दा इंडियन वायर » विज्ञान » तनाव व खिंचाव क्या है? अंतर, जानकारी
विज्ञान

तनाव व खिंचाव क्या है? अंतर, जानकारी

stress and strain in hindi


तनाव और खींचाव सॉलिड मैकेनिक के बहुत ही ज़रूरी अंग हैं। इन्हें जानने के पश्चात हम सोलिडस के कई गुण समझ पाएँगे। परंतु उससे पूर्व कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है –
  1. कठोर पिंड (rigid body) – रिजिड बॉडी किसी सख्त सॉलिड को कहेंगे, जिसका एक निश्चित रूप तथा आकर हो।
  2. लचीलापन (elasticity) – किसी पिंड का वह गुण जिस कारण जब उस पर लगाया गया बल हटा दिया जाए तो वह अपने वास्तविक रूप और आकार में आ जाए, उसे लचीलापन कहते हैं।
  3. ढलनशीलता (plasticity) – किसी पिंड वह गुण जिस कारण जब उस पर लगाया हुआ बल हटा दिया जाए, तो वह अपने वास्तविक रूप तथा आकार में वापस ना आए, और उस विकृति को स्वीकार कर ले। जैसे मिट्टी प्लास्टिसिटी दिखाती है।

ठोस का लचीला व्यवहार (Elastic behaviour of solids in hindi)

वास्तविकता में, बल लगाने पर सोलिडस में विकृति आती है, भले ही लोहे का सरिया ही क्यों न हो। परंतु वह विकृति परमाणु स्तर पर होती है, जिस कारण हम उसे आसानी से देख नहीं पाते।

सॉलिड में विकृति लाने हेतु विशाल बल की आवश्यकता होती है।

तनाव (physics Stress in hindi)

जब किसी पिंड पर बल लगाया जाता है, ताकि उसमे विकार लाया जा सके, तब उस सॉलिड में एक रिस्टोरिंग फ़ोर्स ( सॉलिड के भीतर उत्पन्न होने वाला बल ) लगता है,जो लगाए हुए बल जितना ही होता है, परंतु विपरीत दिशा में लगता है।

इसी रिस्टोरिंग फ़ोर्स प्रति यूनिट एरिया ( क्षेत्र ) को स्ट्रेस कहते हैं। यदि लगाया गया बल ‘F’ है और एरिया ‘A’, तब
स्ट्रेस = F/A
स्ट्रेस का SI यूनिट Nm^(-2) है।

स्ट्रेस के प्रकार (Types of stress in hindi)

स्ट्रेस मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है –
1) तन्य तनाव ( टेन्साइल स्ट्रेस )
2) संपीड़न तनाव ( कंप्रेसिव स्ट्रेस )
3) शियरिंग/ टेन्जेन्शियल स्ट्रेस

1. टेन्साइल स्ट्रेस (Tensile stress in hindi)

किसी सिलिंडर को जब उसके पार अनुभागीय क्षेत्र के अधोलम्ब ( normal to the cross sectional area ) खींचा जाए, तो तब उसमें जो रिस्टोरिंग बल पेर यूनिट एरिया उत्पन्न होगा, उसे टेन्साइल स्ट्रेस कहेंगे।

2. कंप्रेसिव स्ट्रेस (Compressive stress in hindi)

किसी सिलिंडर को जब उसके पार अनुभागीय क्षेत्र के अधोलम्ब (normal to the cross sectional area) दबाया जाए, तो तब उसमें जो रिस्टोरिंग बल पेर यूनिट एरिया उत्पन्न होगा, उसे कंप्रेसिव स्ट्रेस कहेंगे।

3. शियरिंग/ टेन्जेन्शियल स्ट्रेस (Shearing/Tangential stress in hindi)

जब दो वक समान परंतु विपरीत दिशा वाले बल सिलिंडर के पार अनुभागीय क्षेत्र के समानांतर ( parallel to the cross sectional area ) लगाए जाएँ, तब सिलिंडर के सापेक्ष एक विस्थापन होता है। इस बल के लगने से जो रिस्टोरिंग बल प्रति यूनिट एरिया उत्पन्न होगा, उसे शियरिंग अथवा टेन्जेन्शियल स्ट्रेस कहेंगे।

भौतिक खिंचाव (Strain in physics in hindi)

स्ट्रेस के कारण सिलिंडर की लंबाई तथा उसके आकार में बदलाव आते हैं। इन्ही बदलावों के कारण सिलिंडर में स्ट्रेन आता है।

