताओं तथा दिवालिया कंपनियों के खिलाफ मोदी सरकार अपनी लड़ाई तेज करने जा रही है। दरअसल सरकार ने अपने तत्काल प्रभाव से दिवालिया कानून अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

इस अध्यादेश का प्रभाव सीधेतौर पर उन व्यवसायिक घरानों पर पड़ने जा रहा है, जो सक्षम होने के बावजूद भी दिवालिया होने के नाम अपने फर्मों को बंद करने जा रहे हैं। इन व्यवसायिक घरानों में प्रमुख रूप से एस्सार, भूषण स्टील, भूषण पावर और स्टील, मॉनेट इस्पात और जेपी इंफ्राटेक आदि का नाम शामिल है।

आप को जानकारी के लिए बता दें कि इस दिवालिया कानून संशोधन के तहत निविदा से जुड़े धाराओं को कठोर बना दिया गया है, जिसके तहत कंपनियों को बोली लगाने की प्रक्रिया में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है।  सरकार ने इस नए दिवालिया कोड के जरिए एक साल से अधिक समय तक जानबूझकर कर्ज ना चूकाने वालों को फिर से दिवालिया कंपनी के अधिग्रहण करने पर रोक लगा दी गई है।

गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र ​दिसंबर के मध्य में शुरू होने की संभावना है, ऐसे में इस दिवालिया कोड अध्यादेश की घोषणा इससे पहले ही होगी। इस प्रकार ज्यादातर बैंक अब संकटग्रस्त परि​संपत्तियों से निपटने की कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। यही नहीं धोखेबाज ऋणदाताओं के खिलाफ शुरू की गई इस लड़ाई में सरकार के साथ रिर्जव बैंक आफ इंडिया भी एक मजबूत चरण में प्रवेश करने जा रही है।

आप को बता दें कि आरबीआई जून महीने में ही ज्यादातर बैंकों को उन 12 कंपनियों की पहली सूची सौंप चुकी है, जिनके खिलाफ इनसॉल्वेंसी के तहत कार्रवाई करनी है। यही नहीं आरबीआई के डिप्टी गवर्नर आचार्य के अनुसार दिवालिया हो चुकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने की दूसरी सूची भी बैंकों को उपल्ब्ध करा दी गई है।

देश के ज्यादातर बैंक फर्जी ऋणदाताओं की वजह से तनावग्रस्त हैं,  इस समस्या से निपटने के लिए मध्यवर्ती बैंक नियमों के तहत रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया ने जनवरी 2015 में ही अपनी लड़ाई शुरू कर दी थी। सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंक एनपीए समस्या से प्रभावित हैं।

कुख्यात कॉर्पोरेट-राजनीतिक गठजोड़ के चलते देश के बैंक धोखेबाज ऋणदाताओं और कंपनियों के जाल में फंसते गए। ना केवल यूपीए सरकार बल्कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए-सरकार भी इस समस्या से जूझ रही थी। तत्पश्चात इन फर्जी ऋणदाताओं पर शिकंजा कसने के लिए दिवालिया कोड अध्यादेश को मंजूरी दी गई।

एनपीए के खतरनाक आंकड़े

30 सितंबर 2017 को भारतीय बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) या बुरा ऋण 8.40 लाख करोड़ रूपए से ज्यादा है। लेकिन सच्चाई तो यह है कि यदि कोई खाता खोल लेता है तो एनपीए संपत्ति का अंतिम आंकड़ा आसानी से दोगुना हो सकता है। ऐसी फर्जी परिसंपत्तियों से निपटने के लिए सरकार और आरबीआई ने कमर कस ली है।

दरअसल मोदी सरकार को सबक उस वक्त मिली जब विजय माल्या बड़ी चतुराई के साथ 17 बैंकों से 9,000 करोड़ रुपए का लोन लेकर देश से चंपत हो गया। अब विजय माल्या को दोबारा देश में खींचकर लाने के लिए बैंकों तथा सरकार को एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।

दिवालिया कोड में किए गए ये पांच संशोधन-

1. अध्यादेश में सेक्शन 29 ए शामिल किया गया है, जो धोखेबाज ऋणदाताओं को आवेदक होने के लिए अयोग्य बना देता है। इसमें उन बकाएदारों को शामिल किया गया है, जिनके खातों को एक या अधिक वर्षों से गैर-निष्पादित संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
2. इस अध्यादेश के जरिए वे लोग भी सलाखों के पीछे जा सकते हैं जो एनपीए का निपटान करने में असमर्थ हैं।
3. जो लोग कर्जदार के पक्ष में एक प्रवर्तनीय गारंटी को अंजाम देते हैं, कॉर्पोरेट ऋणी के संबंध में भी आवेदक होने से अयोग्य बना दिया गया है।
4. कोड में शामिल धारा 235 ए के तहत प्रावधानों के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान किया गया है। यह सजा एक लाख से लेकर 2 करोड़ रुपये के बीच होगी।
5. इस अध्यादेश के जरिए सरकार एनपीए खरीददारों का अपने इच्छानुसार चयन कर बैंकों को बेहतर कीमतें दिलाने में मदद कर सकती है।




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