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‘ट्रिपल तलाक’ के बाद अब ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ की तरफ कदम बढ़ाएगी ‘मोदी सरकार’

मोदी सरकार
'ट्रिपल तलाक' पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भाजपा के हित में आया है और यह मुस्लिम समाज में भाजपा की छवि को सुधारने का काम करेगा। भाजपा भी इस मौके को भुनाने में कोई कसार नहीं छोड़ना चाहेगी। हालांकि 'ट्रिपल तलाक' पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार को 'यूनिफार्म सिविल कोड' लागू करने में कोई मदद नहीं मिलेगी पर परोक्ष रूप से यह सरकार के पक्ष में माहौल बनाने में कारगर होगा।

मंगलवार, 22 अगस्त का दिन भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो गया। कल माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘ट्रिपल तलाक’ पर रोक लगा दी। इसके साथ ही सदियों से चली आ रही यह ‘कुप्रथा’ भी समाप्त हो गई। सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की बेंच ने 3-2 से ‘ट्रिपल तलाक’ को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने के अंदर केंद्र सरकार से ‘ट्रिपल तलाक’ के खिलाफ कानून बनाने को भी कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था कि “माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तीन तलाक पर दिया गया फैसला ऐतिहासिक है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक़ मिलेगा और महिला सशक्तिकरण की ओर यह एक बड़ा कदम है।”

ट्रिपल तलाक़
ट्रिपल तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार को मुस्लिम महिलाओं के पक्ष को विवेकपूर्ण और न्यायपूर्ण तरीके से रखने के लिए धन्यवाद कहा था। ट्रिपल तलाक पर रोक लगाने में भाजपा सरकार का अहम योगदान रहा है। भाजपा हमेशा से ही ट्रिपल तलाक के खिलाफ खड़ी थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार इस ‘कुप्रथा’ को ख़त्म करने की बात कर चुके थे। भले ही लोग इसे चुनावी पैंतरा कहे पर नरेंद्र मोदी ने हमेशा ही सार्वजनिक मंचों से इस मसले पर मुस्लिम महिलाओं के हक़ में बात की थी। शायद यही वजह थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने समर्थन भी दिया और सारे सियासी समीकरण भाजपा के पक्ष में हो गए।

‘ट्रिपल तलाक’ के ख़त्म होने के बाद अब पूरे देश की निगाहें मोदी सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ की तरफ कदम बढ़ाएगी। ‘ट्रिपल तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भाजपा के हित में आया है और यह मुस्लिम समाज में भाजपा की छवि को सुधारने का काम करेगा। भाजपा भी इस मौके को भुनाने में कोई कसार नहीं छोड़ना चाहेगी। हालांकि ‘ट्रिपल तलाक’ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार को ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ लागू करने में कोई मदद नहीं मिलेगी पर परोक्ष रूप से यह सरकार के पक्ष में माहौल बनाने में कारगर होगा।

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान जारी मैनिफेस्टो में भाजपा ने ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ का वादा किया था। मैनिफेस्टो के पृष्ठ संख्या 41 पर इस सन्दर्भ में कहा गया था कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 नागरिकों को सामान अधिकार का हक़ देता है। ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ लागू होने की दशा में देश में सभी धर्मों के नियम एक समान होंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘ट्रिपल तलाक’ पर सुनाये गए फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी बैकफुट पर है। सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा को लेकर सुनवाई चल रही है। ऐसे में मोदी सरकार ‘यूनिफार्म सिविल कोड’ का दांव खेलकर मुस्लिम महिलाओं के वोटों को अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश करेगी।