मुख्य रूप से स्ट्रेन दो प्रकार के होते हैं –
1) लौन्गिट्युडनल स्ट्रेन
2) शियरिंग स्ट्रेन

1. लौन्गिट्युडनल स्ट्रेन (Longitudinal strain in hindi)

टेन्साइल स्ट्रेस तथा कंप्रेसिव स्ट्रेस से पैदा होने वाले स्ट्रेन को लौन्गिट्युडनल स्ट्रेन कहते हैं। मान लें से स्ट्रेस लगने से पहले सिलिंडर की लंबाई ‘L’ थी तथा स्ट्रेस लगने बाद लंबाई में ∆L का अंतर आया।

तो लौन्गिट्युडनल स्ट्रेन = ∆L/L

2. शियरिंग स्ट्रेन (Shearing strain in hindi)

शियरिंग अथवा टेन्जेन्शियल स्ट्रेस लगने के कारण के दोनों चेहरों के सापेक्ष विष्ठापन हो जाता है। मान लें कि वह विस्थापन ∆x है और सिलिंडर की लंबाई L।

तब शियरिंग स्ट्रेन = ∆x/L = tan¢,
जहाँ ¢ सिलिंडर का अपने वास्तविक स्थान से कोणीय विस्थापन ( एंगुलर डिस्प्लेसमेंट ) है।

3. जलीय स्ट्रेस (Hydraulic stress in hindi)

तीन मुख्य स्ट्रेस के अतिरिक्त एक और स्ट्रेस, हाइड्रोलिक स्ट्रेस भी होता है।

यदि किसी गेंद को उच्च दबाव वाले तरल में डाल दिया जाए तो उसपर हर ओर से एक समान बल लगता है। यह बल हर बिंदु पर अधोलम्ब ( perpendicular ) होता है।

गेंद आंतरिक रिस्टोरिंग बल लगती है जो कि तरल के बल के समान परंतु विपरीत दिशा में होती है। गेंद तरल से बाहर निकलने पर पुनः अपने आकर में आ जाती है। इस रिस्टोरिंग बल प्रति यूनिट एरिया को हाइड्रोलिक स्ट्रेस कहेंगे।

यह हाइड्रोलिक दबाव प्रति यूनिट एरिया के बराबर होता है।

4. अयातन खींचाव (Volume strain)

हाइड्रोलिक स्ट्रेस द्वारा उत्पन्न किए गए स्ट्रेन को वॉल्यूम स्ट्रेन कहते हैं। यदि गेंद का वॉल्यूम ‘V’ है और तरल में डालने से वॉल्यूम में परिवर्तन ‘∆V’, तब

वॉल्यूम स्ट्रेन = ∆V/V

हूक का नियम (Hooke’s law in hindi)

स्ट्रेस तथा स्ट्रेन के प्रकार के हो सकते हैं। परंतु हूक ने कहा कि छोटी विकृतियों के लिए स्ट्रेस तथा स्ट्रेन एक दूसरे के आनुपातिक (प्रोपोर्शनल) होंगे।

इसलिए –
स्ट्रेस = k × स्ट्रेन
जहाँ k आनुपातिक कांस्टेंट है।
यद्यपि कुछ वस्तुएँ ऐसी भी हैं, जो हूक के कानून को नहीं मानतीं।

हर वस्तु के लिए स्ट्रेस v/s स्ट्रेन का ग्राफ भी बनाया जा सकता है जिससे उसकी अन्य विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यंग्स मौड्युलस (Young’s Modulus in hindi)

किसी दिए गए स्ट्रेस के लिए, फिर वह टेन्साइल हो या कंप्रेसिव, स्ट्रेन की मात्रा सदा उतनी ही रहेगी।

टेन्साइल या कंप्रेसिव स्ट्रेस के लौन्गिट्युडनल स्ट्रेन के साथ अनुपात ( रेश्यो ) को यंग्स मौड्युलस (Y) कहते हैं।
Y = – स्ट्रेस/ स्ट्रेन

इस विषय से सम्बंधित यदि आपका कोई भी सवाल-जवाब है, तो आप उसे नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।

About the author

अनुश्री कनोडिया

1 Comment

Click here to post a comment

  • तनाव और खिंचाव में अंतर क्या है? क्या दोनों पर दबाव एक जैसा होता है?

फेसबुक पर दा इंडियन वायर से जुड़िये!

Want to work with us? Looking to share some feedback or suggestion? Have a business opportunity to discuss?

You can reach out to us at [email protected]