शीतकालीन सत्र में ट्रिपल तलाक पर विधेयक

ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला लाखों महिलाओं के जीवन में खुशियां लेकर आया था। केंद्र की सत्ताधारी मोदी सरकार की सार्थक पहल के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के हक की आवाज सुनी थी और उनके पक्ष में अपना फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को अवैध और अनैतिक करार दिया था और केंद्र सरकार को 6 महीने के भीतर इसपर कानून बनाने को कहा था। अब खबर आ रही है कि दिसंबर महीने में शुरू होने वाले संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ट्रिपल तलाक पर कानून बनाने के लिए विधेयक लाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मन्त्रिमण्डल में महिलाओं को अहम स्थान देते आए हैं और बीते दिनों उन्होंने निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था। ट्रिपल तलाक के अलावा मोदी सरकार की नजर महिला आरक्षण बिल को पास कराने पर भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा महिला सशक्तीकरण को 2019 लोकसभा चुनाव में अहम चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है। इसके लिए वह फूँक-फूँक कर कदम बढ़ा रही है। ट्रिपल तलाक पर भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा ही मुस्लिम महिलाओं का पक्ष लिया था और नतीजन आज मुस्लिम समाज में उनकी स्वीकार्यता और लोकप्रियता बढ़ गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के हर विधेयक में टांग अड़ाने वाले विपक्ष का इस मसले पर क्या रवैया रहता है।

पहले भी आवाज उठा चुके हैं मोदी

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मुस्लिम महिलाओं ने उनसे ‘ट्रिपल तलाक’ ख़त्म करने की गुजारिश की थी। प्रधानमंत्री मोदी खुद भी इस मुद्दे को कई बार उठा चुके हैं और इस पर अपनी राय दे चुके हैं। चुनाव पूर्व भाजपा ने भी ‘ट्रिपल तलाक’ को ख़त्म करने को कहा था। केंद्र की मोदी सरकार इस मुद्दे पर अपने रुख को लेकर शुरू से स्पष्ट थी और वह ‘ट्रिपल तलाक’ खत्म करना चाहती थी। भाजपा की भुवनेश्वर में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि “मुस्लिम बहनें ‘ट्रिपल तलाक’ की वजह से तकलीफ में हैं। उनके साथ इन्साफ होना चाहिए। भाजपा इस मुद्दे पर एकमत है और वह ट्रिपल तलाक को ख़त्म करना चाहती है।”

मुस्लिम बहनों ने भेजी थी भाई मोदी-योगी को राखी

रक्षाबंधन पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुस्लिम महिलाओं ने मोदी-योगी की तस्वीर के साथ रैली निकाली थी और उन्होंने तस्वीर को राखी बाँधी थी। देश के दो सबसे सशक्त भाजपा नेता और हिंदुत्व के चेहरों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम महिलाओं के हक़ में ‘ट्रिपल तलाक’ के विरुद्ध आवाज उठाई थी। यह एक अप्रत्याशित बात थी क्योंकि दोनों की छवि ‘मुस्लिम विरोधी’ नेता की रही है।

मोदी और योगी
भाई ‘मोदी-योगी’ को मुस्लिम बहनों ने भेजी राखी

इस कुप्रथा के विरुद्ध लड़ाई में साथ देने के बाद इन दोनों भाइयों को मुस्लिम बहनों का भरपूर समर्थन और प्यार मिला था। इस मुद्दे पर उनके हक़ की आवाज उठाने के लिए मुस्लिम बहनों ने मोदी और योगी को रक्षाबंधन पर अनूठी सौगात दी थी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुस्लिम महिलाओं ने मोदी और योगी की तस्वीर के साथ रैली निकाली थी और तस्वीरों को राखी भी बाँधी थी। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय पर भी बड़ी संख्या में मुस्लिम बहनों द्वारा भेजी गई राखियाँ मिलने की खबर आई थी।

About the author

हिमांशु पांडेय

हिमांशु पाण्डेय दा इंडियन वायर के हिंदी संस्करण पर राजनीति संपादक की भूमिका में कार्यरत है। भारत की राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु भारत की राजनीतिक उठापटक से पूर्णतया वाकिफ है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक करने के बाद, राजनीति और लेखन में उनके रुझान ने उन्हें पत्रकारिता की तरफ आकर्षित किया। हिमांशु दा इंडियन वायर के माध्यम से ताजातरीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपने विचारों को आम जन तक पहुंचाते हैं।

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